मल्हार अध्याय 6 न्याय और करुणा से जुड़ी सहायता

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया।” कहानी के इस प्रसंग को ध्यान में रखते हुए नागरिक शिकायत प्रक्रिया के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए। इसके बारे में अपने घर और आस-पास के लोगों को भी जागरूक कीजिए।
उत्तर

कहानी की वृद्धा के पास न वकील था, न जानकारी। आज स्थिति अलग है — शिकायत करने के लिए कई रास्ते खुले हैं और उनमें से कई निःशुल्क हैं। पाठ में तीन उदाहरण दिए गए हैं; उन्हें समझ लीजिए —

व्यवस्थाक्या हैकब काम आती है
सार्वजनिक शिकायत सुविधाभारत सरकार का ऑनलाइन शिकायत पोर्टल, जहाँ कोई भी भारतीय केंद्र या राज्य सरकार के किसी भी विभाग से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकता है। भारत की 22 भाषाओं में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।जब किसी सरकारी विभाग ने काम न किया हो, देर की हो या गलत किया हो। शिकायत का एक नंबर मिलता है जिससे उसकी स्थिति देखी जा सकती है।
जनसुनवाईहर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में शुरू की गई सुविधा, जिसमें अधिकारी तय दिन पर लोगों की शिकायतें सीधे सुनते हैं। इंटरनेट के माध्यम से भी इसका उपयोग किया जा सकता है।जब बात लिखकर समझाना कठिन हो या तुरंत सुनवाई चाहिए — जैसे ज़मीन, राशन, पेंशन या बिजली-पानी के मामले।
सामाजिक सुरक्षा कल्याण योजनाएँवृद्धों, विधवाओं, दिव्यांगों और गरीब परिवारों के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाएँ — पेंशन, आवास, राशन आदि। इनकी जानकारी सरकार की वेबसाइट पर एक जगह मिलती है।जब किसी के पास आय या सहारा न हो — ठीक वैसी स्थिति में जैसी कहानी की वृद्धा की थी।
एक और ज़रूरी अधिकार: देश में निःशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था भी है। स्त्रियों, बच्चों, वृद्धों और कम आय वाले लोगों को अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए सरकार की ओर से मुफ़्त वकील मिल सकता है। इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (District Legal Services Authority) से संपर्क किया जाता है, जिसका कार्यालय हर ज़िला न्यायालय में होता है। वृद्धा हारी इसलिए नहीं थी कि उसका पक्ष कमज़ोर था — वह हारी क्योंकि उसका पक्ष रखने वाला कोई नहीं था।

जागरूकता का काम कैसे कीजिए —

  • ऊपर की जानकारी का एक सादा पोस्टर बनाइए — बड़े अक्षरों में, चित्रों के साथ, अपनी भाषा में।
  • उसमें केवल तीन बातें रखिए: शिकायत कहाँ करें, कौन-से कागज़ चाहिए, और सहायता किससे मिलेगी।
  • विद्यालय की दीवार पत्रिका और मोहल्ले की दुकान या पंचायत भवन पर लगाइए।
  • घर के बड़ों को बताइए — बहुत से लोग इसलिए चुप रह जाते हैं क्योंकि उन्हें रास्ता मालूम ही नहीं होता।
ध्यान रखिए: वेबसाइट का पता, हेल्पलाइन नंबर और कार्यालय का समय बदलते रहते हैं। पोस्टर बनाने से पहले शिक्षक की मदद से इन्हें सरकारी वेबसाइट पर जाँच लीजिए — गलत जानकारी बाँटना मदद नहीं, नुकसान है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ