मल्हार अध्याय 6 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी? • झोंपड़ी जर्जर हो चुकी थी • झोंपड़ी रास्ते में बाधा थी • वह अहाते का विस्तार करना चाहता था • वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था
उत्तर

★ वह अहाते का विस्तार करना चाहता था।

“ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।”

कहानी की तीसरी ही पंक्ति में कारण साफ़ लिखा है। महल पहले से है, अहाता पहले से है — ज़मींदार को बस उसे और आगे तक फैलाना है, और बीच में यह झोंपड़ी पड़ती है।

एक शब्द पर ध्यान दीजिए: प्रश्न पूछता है ‘आवश्यकता क्यों लगी’, पर लेखक ने ‘आवश्यकता’ लिखा ही नहीं — उसने लिखा ‘इच्छा हुई’। यही कहानी का पूरा नैतिक ढाँचा तय कर देता है। वृद्धा के लिए झोंपड़ी ज़रूरत है, ज़मींदार के लिए वह केवल शौक है। जब किसी की इच्छा किसी की ज़रूरत को कुचल दे, वहीं से अन्याय शुरू होता है।

बाकी विकल्प क्यों नहीं —

  • झोंपड़ी जर्जर हो चुकी थी — कहानी में उसकी हालत के बारे में एक शब्द भी नहीं है।
  • झोंपड़ी रास्ते में बाधा थी — किसी रास्ते की चर्चा नहीं; बाधा अहाते के विस्तार में थी, आवागमन में नहीं।
  • वृद्धा से कोई पुराना झगड़ा था — इसके उलट, पहले तो उसने ‘बहुतेरा कहा’ यानी समझा-बुझाकर हटाना चाहा। झगड़ा बाद में उसकी अपनी लालच से पैदा हुआ।
प्र2.
(2) वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी? • क्रोध और झगड़ा करके • अदालत से अनुमति लेकर • विनती और नम्रता से • चुपचाप उठाकर ले गई
उत्तर

★ विनती और नम्रता से।

कहानी में उसके व्यवहार के चार अलग-अलग संकेत हैं, और चारों एक ही ओर इशारा करते हैं —

“पर वह गिड़गिड़ाकर बोली…”
“महाराज क्षमा करें तो एक विनती है।”
“फिर हाथ जोड़कर श्रीमान् से प्रार्थना करने लगी…”
“…वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी…”
यह नम्रता कमज़ोरी नहीं है: वृद्धा जानती है कि झोंपड़ी अब कानूनन ज़मींदार की है — वह खुद कहती है, “अब तो झोंपड़ी तुम्हारी ही हो गई है।” लड़ाई का रास्ता उसके पास बचा ही नहीं। इसलिए वह वही रास्ता चुनती है जो उसके पास है — विनती। और कहानी का कमाल यह है कि इसी विनती के भीतर उसने वह जाल बुन रखा है जिसमें ज़मींदार का अहंकार फँसेगा। नम्रता यहाँ हथियार बन जाती है।

‘क्रोध और झगड़ा’ उसके स्वभाव के भी विरुद्ध है और उसकी स्थिति के भी। ‘अदालत से अनुमति’ लेने की ताकत उसमें होती तो वह झोंपड़ी ही न हारती। और ‘चुपचाप उठाकर ले गई’ तो हो ही नहीं सकता — वह अनुमति माँगने ही आई थी।

प्र3.
(3) वृद्धा की पोती का व्यवहार किस भाव को दर्शाता है? • दया • लगाव • गुस्सा • डर
उत्तर

★ लगाव।

“…मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है। मैंने बहुत कुछ समझाया, पर वह एक नहीं मानती। यही कहा करती है कि अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँगी।”

पाँच बरस की उम्र में जिस घर में वह आई थी, वही उसका सारा संसार है। नया ठिकाना उसे घर नहीं लगता, इसलिए वहाँ की रोटी भी उसके गले नहीं उतरती।

भूख हड़ताल एक बच्ची की: उसके पास न अदालत है, न वकील, न आवाज़। विरोध का जो एक ही तरीका उसके बस में है, वह उसी को अपनाती है — खाना छोड़ देना। इसी ज़िद से पूरी कहानी चलती है: दादी को मिट्टी माँगनी पड़ती है, इसीलिए वह ज़मींदार तक पहुँचती है, इसीलिए टोकरी उठती है। जो पात्र एक-दो पंक्तियों में ही आता है, वही कहानी को आगे ठेलता है।
अगर किसी ने ‘गुस्सा’ चुना हो: उसकी बात मान लीजिए, पर एक अंतर बताइए — गुस्सा किसी पर होता है, यहाँ बच्ची किसी पर नाराज़ नहीं है। यह हठ है, और हठ के नीचे लगाव है। ‘दया’ और ‘डर’ के लिए कहानी में कोई आधार नहीं।
प्र4.
(4) कहानी का अंत कैसा है? • दुखद • सुखद • प्रेरणादायक • सकारात्मक
उत्तर

★ सुखद, ★ प्रेरणादायक और ★ सकारात्मक — तीनों सही हैं। यही वह प्रश्न है जिसके ‘एक से अधिक उत्तर’ हो सकते हैं।

“कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।”
  • सुखद — वृद्धा को उसका घर वापस मिल जाता है; जो छिना था, लौट आता है।
  • प्रेरणादायक — क्योंकि जीत ताकत की नहीं, विवेक की हुई। एक गरीब बुढ़िया ने बिना लड़े, बिना गाली दिए एक ताकतवर आदमी का मन बदल दिया।
  • सकारात्मक — कहानी यह भरोसा छोड़ जाती है कि गलती करने वाला आदमी भी सुधर सकता है। लेखक ज़मींदार को खलनायक बनाकर नहीं छोड़ता, उसे बदलने का मौका देता है।
‘दुखद’ क्यों नहीं: कहानी का बीच का हिस्सा ज़रूर दुखद है — पति, बेटा, बहू, फिर घर, सब छिनते जाते हैं। पर ‘अंत’ का अर्थ है आख़िरी मोड़, और वहाँ पश्चाताप और क्षमा है। ध्यान रखिए, कहानी सुखद इसलिए नहीं है कि सब ठीक हो गया, बल्कि इसलिए कि अन्याय करने वाले को अपने अन्याय का भार महसूस हुआ
प्र5.
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

यह चर्चा का काम है। इसमें सही-गलत से ज़्यादा महत्व इस बात का है कि आप अपने उत्तर के पीछे कहानी की कौन-सी पंक्ति रख पाते हैं

चर्चा का तरीका —

  1. हर साथी पहले अपना उत्तर बताए, फिर वह पंक्ति पढ़े जिससे उसे यह उत्तर मिला।
  2. जहाँ दो लोगों के उत्तर अलग हैं, वहाँ देखिए — क्या दोनों की पंक्तियाँ अलग हैं, या एक ही पंक्ति के दो अर्थ निकाले गए हैं?
  3. अंत में तय कीजिए कि कौन-सा उत्तर पाठ के सबसे नज़दीक है और कौन-सा हमारी अपनी कल्पना से जुड़ गया है।
नमूना उत्तर: “मैंने तीसरे प्रश्न में ‘लगाव’ चुना, क्योंकि पोती कहती है — ‘अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँगी।’ मेरे साथी नीरज ने ‘गुस्सा’ चुना। बात करने पर हम दोनों इस पर सहमत हुए कि बच्ची किसी पर नाराज़ नहीं है, वह अपने घर के लिए अड़ी है — इसलिए ‘लगाव’ पाठ के ज़्यादा नज़दीक है, पर ‘गुस्सा’ भी बिलकुल बेबुनियाद नहीं, क्योंकि खाना छोड़ना विरोध का ही एक रूप है।”
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