मल्हार अध्याय 6 मिलकर करें मिलान

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्षों से मिलाइए।
उत्तर
क्रमवाक्यसर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्षक्यों
1.अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी।वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी।‘आधार’ का अर्थ है सहारा। वाक्य में ‘उसकी’ वृद्धा की ओर संकेत करता है — यानी सहारा वृद्धा को मिल रहा है, पोती से। दूसरा निष्कर्ष वाक्य को उलट देता है।
2.बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपड़ी पर कब्जा किया।‘थैली गरम करना’ का अर्थ ही है रिश्वत देना, और ‘बाल की खाल निकालना’ का अर्थ है व्यर्थ की बारीकियाँ निकालना। दोनों मुहावरे मिलकर बताते हैं कि रास्ता कानूनी दिखता ज़रूर था, पर न्यायपूर्ण नहीं था
3.आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है।वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया।वृद्धा को ज़मींदार की देह की ताकत नापने में कोई रुचि नहीं थी। उसने एक टोकरी से हजारों टोकरियों तक का हिसाब जोड़कर अन्याय के भार की बात कही।
4.ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे।धन और अहंकार ने ज़मींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था।‘मद’ का अर्थ है नशा। धन का नशा उसे यह भुला बैठा कि एक अनाथ वृद्धा के प्रति भी उसका कोई कर्तव्य है। दूसरा निष्कर्ष वाक्य का ठीक उलटा कहता है।
5.कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी।अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर ज़मींदार ने क्षमा माँगी।‘कृतकर्म’ = किया हुआ काम, और क्षमा माँगने वाले ‘उन्होंने’ यानी ज़मींदार हैं। पछतावा और क्षमा दोनों उसी के हैं, वृद्धा के नहीं।
6.उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है।‘जन्म-भर’ शब्द ही ताला खोल देता है। मिट्टी का बोझ तो कुछ पल का होता है; जो बोझ जीवन-भर साथ चलता है, वह पाप का बोझ ही हो सकता है।
7.कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ।वृद्धा ने चतुराई से ज़मींदार को शर्मिंदा करने की योजना बनाई।ऊपर से यह मदद की विनती लगती है, पर आगे की घटनाएँ बताती हैं कि यह सोचा-समझा कदम था — वह चाहती थी कि ज़मींदार अपने हाथ से भार उठाए, तभी उसकी बात दिल तक पहुँचती।
8.उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई।‘स्मरण’ शब्द से साफ़ है कि आँसू यादों के हैं, डर के नहीं। उसी झोंपड़ी में उसका पति और बेटा गुज़रे थे।
7 नंबर पर एक ईमानदार बात: दूसरा निष्कर्ष — ‘सहायता के लिए विनम्र निवेदन’ — गलत नहीं है, वह वाक्य का ऊपरी अर्थ है। पर प्रश्न ‘सर्वाधिक उपयुक्त’ निष्कर्ष माँगता है, और कहानी की बनावट देखिए: वृद्धा ने नौकरों से मदद नहीं माँगी, ज़मींदार से माँगी; और टोकरी उठते ही उसने अन्याय की बात कह दी। यानी निवेदन साधन था, उद्देश्य बोध कराना था। चर्चा में दोनों पक्ष रखिए — यही इस अभ्यास का असली उद्देश्य है।
प्र2.
(ख) अपने मित्रों के उत्तर से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्षों का चुनाव किया है और क्यों?
उत्तर

मिलान के बाद चर्चा में यह तरीका अपनाइए —

  1. पहले सबूत, फिर राय। हर निष्कर्ष के साथ वाक्य का वह शब्द बताइए जिसने आपको वहाँ पहुँचाया — जैसे 6 नंबर में ‘जन्म-भर’, 2 नंबर में ‘थैली गरम कर’।
  2. दूसरे निष्कर्ष को खारिज करने का कारण भी दीजिए। ज़्यादातर जोड़ों में एक निष्कर्ष वाक्य को उलट देता है (1, 4, 5) — यह पहचानना सबसे आसान परीक्षण है।
  3. जहाँ असहमति बचे, वहाँ उसे लिख लीजिए। 3 और 7 नंबर पर कक्षा अक्सर बँट जाती है, और यही सबसे उपयोगी बहस है।
नमूना उत्तर: “हमारे समूह में 7 नंबर पर मतभेद हुआ। रज़िया ने ‘विनम्र निवेदन’ चुना, क्योंकि वृद्धा हाथ जोड़ रही थी। मैंने ‘चतुराई से शर्मिंदा करने की योजना’ चुना, क्योंकि उसने ज़मींदार से ही टोकरी उठवाई, जबकि वहाँ नौकर मौजूद थे। अंत में हम इस पर सहमत हुए कि विनती ऊपर थी और योजना भीतर।”
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