मल्हार अध्याय 6 खोजबीन के लिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
हमारे देश में हजारों सालों से कहानियाँ सुनी-सुनाई जाती रही हैं। सैकड़ों साल पहले लिखी गई कहानियों की पुस्तकें आज भी उपलब्ध हैं। ऐसी ही एक अद्भुत पुस्तक हितोपदेश है जो आज भी विश्व में मनोरंजन और ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य से पढ़ी-पढ़ाई जाती है। अपने पुस्तकालय से हितोपदेश की कहानियों की पुस्तक खोजकर पढ़िए और इसकी कोई एक कहानी कक्षा में सुनाइए।
उत्तर

हितोपदेश के बारे में इतना जान लीजिए —

  • यह संस्कृत में लिखी गई कहानियों की पुस्तक है। इसके रचयिता नारायण पंडित माने जाते हैं।
  • ‘हितोपदेश’ का अर्थ ही है — हित की सीख। इसकी कहानियाँ मनोरंजन के साथ व्यवहार की समझ देती हैं।
  • इसकी बहुत-सी सामग्री पंचतंत्र से ली गई है। पुस्तक चार भागों में है — मित्रलाभ, सुहृद्भेद, विग्रह और संधि
  • इसमें अधिकतर पात्र पशु-पक्षी हैं, और हर कहानी के भीतर से दूसरी कहानी निकलती चली जाती है।
  • यह अनेक भाषाओं में अनूदित हुई है और भारत के बाहर भी पढ़ी जाती है।

कक्षा में कहानी सुनाते समय —

  1. छोटी कहानी चुनिए, जो तीन-चार मिनट में पूरी हो जाए।
  2. पहले उसे दो-तीन बार पढ़िए और घटनाओं का क्रम याद कर लीजिए — शब्द रटिए मत।
  3. पात्रों की आवाज़ बदलकर बोलिए; इसी से कहानी जीवित होती है।
  4. सीख अंत में एक ही वाक्य में कहिए, या श्रोताओं से पूछ लीजिए कि उन्हें क्या समझ आया।
नमूना (एक प्रसिद्ध कथा का सार) — ‘एकता में बल’: जंगल में कबूतरों का एक झुंड दाना चुगने उतरा और बहेलिये के जाल में फँस गया। सब अलग-अलग छटपटाने लगे, पर जाल नहीं टूटा। तब उनके मुखिया चित्रग्रीव ने कहा — “अलग-अलग उड़ने से कुछ नहीं होगा। सब एक साथ, एक ही दिशा में ज़ोर लगाओ।” सारे कबूतर एक साथ उड़े और जाल समेत आकाश में जा पहुँचे। बाद में उनके मित्र चूहे हिरण्यक ने जाल कुतरकर सबको मुक्त कर दिया।
सीख — अकेले जो असंभव है, वह मिलकर संभव हो जाता है।
इस पाठ से जोड़िए: ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ भी उसी परंपरा की कहानी है — छोटी, सीधी, और अंत में एक सीख छोड़ जाने वाली। अंतर यह है कि हितोपदेश की कहानियाँ सीख साफ़-साफ़ कह देती हैं, जबकि सप्रे जी सीख को टोकरी में रखकर पाठक के हाथ में थमा देते हैं और कहते हैं — आप ही इस बात पर विचार कीजिए।
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