मल्हार अध्याय 7 शिल्प

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!” हमारे देश में हजारों वर्षों से अनगिनत शिल्प प्रचलित हैं। उनमें से कुछ के बारे में आप पहले से जानते होंगे। इनके बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए। (क) अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए शिल्प-कार्यों को उनके सही अर्थों या व्याख्या से मिलाइए— शिल्प-कार्य — 1. काष्ठ शिल्प 2. मृत्तिका शिल्प 3. धातु शिल्प 4. काँच शिल्प 5. वस्त्र शिल्प 6. कागज शिल्प 7. पत्थर शिल्प 8. चमड़ा शिल्प 9. बाँस और बेंत शिल्प 10. मोती एवं आभूषण शिल्प 11. लाख शिल्प 12. शीशा शिल्प 13. चित्रकला शिल्प 14. नक्काशी शिल्प अर्थ या व्याख्या — 1. काँच से झूमर, सजावटी वस्तुएँ और रंगीन खिड़कियाँ आदि बनाना 2. कपड़ों पर कढ़ाई, बुनाई, छपाई, बंधेज आदि सजावटी कार्य 3. कागज से खिलौने, सजावट, लिफाफे और पेपर मेशी बनाना 4. लकड़ी से वस्तुएँ, खिलौने, मूर्तियाँ आदि बनाना 5. मिट्टी से बर्तन, दीये, मूर्तियाँ और सजावटी चीजें बनाना 6. ताँबा, पीतल, लोहे जैसी धातुओं से दीपक, मूर्तियाँ, थालियाँ आदि बनाना 7. पारंपरिक चित्रकलाओं, जैसे मधुबनी, गोंड, वरली आदि से कलाकृतियाँ बनाना 8. कपड़ों या सजावट की वस्तुओं में शीशे जोड़ना या जड़ाई करना 9. लाख से चूड़ियाँ, खिलौने, डिब्बे और अन्य सजावटी वस्तुएँ बनाना 10. लकड़ी, पत्थर या धातु पर बारीक खुदाई द्वारा डिजाइन बनाना 11. बाँस और बेंत से टोकरियाँ, कुर्सियाँ, चटाई, पंखे आदि बनाना 12. चमड़े से जूते, बेल्ट, बैग और अन्य उपयोगी वस्तुएँ बनाना 13. संगमरमर या अन्य पत्थरों से मूर्तियाँ बनाना, मंदिरों की सजावट करना आदि 14. रंग-बिरंगे मोतियों से हार, कंगन, झुमके आदि गहने बनाना
उत्तर
शिल्प-कार्यसही अर्थभारत में कहाँ प्रसिद्ध है
1. काष्ठ शिल्प4 — लकड़ी से वस्तुएँ, खिलौने, मूर्तियाँ बनानाचन्नपटना (कर्नाटक) के खिलौने, सहारनपुर की नक़्क़ाशीदार लकड़ी
2. मृत्तिका शिल्प5 — मिट्टी से बर्तन, दीये, मूर्तियाँ बनानाख़ुर्जा और नीली मिट्टी का जयपुरी काम, कुम्हारों की हर गाँव में परंपरा
3. धातु शिल्प6 — ताँबा, पीतल, लोहे से दीपक, मूर्तियाँ, थालियाँमुरादाबाद का पीतल, बस्तर की ढोकरा ढलाई, तंजावुर की मूर्तियाँ
4. काँच शिल्प1 — काँच से झूमर, सजावटी वस्तुएँ, रंगीन खिड़कियाँफ़िरोज़ाबाद (उत्तर प्रदेश) की चूड़ियाँ और काँच का काम
5. वस्त्र शिल्प2 — कपड़ों पर कढ़ाई, बुनाई, छपाई, बंधेजबनारसी बुनाई, लखनऊ की चिकनकारी, कच्छ का बंधेज, बाग़रू की छपाई
6. कागज शिल्प3 — कागज से खिलौने, सजावट, लिफ़ाफ़े, पेपर मेशीकश्मीर की पेपर मेशी, सांगानेर का हस्तनिर्मित काग़ज़
7. पत्थर शिल्प13 — संगमरमर या पत्थरों से मूर्तियाँ, मंदिरों की सजावटमकराना का संगमरमर, महाबलिपुरम की पत्थर-मूर्तियाँ
8. चमड़ा शिल्प12 — चमड़े से जूते, बेल्ट, बैगकोल्हापुरी चप्पल, आंध्र की चमड़े की कठपुतलियाँ
9. बाँस और बेंत शिल्प11 — बाँस-बेंत से टोकरियाँ, कुर्सियाँ, चटाई, पंखेअसम, त्रिपुरा और पूर्वोत्तर के राज्य
10. मोती एवं आभूषण शिल्प14 — मोतियों से हार, कंगन, झुमके बनानाहैदराबाद के मोती, राजस्थान का मीनाकारी-जड़ाऊ काम
11. लाख शिल्प9 — लाख से चूड़ियाँ, खिलौने, डिब्बेजयपुर की लाख की चूड़ियाँ, चन्नपटना के लाख-रँगे खिलौने
12. शीशा शिल्प8 — कपड़ों या सजावट की वस्तुओं में शीशे जड़नाकच्छ और राजस्थान का शीशा-कढ़ाई (आभला) का काम
13. चित्रकला शिल्प7 — मधुबनी, गोंड, वरली जैसी पारंपरिक चित्रकलाएँमिथिला (बिहार), मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र
14. नक्काशी शिल्प10 — लकड़ी, पत्थर या धातु पर बारीक खुदाई से डिज़ाइनसहारनपुर, श्रीनगर के अख़रोट-काष्ठ का काम

संक्षेप में — 1→4, 2→5, 3→6, 4→1, 5→2, 6→3, 7→13, 8→12, 9→11, 10→14, 11→9, 12→8, 13→7, 14→10

मिलान की कुंजी: हर शिल्प का नाम उसके कच्चे माल से बना है — काष्ठ = लकड़ी, मृत्तिका = मिट्टी, धातु, काँच, वस्त्र, चमड़ा, लाख। इसलिए व्याख्या में जिस सामग्री का नाम आया है, वही उत्तर है। केवल दो जगह ध्यान चाहिए — काँच शिल्प (काँच की वस्तुएँ बनाना) और शीशा शिल्प (बनी हुई चीज़ों में शीशे जड़ना) एक जैसे लगते हैं, पर एक में काँच सामग्री है और दूसरे में सजावट। इसी तरह नक्काशी किसी एक सामग्री का नाम नहीं, बल्कि खुदाई की तकनीक है, इसलिए उसकी व्याख्या में लकड़ी, पत्थर और धातु — तीनों आते हैं।
प्र2.
(ख) अपने विद्यालय या परिवार के साथ हस्तशिल्प से जुड़े किसी स्थान या कार्यशाला का भ्रमण कीजिए और उस हस्तशिल्प के बारे में एक रिपोर्ट बनाइए। अथवा राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय की नीचे दी गई वेबसाइट में आपको कौन-सा हस्तशिल्प या कलाकृति सबसे अच्छी लगी और क्यों, उसके विषय में लिखिए।
उत्तर

यह भ्रमण और लेखन का काम है। रिपोर्ट में ये शीर्षक रखिए —

  1. कहाँ और कब गए — स्थान, तिथि, किसके साथ।
  2. शिल्प का नाम और कच्चा माल — क्या बनता है, किस चीज़ से।
  3. बनने की विधि — क्रम से, चरण दर चरण; कौन-से औज़ार लगते हैं।
  4. कारीगर से बातचीत — यह काम कब से चल रहा है, किससे सीखा, एक वस्तु में कितना समय लगता है, कहाँ बिकती है।
  5. कठिनाइयाँ — कच्चे माल का दाम, मशीन से बनी सस्ती वस्तुओं से मुक़ाबला, नई पीढ़ी का इस काम में न आना।
  6. आपको क्या अच्छा लगा और आपने क्या सीखा — साथ में एक चित्र या रेखाचित्र।
नमूना रिपोर्ट (अंश): “हम शनिवार को अपने शिक्षक के साथ पास के कुम्हार-टोले गए। वहाँ रामप्यारी देवी चाक पर दीये बना रही थीं। उन्होंने बताया कि पहले चिकनी मिट्टी को दो दिन पानी में भिगोया जाता है, फिर पैरों से गूँधा जाता है, तब चाक पर आकार दिया जाता है। सूखने के बाद दीये आँवाँ (भट्ठी) में पकाए जाते हैं। एक दीये में उन्हें कुल मिलाकर तीन दिन लगते हैं और वह दो रुपये में बिकता है। सबसे कठिन काम मिट्टी लाना है, क्योंकि तालाब की मिट्टी अब आसानी से नहीं मिलती। मुझे सबसे अच्छी बात यह लगी कि चाक पर मिट्टी का लोंदा दो मिनट में बरतन बन जाता है और यदि आकार बिगड़ जाए तो उसे फिर से गूँधकर नया बनाया जा सकता है।”
वेबसाइट वाला विकल्प चुनें तो: केवल ‘सुंदर लगी’ मत लिखिए। कलाकृति का नाम, वह किस राज्य की है, किस सामग्री से बनी है, और उसकी कौन-सी एक बात आपको विशेष लगी — यह चार बातें अवश्य लिखिए।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ