प्र1.
“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!” हमारे देश में हजारों वर्षों से अनगिनत शिल्प प्रचलित हैं। उनमें से कुछ के बारे में आप पहले से जानते होंगे। इनके बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए शिल्प-कार्यों को उनके सही अर्थों या व्याख्या से मिलाइए—
शिल्प-कार्य — 1. काष्ठ शिल्प 2. मृत्तिका शिल्प 3. धातु शिल्प 4. काँच शिल्प 5. वस्त्र शिल्प 6. कागज शिल्प 7. पत्थर शिल्प 8. चमड़ा शिल्प 9. बाँस और बेंत शिल्प 10. मोती एवं आभूषण शिल्प 11. लाख शिल्प 12. शीशा शिल्प 13. चित्रकला शिल्प 14. नक्काशी शिल्प
अर्थ या व्याख्या — 1. काँच से झूमर, सजावटी वस्तुएँ और रंगीन खिड़कियाँ आदि बनाना 2. कपड़ों पर कढ़ाई, बुनाई, छपाई, बंधेज आदि सजावटी कार्य 3. कागज से खिलौने, सजावट, लिफाफे और पेपर मेशी बनाना 4. लकड़ी से वस्तुएँ, खिलौने, मूर्तियाँ आदि बनाना 5. मिट्टी से बर्तन, दीये, मूर्तियाँ और सजावटी चीजें बनाना 6. ताँबा, पीतल, लोहे जैसी धातुओं से दीपक, मूर्तियाँ, थालियाँ आदि बनाना 7. पारंपरिक चित्रकलाओं, जैसे मधुबनी, गोंड, वरली आदि से कलाकृतियाँ बनाना 8. कपड़ों या सजावट की वस्तुओं में शीशे जोड़ना या जड़ाई करना 9. लाख से चूड़ियाँ, खिलौने, डिब्बे और अन्य सजावटी वस्तुएँ बनाना 10. लकड़ी, पत्थर या धातु पर बारीक खुदाई द्वारा डिजाइन बनाना 11. बाँस और बेंत से टोकरियाँ, कुर्सियाँ, चटाई, पंखे आदि बनाना 12. चमड़े से जूते, बेल्ट, बैग और अन्य उपयोगी वस्तुएँ बनाना 13. संगमरमर या अन्य पत्थरों से मूर्तियाँ बनाना, मंदिरों की सजावट करना आदि 14. रंग-बिरंगे मोतियों से हार, कंगन, झुमके आदि गहने बनाना
उत्तर
| शिल्प-कार्य | सही अर्थ | भारत में कहाँ प्रसिद्ध है |
|---|---|---|
| 1. काष्ठ शिल्प | 4 — लकड़ी से वस्तुएँ, खिलौने, मूर्तियाँ बनाना | चन्नपटना (कर्नाटक) के खिलौने, सहारनपुर की नक़्क़ाशीदार लकड़ी |
| 2. मृत्तिका शिल्प | 5 — मिट्टी से बर्तन, दीये, मूर्तियाँ बनाना | ख़ुर्जा और नीली मिट्टी का जयपुरी काम, कुम्हारों की हर गाँव में परंपरा |
| 3. धातु शिल्प | 6 — ताँबा, पीतल, लोहे से दीपक, मूर्तियाँ, थालियाँ | मुरादाबाद का पीतल, बस्तर की ढोकरा ढलाई, तंजावुर की मूर्तियाँ |
| 4. काँच शिल्प | 1 — काँच से झूमर, सजावटी वस्तुएँ, रंगीन खिड़कियाँ | फ़िरोज़ाबाद (उत्तर प्रदेश) की चूड़ियाँ और काँच का काम |
| 5. वस्त्र शिल्प | 2 — कपड़ों पर कढ़ाई, बुनाई, छपाई, बंधेज | बनारसी बुनाई, लखनऊ की चिकनकारी, कच्छ का बंधेज, बाग़रू की छपाई |
| 6. कागज शिल्प | 3 — कागज से खिलौने, सजावट, लिफ़ाफ़े, पेपर मेशी | कश्मीर की पेपर मेशी, सांगानेर का हस्तनिर्मित काग़ज़ |
| 7. पत्थर शिल्प | 13 — संगमरमर या पत्थरों से मूर्तियाँ, मंदिरों की सजावट | मकराना का संगमरमर, महाबलिपुरम की पत्थर-मूर्तियाँ |
| 8. चमड़ा शिल्प | 12 — चमड़े से जूते, बेल्ट, बैग | कोल्हापुरी चप्पल, आंध्र की चमड़े की कठपुतलियाँ |
| 9. बाँस और बेंत शिल्प | 11 — बाँस-बेंत से टोकरियाँ, कुर्सियाँ, चटाई, पंखे | असम, त्रिपुरा और पूर्वोत्तर के राज्य |
| 10. मोती एवं आभूषण शिल्प | 14 — मोतियों से हार, कंगन, झुमके बनाना | हैदराबाद के मोती, राजस्थान का मीनाकारी-जड़ाऊ काम |
| 11. लाख शिल्प | 9 — लाख से चूड़ियाँ, खिलौने, डिब्बे | जयपुर की लाख की चूड़ियाँ, चन्नपटना के लाख-रँगे खिलौने |
| 12. शीशा शिल्प | 8 — कपड़ों या सजावट की वस्तुओं में शीशे जड़ना | कच्छ और राजस्थान का शीशा-कढ़ाई (आभला) का काम |
| 13. चित्रकला शिल्प | 7 — मधुबनी, गोंड, वरली जैसी पारंपरिक चित्रकलाएँ | मिथिला (बिहार), मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र |
| 14. नक्काशी शिल्प | 10 — लकड़ी, पत्थर या धातु पर बारीक खुदाई से डिज़ाइन | सहारनपुर, श्रीनगर के अख़रोट-काष्ठ का काम |
संक्षेप में — 1→4, 2→5, 3→6, 4→1, 5→2, 6→3, 7→13, 8→12, 9→11, 10→14, 11→9, 12→8, 13→7, 14→10
मिलान की कुंजी: हर शिल्प का नाम उसके कच्चे माल से बना है — काष्ठ = लकड़ी, मृत्तिका = मिट्टी, धातु, काँच, वस्त्र, चमड़ा, लाख। इसलिए व्याख्या में जिस सामग्री का नाम आया है, वही उत्तर है। केवल दो जगह ध्यान चाहिए — काँच शिल्प (काँच की वस्तुएँ बनाना) और शीशा शिल्प (बनी हुई चीज़ों में शीशे जड़ना) एक जैसे लगते हैं, पर एक में काँच सामग्री है और दूसरे में सजावट। इसी तरह नक्काशी किसी एक सामग्री का नाम नहीं, बल्कि खुदाई की तकनीक है, इसलिए उसकी व्याख्या में लकड़ी, पत्थर और धातु — तीनों आते हैं।