प्र1.
“अग्नि सदा धरती पर जलती / धूम गगन में मँडराता है!” आग, बाढ़, भूकंप जैसी आपदाएँ अचानक आ जाती हैं। सही जानकारी से आपदाओं की स्थिति में बचाव संभव हो जाता है।
(क) कक्षा में अपने शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए कि क्या-क्या करेंगे यदि—
• कहीं अचानक आग लग जाए • आपके क्षेत्र में बाढ़ आ जाए • भूकंप आ जाए
उत्तर
| आपदा | तुरंत क्या करें | क्या कभी न करें |
|---|---|---|
| आग | शोर मचाकर सबको सचेत करें; बाहर निकलने का रास्ता पकड़ें और नीचे झुककर चलें, क्योंकि धुआँ ऊपर रहता है; नाक-मुँह गीले कपड़े से ढकें; कपड़ों में आग लगे तो रुकें–गिरें–लुढ़कें; बाहर निकलकर 101 (या 112) पर सूचना दें | लिफ़्ट का प्रयोग न करें; सामान लेने वापस न लौटें; बिजली से लगी आग पर पानी न डालें |
| बाढ़ | ऊँची और पक्की जगह पर जाएँ; पीने का पानी उबालकर या क्लोरीन डालकर ही पिएँ; ज़रूरी काग़ज़, दवाइयाँ और टॉर्च एक थैले में पहले से रखें; रेडियो/सरकारी सूचना सुनते रहें; मवेशियों को खोलकर ऊँचे स्थान पर बाँधें | बहते पानी में पैदल या वाहन से न उतरें — घुटने भर पानी भी बहा ले जाता है; बिजली के खंभों और गिरे तारों से दूर रहें; बाढ़ का पानी न पिएँ |
| भूकंप | झुको–ढको–पकड़ो — मज़बूत मेज़ के नीचे जाएँ, सिर-गरदन ढकें, मेज़ का पाया पकड़ें; झटका रुकने पर सीढ़ियों से खुले मैदान में जाएँ; बाहर हों तो भवन, पेड़ और खंभों से दूर खुली जगह पर रहें; गैस और बिजली बंद कर दें | झटके के दौरान भागकर बाहर न निकलें; लिफ़्ट का प्रयोग न करें; खिड़की, अलमारी और शीशे के पास न खड़े हों |
याद रखने योग्य नंबर: आपातकालीन सहायता — 112; अग्निशमन — 101; एंबुलेंस — 102/108; पुलिस — 100; राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन — 1078। ये नंबर विद्यालय के सूचना-पट पर बड़े अक्षरों में लिखवाइए।
तीनों में एक ही सिद्धांत: आपदा में सबसे बड़ा ख़तरा घबराहट है। इसीलिए हर स्थिति के लिए एक छोटा, रटा हुआ नियम बनाया गया है — आग में ‘नीचे झुककर बाहर’, भूकंप में ‘झुको–ढको–पकड़ो’, बाढ़ में ‘ऊँचाई की ओर’। रटा हुआ नियम घबराहट के समय भी याद रहता है।