मल्हार अध्याय 7 आपदा प्रबंधन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“अग्नि सदा धरती पर जलती / धूम गगन में मँडराता है!” आग, बाढ़, भूकंप जैसी आपदाएँ अचानक आ जाती हैं। सही जानकारी से आपदाओं की स्थिति में बचाव संभव हो जाता है। (क) कक्षा में अपने शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए कि क्या-क्या करेंगे यदि— • कहीं अचानक आग लग जाए • आपके क्षेत्र में बाढ़ आ जाए • भूकंप आ जाए
उत्तर
आपदातुरंत क्या करेंक्या कभी न करें
आगशोर मचाकर सबको सचेत करें; बाहर निकलने का रास्ता पकड़ें और नीचे झुककर चलें, क्योंकि धुआँ ऊपर रहता है; नाक-मुँह गीले कपड़े से ढकें; कपड़ों में आग लगे तो रुकें–गिरें–लुढ़कें; बाहर निकलकर 101 (या 112) पर सूचना देंलिफ़्ट का प्रयोग न करें; सामान लेने वापस न लौटें; बिजली से लगी आग पर पानी न डालें
बाढ़ऊँची और पक्की जगह पर जाएँ; पीने का पानी उबालकर या क्लोरीन डालकर ही पिएँ; ज़रूरी काग़ज़, दवाइयाँ और टॉर्च एक थैले में पहले से रखें; रेडियो/सरकारी सूचना सुनते रहें; मवेशियों को खोलकर ऊँचे स्थान पर बाँधेंबहते पानी में पैदल या वाहन से न उतरें — घुटने भर पानी भी बहा ले जाता है; बिजली के खंभों और गिरे तारों से दूर रहें; बाढ़ का पानी न पिएँ
भूकंपझुको–ढको–पकड़ो — मज़बूत मेज़ के नीचे जाएँ, सिर-गरदन ढकें, मेज़ का पाया पकड़ें; झटका रुकने पर सीढ़ियों से खुले मैदान में जाएँ; बाहर हों तो भवन, पेड़ और खंभों से दूर खुली जगह पर रहें; गैस और बिजली बंद कर देंझटके के दौरान भागकर बाहर न निकलें; लिफ़्ट का प्रयोग न करें; खिड़की, अलमारी और शीशे के पास न खड़े हों
याद रखने योग्य नंबर: आपातकालीन सहायता — 112; अग्निशमन — 101; एंबुलेंस — 102/108; पुलिस — 100; राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन — 1078। ये नंबर विद्यालय के सूचना-पट पर बड़े अक्षरों में लिखवाइए।
तीनों में एक ही सिद्धांत: आपदा में सबसे बड़ा ख़तरा घबराहट है। इसीलिए हर स्थिति के लिए एक छोटा, रटा हुआ नियम बनाया गया है — आग में ‘नीचे झुककर बाहर’, भूकंप में ‘झुको–ढको–पकड़ो’, बाढ़ में ‘ऊँचाई की ओर’। रटा हुआ नियम घबराहट के समय भी याद रहता है।
प्र2.
(ख) “मैं आपदा के समय क्या करूँगा या करूँगी?” — एक सूची या चित्र आधारित योजना बनाइए।
उत्तर

योजना तीन हिस्सों में बाँटिए — पहले (तैयारी), दौरान (तुरंत का काम), बाद में (सँभालना)। यही ढाँचा किसी भी आपदा पर लागू होता है।

कबमैं क्या करूँगा/करूँगी
पहले (तैयारी)घर में एक आपात थैला तैयार रखूँगा/रखूँगी — टॉर्च, सीटी, पीने का पानी, बिस्कुट, ज़रूरी दवाइयाँ, प्राथमिक उपचार पेटी, ज़रूरी काग़ज़ों की नक़ल, कुछ नक़द। घर के सब लोगों के फ़ोन नंबर कागज़ पर लिखकर रखूँगा/रखूँगी। परिवार के साथ तय करूँगा/करूँगी कि बिछड़ जाने पर कहाँ मिलेंगे। घर के निकलने के दोनों रास्ते याद रखूँगा/रखूँगी और भारी अलमारी दीवार से कसवाऊँगा/कसवाऊँगी।
दौरानघबराऊँगा/घबराऊँगी नहीं; उस आपदा का नियम अपनाऊँगा/अपनाऊँगी (झुको–ढको–पकड़ो / नीचे झुककर बाहर / ऊँचाई की ओर)। छोटे भाई-बहन और बुज़ुर्गों को साथ लूँगा/लूँगी। सीटी बजाकर अपनी जगह बताऊँगा/बताऊँगी। अफ़वाह न फैलाऊँगा/फैलाऊँगी, केवल सरकारी सूचना सुनूँगा/सुनूँगी।
बाद मेंघायल को प्राथमिक उपचार दूँगा/दूँगी और तुरंत सहायता बुलाऊँगा/बुलाऊँगी। क्षतिग्रस्त भवन में वापस नहीं जाऊँगा/जाऊँगी। पानी उबालकर पिऊँगा/पिऊँगी और सफ़ाई का ध्यान रखूँगा/रखूँगी, ताकि बीमारी न फैले। जो अनुभव हुआ, उसे कक्षा में साझा करूँगा/करूँगी ताकि सबकी योजना बेहतर बने।
चित्र-आधारित योजना का सुझाव: एक चार्ट पर घर का नक्शा बनाइए। हरे तीर से बाहर निकलने के रास्ते दिखाइए, लाल गोले से ख़तरे की जगहें (गैस सिलेंडर, भारी अलमारी, बिजली का मीटर) और नीले तारे से वह स्थान जहाँ परिवार मिलेगा। नीचे कोने में आपातकालीन नंबर बड़े अक्षरों में लिखिए।
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