मल्हार अध्याय 7 देखना-सुनना-समझना…

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “धूम गगन में मँडराता है।” सुगंध का अनुभव सूँघकर किया जाता है। धुएँ को देखा जा सकता है। वायु का अनुभव स्पर्श द्वारा किया जा सकता है और अनुभवों को बोलकर भी कहा या बताया जा सकता है जैसे कि कोई कमेंट्री कर रहा हो। जो व्यक्ति देख पाने में सक्षम नहीं है, आप उन्हें निम्नलिखित स्थितियों का अनुभव कैसे करवा सकते हैं— • वर्षा की बूँदों का • धुएँ के उड़ने का • खेल के रोमांच का
उत्तर

मूल विचार यह है — जो सूचना आँख से जाती थी, उसे बाक़ी इंद्रियों और शब्दों के रास्ते भेजिए। और ध्यान रहे: सहायता करते समय पहले पूछिए, अचानक हाथ पकड़कर मत खींचिए।

स्थितिस्पर्श सेध्वनि / गंध सेशब्दों से (कमेंट्री)
वर्षा की बूँदेंहथेली बाहर निकालकर बूँदें गिरने देना; भीगी मिट्टी और गीले पत्ते छुआना; ठंडी हवा महसूस करानाछत की चादर पर बूँदों की टपटप, नाली में बहते पानी की आवाज़, गीली मिट्टी की सोंधी गंध“पहले दो-चार मोटी बूँदें गिरीं, फिर एक साथ झड़ी लग गई; अब आँगन में पानी की पतली धार बह रही है।”
धुएँ का उड़नाचूल्हे या दीये के पास हवा की हल्की गरमी; धुएँ के ऊपर हाथ रखकर गरम हवा का ऊपर उठना महसूस करनालकड़ी के जलने की चटख; धुएँ की गंध, जो हवा चलने पर आती-जाती है“धुएँ की एक पतली लकीर सीधी ऊपर जा रही है, फिर हवा लगते ही वह टेढ़ी होकर बिखर जाती है और कुछ ही देर में दिखना बंद हो जाती है।”
खेल का रोमांचगेंद, बल्ला, स्टंप या कबड्डी की पाले की रेखा हाथ से छुआना; ताली और मेज़ थपथपाकर लय बनानादर्शकों का शोर, सीटी, गेंद के बल्ले से टकराने की आवाज़, अंतिम क्षणों की चुप्पी“गेंदबाज़ दौड़ रहा है… गेंद ऑफ़ की ओर… बल्लेबाज़ आगे बढ़ा… हवा में गेंद… और वह सीमा रेखा के पार! पूरा मैदान खड़ा हो गया है।”
अच्छी कमेंट्री का नियम: केवल घटना मत बताइए, क्रम, गति और दिशा बताइए — क्या पहले हुआ, कितनी तेज़ी से, किस ओर। यही तीन बातें आँख करती है, और यही शब्दों से लौटाई जा सकती हैं।
Did you know? दृष्टिबाधित दर्शकों के लिए फ़िल्मों और खेलों में ऑडियो डिस्क्रिप्शन की सुविधा दी जाती है, जिसमें संवादों के बीच के ख़ाली समय में दृश्य का वर्णन बोला जाता है। पढ़ने के लिए ब्रेल लिपि है, जिसमें उभरे बिंदुओं को उँगलियों से पढ़ा जाता है।
प्र2.
(ख) मूक अभिनय द्वारा कविता का भाव — विद्यार्थियों के बराबर-बराबर की संख्या में दो दल (टीम) बनाइए। दलों के नाम रखें— कल्पना और आकांक्षा। ‘कल्पना’ दल से एक प्रतिभागी आगे आए और मूक अभिनय (हाव-भाव या संकेत) के माध्यम से इस कविता की किसी भी पंक्ति का भाव प्रस्तुत करें। ‘आकांक्षा’ दल के प्रतिभागियों को पहचानकर बताना होगा कि अभिनय में किस पंक्ति की बात की जा रही है। पहचानने की समय सीमा भी निर्धारित की जाए। निर्धारित समय सीमा पर सही उत्तर बताने वाले दल को अंक भी दिए जा सकते हैं। इस तरह से खेल को आगे बढ़ाया जाए।
उत्तर

खेल की तैयारी — कविता की सभी पंक्तियाँ अलग-अलग परचियों पर लिखकर एक कटोरे में रख लीजिए। प्रतिभागी परची उठाए, तीस सेकंड सोचे, फिर एक मिनट का मूक अभिनय करे। दूसरा दल एक मिनट में पहचान ले तो 2 अंक, संकेत लेने पर 1 अंक।

पंक्तिअभिनय में क्या दिखाएँ
इन सपनों के पंख न काटोदोनों हाथ पंखों की तरह फैलाना; फिर कैंची का संकेत बनाकर उसे रोकते हुए ‘नहीं’ में सिर हिलाना
सौरभ उड़ जाता है नभ मेंफूल सूँघने का अभिनय; फिर उँगलियों को ऊपर उठाते हुए हवा में घुलने का संकेत
बीज धूलि में गिर जाता जोमुट्ठी से बीज गिराना; ज़मीन की ओर देखना; फिर ऊपर देखकर ‘नहीं’ में सिर हिलाना
अग्नि सदा धरती पर जलती / धूम गगन में मँडराता है!नीचे झुककर आग सेंकने का अभिनय; फिर उँगलियों को लहराते हुए धीरे-धीरे ऊपर ले जाना
इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो!हाथ को सीढ़ी की तरह ऊपर चढ़ाना, फिर नीचे उतारना; दोनों बार हथेली दिखाकर रोकने से मना करना
मुक्त गगन में विचरण कर यह / तारों में फिर मिल जायेगाचारों ओर घूमने का अभिनय; ऊपर देखकर उँगली से टिमटिमाते तारे बनाना
स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!मिट्टी गूँधने और आकार गढ़ने का अभिनय; फिर किसी को सिखाने के हाव-भाव
यह गतिविधि क्यों उपयोगी है: मूक अभिनय में शब्द छिन जाते हैं, इसलिए बचता है केवल भाव। पंक्ति का अभिनय करने से पहले उसका अर्थ पूरी तरह समझना पड़ता है — यही इस खेल की असली पढ़ाई है।
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