प्र1.
(क) “धूम गगन में मँडराता है।” सुगंध का अनुभव सूँघकर किया जाता है। धुएँ को देखा जा सकता है। वायु का अनुभव स्पर्श द्वारा किया जा सकता है और अनुभवों को बोलकर भी कहा या बताया जा सकता है जैसे कि कोई कमेंट्री कर रहा हो।
जो व्यक्ति देख पाने में सक्षम नहीं है, आप उन्हें निम्नलिखित स्थितियों का अनुभव कैसे करवा सकते हैं—
• वर्षा की बूँदों का • धुएँ के उड़ने का • खेल के रोमांच का
उत्तर
मूल विचार यह है — जो सूचना आँख से जाती थी, उसे बाक़ी इंद्रियों और शब्दों के रास्ते भेजिए। और ध्यान रहे: सहायता करते समय पहले पूछिए, अचानक हाथ पकड़कर मत खींचिए।
| स्थिति | स्पर्श से | ध्वनि / गंध से | शब्दों से (कमेंट्री) |
|---|---|---|---|
| वर्षा की बूँदें | हथेली बाहर निकालकर बूँदें गिरने देना; भीगी मिट्टी और गीले पत्ते छुआना; ठंडी हवा महसूस कराना | छत की चादर पर बूँदों की टपटप, नाली में बहते पानी की आवाज़, गीली मिट्टी की सोंधी गंध | “पहले दो-चार मोटी बूँदें गिरीं, फिर एक साथ झड़ी लग गई; अब आँगन में पानी की पतली धार बह रही है।” |
| धुएँ का उड़ना | चूल्हे या दीये के पास हवा की हल्की गरमी; धुएँ के ऊपर हाथ रखकर गरम हवा का ऊपर उठना महसूस करना | लकड़ी के जलने की चटख; धुएँ की गंध, जो हवा चलने पर आती-जाती है | “धुएँ की एक पतली लकीर सीधी ऊपर जा रही है, फिर हवा लगते ही वह टेढ़ी होकर बिखर जाती है और कुछ ही देर में दिखना बंद हो जाती है।” |
| खेल का रोमांच | गेंद, बल्ला, स्टंप या कबड्डी की पाले की रेखा हाथ से छुआना; ताली और मेज़ थपथपाकर लय बनाना | दर्शकों का शोर, सीटी, गेंद के बल्ले से टकराने की आवाज़, अंतिम क्षणों की चुप्पी | “गेंदबाज़ दौड़ रहा है… गेंद ऑफ़ की ओर… बल्लेबाज़ आगे बढ़ा… हवा में गेंद… और वह सीमा रेखा के पार! पूरा मैदान खड़ा हो गया है।” |
अच्छी कमेंट्री का नियम: केवल घटना मत बताइए, क्रम, गति और दिशा बताइए — क्या पहले हुआ, कितनी तेज़ी से, किस ओर। यही तीन बातें आँख करती है, और यही शब्दों से लौटाई जा सकती हैं।
Did you know? दृष्टिबाधित दर्शकों के लिए फ़िल्मों और खेलों में ऑडियो डिस्क्रिप्शन की सुविधा दी जाती है, जिसमें संवादों के बीच के ख़ाली समय में दृश्य का वर्णन बोला जाता है। पढ़ने के लिए ब्रेल लिपि है, जिसमें उभरे बिंदुओं को उँगलियों से पढ़ा जाता है।