अंश में क्या है — महादेवी वर्मा बताती हैं कि उनके पास बहुत से पशु-पक्षी थे, पर किसी ने उनकी थाली में साथ खाने की हिम्मत नहीं की। गिल्लू (एक गिलहरी) इसका अपवाद था। वे खाने के कमरे में पहुँचतीं और वह खिड़की से निकलकर आँगन की दीवार और बरामदा पार करके मेज़ तक आ जाता। बड़ी कठिनाई से उन्होंने उसे थाली के पास बैठना सिखाया, जहाँ से वह एक-एक चावल उठाकर सफ़ाई से खाता। काजू उसका प्रिय भोजन था; कई दिन काजू न मिलने पर वह दूसरी चीज़ें लेना बंद कर देता या झूले से नीचे फेंक देता।
कविता से क्या जुड़ता है — दोनों रचनाओं में लेखिका किसी को बाँधती नहीं। गिल्लू पिंजरे में नहीं, झूले में रहता है; वह अपनी मरज़ी से आता है और अपनी नाराज़गी भी जताता है। यही ‘मत बाँधो’ का भाव है — स्नेह वही है जो दूसरे की स्वतंत्रता छीने बिना दिया जाए।
चर्चा के लिए प्रश्न —
- गिल्लू का व्यवहार दूसरे पशु-पक्षियों से अलग क्यों था? लेखिका ने इसे ‘अपवाद’ क्यों कहा?
- काजू न मिलने पर गिल्लू का दूसरी चीज़ें फेंक देना — क्या यह केवल ज़िद है, या इसमें कुछ और भी है?
- गद्य और कविता में महादेवी वर्मा की भाषा में क्या अंतर दिखाई देता है? कविता में तत्सम शब्द अधिक हैं और गद्य में रोज़ की बोलचाल — ऐसा क्यों?
- आपके घर या आस-पास किसी पशु-पक्षी से ऐसा लगाव रहा है? उसका कोई एक ऐसा व्यवहार बताइए जिससे लगा कि वह आपको पहचानता है।