प्र1.
“सौरभ उड़ जाता है नभ में” उपर्युक्त पंक्ति को ध्यान से देखिए। इस पंक्ति की क्रिया ‘जाता है’ से पता चलता है कि यह वर्तमान काल में लिखी गई है। यदि हम इसी पंक्ति को भूतकाल और भविष्य काल में लिखें तो यह निम्नलिखित प्रकार से लिखी जाएगी—
भूतकाल— सौरभ उड़ गया है नभ में
भविष्य काल— सौरभ उड़ जाएगा नभ में
कविता में वर्तमान काल में लिखी गई ऐसी अनेक पंक्तियाँ आई हैं। उन पंक्तियों को कविता में से ढूँढ़कर भूतकाल और भविष्य काल में लिखिए।
उत्तर
| वर्तमान काल (कविता की पंक्ति) | भूतकाल | भविष्य काल |
|---|---|---|
| सौरभ उड़ जाता है नभ में | सौरभ उड़ गया है नभ में | सौरभ उड़ जाएगा नभ में |
| फिर वह लौट कहाँ आता है? | फिर वह लौट कहाँ आया है? | फिर वह लौट कहाँ आएगा? |
| बीज धूलि में गिर जाता जो | बीज धूलि में गिर गया जो | बीज धूलि में गिर जाएगा जो |
| वह नभ में कब उड़ पाता है? | वह नभ में कब उड़ पाया है? | वह नभ में कब उड़ पाएगा? |
| अग्नि सदा धरती पर जलती (है) | अग्नि सदा धरती पर जली है | अग्नि सदा धरती पर जलेगी |
| धूम गगन में मँडराता है! | धूम गगन में मँडराया है! | धूम गगन में मँडराएगा! |
| सपनों में दोनों ही गति हैं | सपनों में दोनों ही गति थीं | सपनों में दोनों ही गति होंगी |
| उड़ कर आँखों में आता है! | उड़कर आँखों में आया है! | उड़कर आँखों में आएगा! |
काल कहाँ से बदलता है: वाक्य में केवल क्रिया बदलती है, कर्ता और बाक़ी शब्द वैसे ही रहते हैं — जाता है / गया है / जाएगा। पुस्तक ने भूतकाल के लिए ‘उड़ गया है’ रूप लिया है, जो आसन्न भूत है (अभी-अभी हुआ काम)। इसी पद्धति से ऊपर की तालिका बनी है।
ध्यान रखिए: ‘अग्नि’ और ‘गति’ स्त्रीलिंग हैं, इसलिए उनकी क्रिया भी स्त्रीलिंग रूप लेगी — जली है, जलेगी; थीं, होंगी। ‘धूम’ और ‘सौरभ’ पुल्लिंग हैं, इसलिए मँडराया, उड़ा। लिंग के अनुसार क्रिया बदलना यहाँ सबसे आम ग़लती है।