मल्हार अध्याय 7 शब्दों की बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो!” उपर्युक्त पंक्तियों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं। आरोहण का अर्थ है— नीचे से ऊपर की ओर जाना या चढ़ना और अवरोहण का अर्थ है— ऊपर से नीचे की ओर आना या उतरना। (क) नीचे दिए रिक्त स्थान में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का उपयुक्त प्रयोग करके वाक्यों को पूरा कीजिए। • पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर ______ कर विजय प्राप्त की। • नदियाँ विशाल पर्वतों से ______ करते हुए सागर में मिल जाती हैं। • अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया ______ क्रम कहलाती है। इसी प्रकार से ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्दों के प्रयोग को देखते हुए आप भी कुछ सार्थक वाक्य बनाइए।
उत्तर
  • पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर आरोहण कर विजय प्राप्त की।
  • नदियाँ विशाल पर्वतों से अवरोहण करते हुए सागर में मिल जाती हैं।
  • अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया अवरोहण क्रम कहलाती है।
कैसे तय करें: हर वाक्य में देखिए कि गति की दिशा क्या है। पर्वतारोही नीचे से ऊपर जाते हैं — आरोहण। नदी पर्वत से समुद्र की ओर, यानी ऊपर से नीचे — अवरोहण। संख्याएँ बड़ी से छोटी की ओर घट रही हैं, इसलिए वहाँ भी अवरोहण (जिसे अंग्रेज़ी में descending order कहते हैं)। ‘बढ़ते क्रम’ को आरोहण क्रम कहेंगे।

अपने वाक्य —

  • राग भैरव में स्वरों का आरोहण धीमा है और अवरोहण तेज़।
  • विमान ने उड़ान भरते ही तेज़ी से आरोहण किया और तीस मिनट बाद अवरोहण आरंभ कर दिया।
  • बुख़ार का आरोहण रात में हुआ और सुबह दवा लेने पर अवरोहण शुरू हुआ।
  • परीक्षा-परिणाम को अंकों के अवरोहण क्रम में लगाया गया, इसलिए सबसे अधिक अंक वाला नाम सबसे ऊपर था।
प्र2.
(ख) नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए— “वह नभ में कब उड़ पाता है?” “धूम गगन में मँडराता है।” ‘नभ’ और ‘गगन’ समान अर्थ वाले शब्द हैं। रेखांकित शब्दों के समानार्थी शब्दों का प्रयोग करते हुए कुछ नई पंक्तियों की रचना कीजिए और देखिए कि पंक्तियों में लय बनाए रखने के लिए और किन परिवर्तनों की आवश्यकता पड़ती है?
उत्तर

‘नभ’ और ‘गगन’ के समानार्थी — आकाश, अंबर, व्योम, आसमान, अंतरिक्ष, शून्य।

नई पंक्तियाँ —

वह अंबर में कब उड़ पाता?
धुआँ आसमान में छाता है।

वह व्योम-लोक तक कब जाता?
धूम गगन पर मँडराता है।

लय के लिए क्या-क्या बदलना पड़ा —

  • शब्द की लंबाई बदल जाती है। ‘नभ’ में दो अक्षर हैं, ‘गगन’ में तीन, ‘अंबर’ और ‘आकाश’ में और अधिक भार है। शब्द बदलते ही पंक्ति भारी हो जाती है, इसलिए कहीं और से उतना ही भार घटाना पड़ता है — जैसे ‘कब उड़ पाता है?’ को ‘कब उड़ पाता?’ करना पड़ा।
  • क्रिया का रूप बदलना पड़ता है। ‘मँडराता है’ की जगह ‘छाता है’ रखने पर पंक्ति फिर से नपी हुई हो जाती है।
  • तुक बचानी पड़ती है। मूल कविता में ‘मँडराता है / आता है’ की तुक है। शब्द बदलने पर अगली पंक्ति का अंत भी उसी ध्वनि पर लाना पड़ता है, वरना जोड़ी टूट जाती है।
  • कभी शब्द-क्रम बदलना पड़ता है। ‘गगन में धूम मँडराता है’ और ‘धूम गगन में मँडराता है’ — अर्थ एक है, पर लय दूसरी।
निष्कर्ष: समानार्थी शब्द अर्थ में बराबर होते हैं, ध्वनि और मात्रा में नहीं। कविता में शब्द केवल अर्थ के लिए नहीं चुना जाता, उसके भार और ध्वनि के लिए भी चुना जाता है — इसीलिए महादेवी वर्मा ने एक ही अर्थ के लिए कहीं ‘नभ’ रखा और कहीं ‘गगन’।
प्र3.
(ग) कविता में ‘मत’ शब्द के साथ ‘बाँधो’, ‘काटो’ क्रिया लगाई गई है। आप ‘मत’ के साथ कौन-कौन सी क्रियाएँ लगाना चाहेंगे? लिखिए। (संकेत— ‘मत डरो’)
उत्तर
‘मत’ + क्रियावाक्य में
मत डरोमंच पर जाने से मत डरो, सब तुम्हारी ही तरह घबराते हैं।
मत रुकोएक बार असफल हो गए तो वहीं मत रुको।
मत हारोअंतिम गेंद तक मत हारो।
मत भूलोजिसने कठिन समय में साथ दिया, उसे मत भूलो।
मत झुकोअन्याय के आगे मत झुको।
मत तोड़ोबग़ीचे की टहनियाँ मत तोड़ो।
मत चिढ़ाओकिसी को उसके नाम या रंग पर मत चिढ़ाओ।
मत छोड़ोआधा सीखा हुआ काम बीच में मत छोड़ो।
मत फेंकोकूड़ा सड़क पर मत फेंको।
मत थकोलक्ष्य पास है, अभी मत थको।
ध्यान देने लायक़ बात: ‘मत’ हमेशा आज्ञार्थक क्रिया के साथ आता है और किसी काम को रोकने के लिए कहा जाता है। ‘नहीं’ इससे अलग है — वह सूचना देता है (‘वह नहीं आया’), जबकि ‘मत’ निर्देश देता है (‘मत जाओ’)। कविता की सारी शक्ति इसी अंतर से आती है: कवयित्री सूचना नहीं दे रहीं, वे रोक रही हैं।
प्र4.
(घ) आपकी भाषा में ‘बाँधने’ के लिए और कौन-कौन सी क्रियाएँ हैं? अपने समूह में चर्चा करके लिखिए और उनसे वाक्य बनाइए। (संकेत— जोड़ना)
उत्तर
क्रियाकिस तरह का बाँधनावाक्य
जोड़नादो चीज़ों को मिलानाटूटी डोर के दोनों सिरे जोड़ दिए गए।
कसनाढीले को तंग करनागठरी की रस्सी अच्छी तरह कस दो।
गाँठ लगानासिरों को अटकानारूमाल में गाँठ लगाकर उसने बात याद रख ली।
जकड़नाज़ोर से पकड़ रखनाठंड ने पूरे गाँव को जकड़ लिया।
लपेटनाचारों ओर घुमाकर बाँधनादादी ने पैर पर पट्टी लपेट दी।
गूँथनाबल देकर आपस में मिलानाउसने फूलों को गूँथकर माला बना ली।
नाथनापशु को रस्सी से बाँधनाबैलों को हल में नाथा गया।
टाँकना / सिलनाधागे से जोड़नाबटन टाँक दिया गया है।
बटोरना-बाँधना (गठरी बाँधना)समेटकर बाँधनायात्रा से पहले उसने गठरी बाँध ली।
सीमित करना / रोकनालाक्षणिक अर्थ में बाँधनानियमों ने उसकी कल्पना को सीमित कर दिया।
मुहावरे भी देखिए: गाँठ बाँधना (बात याद रखना), समाँ बाँधना (माहौल जमा देना), मन बाँधना (हिम्मत बटोरना), धरती से बाँधना (आगे न बढ़ने देना — इसी कविता में)। इन्हें देखकर समझ आता है कि ‘बाँधना’ केवल रस्सी का काम नहीं है; कविता में तो वह पूरी तरह लाक्षणिक है।
प्र5.
(ङ) ‘मत’ शब्द को उलट कर लिखने से शब्द बनता है ‘तम’ जिसका अर्थ है ‘अँधेरा’। कविता में से कुछ ऐसे और शब्द छाँटिए जिन्हें उलट कर लिखने से अर्थ देने वाले शब्द बनते हैं।
उत्तर
कविता का शब्दउलटने परअर्थ
मततमअँधेरा (यह उदाहरण पुस्तक ने दिया है)
जाताताजानया, बासी का उलटा
सदादाससेवक
काटोटोकारोकना-टोकना; ‘टोका’ = रोका
कबबकबगुला; ‘बक’ बकना क्रिया का रूप भी है
यहहयघोड़ा
यह खेल कैसे खेलें: पूरे शब्द को उलटकर पढ़िए — अक्षर-दर-अक्षर, वर्ण-दर-वर्ण नहीं। ‘जा + ता’ को उलटने पर ‘ता + जा’ बनता है। इसीलिए दो अक्षर वाले शब्दों में यह जल्दी बनता है और लंबे शब्दों में मुश्किल से।
Try This: कविता के बाहर से भी ऐसे जोड़े खोजिए — राज–जरा, नाम–मान, कला–लक (नहीं बनता, इसलिए छोड़ दीजिए), गल–लग, नदी–दीन, रस–सर, कम–मक (नहीं), दिल–लदि (नहीं)। जो जोड़े बनें, केवल वही सूची में रखिए — यही जाँच का असली हिस्सा है।
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