मल्हार अध्याय 7 कविता की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“सौरभ उड़ जाता है नभ में...” • “बीज धूलि में गिर जाता जो...” • “अग्नि सदा धरती पर जलती...” उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों को पढ़ते समय हमारी आँखों के सामने कुछ चित्र उभर आते हैं। कई बार कवि अपनी बात अथवा मुख्य भाव को समझाने या बताने के लिए उदाहरणों के माध्यम से शब्द-चित्रों की लड़ी-सी लगा देता है जिससे कविता में विशेष प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। इस कविता में भी ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं। (क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

समूह की सूची में ये विशेषताएँ आनी चाहिए। हर एक के साथ कविता की पंक्ति भी लिखिए, तभी सूची प्रमाण के साथ खड़ी होगी।

विशेषताकविता से उदाहरणक्या असर पड़ता है
शब्द-चित्रों की लड़ीसौरभ, बीज, अग्नि, धूम — चार चित्र एक के बाद एकबात कहने से पहले दृश्य बन जाता है, इसलिए तर्क अपने-आप मन में बैठ जाता है
विपरीतार्थक शब्दों का प्रयोगआरोहण – अवरोहण; नभ – धरती; उड़ना – गिरनाऊपर-नीचे का खिंचाव पूरी कविता में बना रहता है
समानार्थी शब्दों का प्रयोगनभ – गगन; भू – भूमिएक ही अर्थ अलग ध्वनि में आता है, दोहराव खटकता नहीं
एक ही शब्द का बार-बार आना‘मत’ — मत बाँधो, मत रोको; ‘इसका’ — दो बारनिषेध की रट-सी बन जाती है, जो निवेदन को गहरा करती है
प्रश्न पूछना (प्रश्नालंकार)फिर वह लौट कहाँ आता है? / वह नभ में कब उड़ पाता है?उत्तर पाठक से मनवा लिया जाता है, थोपा नहीं जाता
संबोधन / आज्ञार्थक क्रियाएँन काटो, मत बाँधो, मत रोकोकविता किसी से सीधी बात करती है, इसलिए पाठक को लगता है वह भी सुना जा रहा है
मानवीकरणसपना विचरण करता है, रंग लेता है, भूमि को सिखलाता हैअमूर्त सपना एक जीता-जागता पात्र बन जाता है
रूपकसपनों के ‘पंख’‘पंख काटना’ मुहावरे-सा चुभता है और अन्याय का भाव जगाता है
टेक (दोहराई गई पंक्तियाँ)पहली दो पंक्तियाँ अंत में फिरकविता गीत जैसी बन जाती है और मुख्य भाव याद रह जाता है
तत्सम शब्दावली और छोटी पंक्तियाँसौरभ, विचरण, दीप्ति, आरोहण, अवरोहणभाषा में गरिमा आती है; छोटी पंक्तियाँ लय तेज़ रखती हैं
प्रस्तुति का सुझाव: समूह अपनी सूची इस क्रम में सुनाए — पहले पंक्ति पढ़े, फिर विशेषता का नाम ले, फिर एक वाक्य में बताए कि वह विशेषता वहाँ क्या काम कर रही है।
प्र2.
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ समाहित हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए। कविता की विशेषताएँ — 1. एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। 2. एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया गया है। 3. समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है। 4. प्रश्न पूछा गया है। 5. संबोधन का प्रयोग किया गया है। 6. सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है। कविता की पंक्तियाँ — 1. वह नभ में कब उड़ पाता है? 2. इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! 3. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! 4. इन सपनों के पंख न काटो 5. नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! 6. दीप्ति लिए भू पर आयेगा। / स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!
उत्तर
विशेषतापंक्तिवह विशेषता वहाँ कैसे है
1. विपरीत अर्थ वाले शब्द2आरोहण × अवरोहण — ऊपर चढ़ना और नीचे उतरना, ठीक उलटे अर्थ वाले दो शब्द एक ही साथ
2. एक ही शब्द बार-बार5दोनों पंक्तियों में ‘मत’ दोहराया गया है — मत रोको, मत बाँधो
3. समानार्थी शब्द6भू और भूमि — दोनों का अर्थ धरती; एक ही अंश में पास-पास आए हैं
4. प्रश्न पूछा गया है1‘कब उड़ पाता है?’ — प्रश्नवाचक पंक्ति, जिसका उत्तर ‘कभी नहीं’ है
5. संबोधन का प्रयोग4‘न काटो’ किसी सामने खड़े व्यक्ति से कहा गया है — यही संबोधन है
6. सपने को मनुष्य की तरह चित्रित करना3सिखाना मनुष्य का काम है; यहाँ सपना ही भूमि का गुरु बन जाता है — मानवीकरण

संक्षेप में — 1→2, 2→5, 3→6, 4→1, 5→4, 6→3

दो जगह उलझन हो सकती है: पंक्ति 2 में ‘इसका’ और ‘मत’ भी दोहराए गए हैं, इसलिए वह विशेषता 2 से भी मिलती दिखती है। पर विपरीतार्थक जोड़ी केवल उसी पंक्ति में है, जबकि शब्द-दोहराव पंक्ति 5 में भी है — इसलिए वही मिलान बनता है जिसमें कोई विशेषता बिना जोड़ी के न रह जाए। इसी तरह पंक्ति 3 और 6 दोनों में ‘स्वर्ग बनाने का…’ आता है; अंतर यह है कि पंक्ति 6 में भू भी है, इसलिए समानार्थी वाली विशेषता उसी पर बैठती है।
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