मल्हार अध्याय 7 चर्चा-परिचर्चा

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“सपनों में दोनों ही गति है/उड़कर आँखों में आता है।” किसी एक के द्वारा देखा गया सपना बहुत से लोगों का सपना भी बन जाता है, जैसे— हमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने का सपना सभी भारतीयों का सपना बन गया। साथियों से चर्चा कीजिए कि आपके कौन-से ऐसे सपने हैं जिन्हें पूरा करने के लिए आप अन्य लोगों को भी जोड़ना चाहेंगे।
उत्तर

पहले यह पहचानिए कि कौन-सा सपना अकेले पूरा नहीं हो सकता। जिस काम में कई हाथ चाहिए, वही सपना दूसरों को जोड़ने वाला होता है।

साझा सपनाक्यों अकेले नहीं होगाकिसे जोड़ेंगे
मोहल्ला कूड़ा-मुक्त होएक घर का कूड़ा उठा लेने से गली साफ़ नहीं होतीसभी घर, सफ़ाईकर्मी, दुकानदार, नगरपालिका
गाँव में कोई बच्चा विद्यालय से बाहर न रहेमाता-पिता को समझाना और मदद करना कई लोगों का काम हैशिक्षक, पंचायत, बड़े विद्यार्थी, आँगनवाड़ी
तालाब और पेड़ बचेंएक व्यक्ति के लगाए पौधे की रखवाली अकेले नहीं होतीविद्यालय, ग्राम-सभा, युवा मंडल
विद्यालय में कोई किसी को न चिढ़ाएयह आदत पूरी कक्षा के मिलकर तय करने से बदलती हैसहपाठी, कक्षा-शिक्षक, अभिभावक
इतिहास से सीख: स्वतंत्रता का सपना पहले कुछ ही लोगों का था। वह जन-आंदोलन तब बना जब उसे सबकी रोज़ की ज़िंदगी से जोड़ दिया गया — नमक, खादी, विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार। इसी तरह कोई भी सपना तभी फैलता है जब लोगों को दिखे कि उसमें उनका अपना हित भी है।
चर्चा का तरीक़ा: समूह में हर साथी एक सपना बताए; फिर मिलकर तय कीजिए कि उनमें से कौन-से दो सपने इस साल विद्यालय में सचमुच शुरू किए जा सकते हैं, और उनके लिए पहला काम क्या होगा।
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