प्र1.
(क) विराम चिह्न का फेरबदल—
रोको मत, जाने दो
रोको, मत जाने दो
लेखन में विराम चिह्नों का विशेष महत्व होता है। … नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। आप किन चित्रों के लिए ‘रोको मत, जाने दो’ या ‘रोको, मत जाने दो’ का प्रयोग करेंगे? दिए गए रिक्त स्थान में लिखिए और इन चित्रों को शीर्षक भी दीजिए।
उत्तर
पहले नियम साफ़ कर लीजिए। अल्पविराम जहाँ लगता है, वाक्य वहीं टूटता है और ‘मत’ किस शब्द के साथ जुड़ेगा, यही बदल जाता है।
रोको मत , जाने दो → रोकना मना है — जाने दीजिए
रोको , मत जाने दो → जाना मना है — रोक लीजिए
रोको , मत जाने दो → जाना मना है — रोक लीजिए
| चित्र (पृष्ठ 99) | क्या हो रहा है | सही वाक्य | संभावित शीर्षक |
|---|---|---|---|
| 1. सड़क पर ज़ेब्रा-क्रॉसिंग; एक व्यक्ति बच्चे का हाथ पकड़कर रोक रहा है, सामने से कार आ रही है | कार निकलने तक बच्चे का सड़क पार करना ख़तरनाक है | रोको, मत जाने दो | सुरक्षा पहले / पहले देखो, फिर बढ़ो |
| 2. जंगल के किनारे बोर्ड — ‘यह बाघ विचरण क्षेत्र है’; एक व्यक्ति भीतर जाने को है | यह वन्य जीवों का क्षेत्र है, भीतर जाना जान-जोखिम है | रोको, मत जाने दो | यह जंगल उनका घर है / चेतावनी पढ़िए |
| 3. सैनिक बेटी छुट्टी के बाद पीठ पर बैग लिए विदा ले रही है; परिवार गले लगा रहा है (‘छुट्टियाँ समाप्त, सैनिक जाने को तैयार’) | ड्यूटी पर लौटना कर्तव्य है, इसे रोका नहीं जाना चाहिए | रोको मत, जाने दो | कर्तव्य पहले / विदा, फिर मिलेंगे |
| 4. मतदान केंद्र के बाहर पहचान-पत्र लिए स्त्री और बच्ची; एक व्यक्ति कह रहा है ‘तुम मत जाओ…’ | मतदान हर नागरिक का अधिकार है; किसी को रोकना अनुचित है | रोको मत, जाने दो | मेरा वोट, मेरा अधिकार / मतदान अवश्य |
पहचानने की कुंजी: ख़ुद से पूछिए — जाने में किसी का नुकसान है या भला? नुकसान है (कार आ रही है, बाघ का क्षेत्र है) तो ‘रोको, मत जाने दो’। भला है या वह किसी का अधिकार/कर्तव्य है (ड्यूटी, मतदान) तो ‘रोको मत, जाने दो’। एक अल्पविराम की जगह बदलने से वाक्य का अर्थ ही उलट जाता है — इसीलिए विराम-चिह्न को ‘लेखन का साँस लेना’ कहा जाता है।
Try This: इसी तरह के और वाक्य बनाइए — “खाओ मत, चलो” / “खाओ, मत चलो”; “पढ़ो मत, सो जाओ” / “पढ़ो, मत सो जाओ”। और वह प्रसिद्ध उदाहरण भी देखिए — “रोको मत, जाने दो” की तरह ही “क्षमा नहीं, दंड दो” और “क्षमा, नहीं दंड दो” में अंतर आ जाता है।