प्र1.
(क) कविता में गति को न बाँधने की बात कही गई है। आप ‘बाँधने’ का प्रयोग किन-किन स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं? बताइए। (संकेत— गाँठ बाँधना)
उत्तर
‘बाँधना’ दो तरह से आता है — सचमुच के बाँधने में और लाक्षणिक अर्थ में। कविता का ‘बाँधना’ दूसरे प्रकार का है।
| प्रकार | प्रयोग | वाक्य |
|---|---|---|
| वस्तुओं के लिए | गठरी, बोझ, रस्सी, जूते के फीते, पगड़ी, राखी, पट्टी, गाय-बैल | दादी ने चोट पर पट्टी बाँध दी। |
| निर्माण में | बाँध बाँधना, मेड़ बाँधना, पुल की डोर बाँधना | गाँव वालों ने नाले पर मिट्टी की मेड़ बाँध दी। |
| समय-नियम के लिए | समय बाँधना, सीमा बाँधना, दिनचर्या बाँधना | परीक्षा के लिए हमने पढ़ने का समय बाँध लिया। |
| मुहावरों में | गाँठ बाँधना (याद रखना), समाँ बाँधना (माहौल जमाना), मन बाँधना (हिम्मत करना), बँधी मुट्ठी (न बताया भेद) | गायक ने ऐसा समाँ बाँधा कि कोई उठा ही नहीं। |
| भाव या स्वतंत्रता के लिए | सपनों की गति बाँधना, कल्पना को बाँधना | किसी की कल्पना बाँध देना उसकी सबसे बड़ी हानि करना है। |
अंतर समझिए: रस्सी से बाँधना सुरक्षा देता है — गठरी बिखरती नहीं, घाव खुलता नहीं। पर विचार को बाँधना हानि करता है, क्योंकि विचार का काम ही चलना है। कविता इसी दूसरी तरह के बाँधने के विरुद्ध है।