मल्हार अध्याय 7 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) कविता में गति को न बाँधने की बात कही गई है। आप ‘बाँधने’ का प्रयोग किन-किन स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं? बताइए। (संकेत— गाँठ बाँधना)
उत्तर

‘बाँधना’ दो तरह से आता है — सचमुच के बाँधने में और लाक्षणिक अर्थ में। कविता का ‘बाँधना’ दूसरे प्रकार का है।

प्रकारप्रयोगवाक्य
वस्तुओं के लिएगठरी, बोझ, रस्सी, जूते के फीते, पगड़ी, राखी, पट्टी, गाय-बैलदादी ने चोट पर पट्टी बाँध दी।
निर्माण मेंबाँध बाँधना, मेड़ बाँधना, पुल की डोर बाँधनागाँव वालों ने नाले पर मिट्टी की मेड़ बाँध दी।
समय-नियम के लिएसमय बाँधना, सीमा बाँधना, दिनचर्या बाँधनापरीक्षा के लिए हमने पढ़ने का समय बाँध लिया।
मुहावरों मेंगाँठ बाँधना (याद रखना), समाँ बाँधना (माहौल जमाना), मन बाँधना (हिम्मत करना), बँधी मुट्ठी (न बताया भेद)गायक ने ऐसा समाँ बाँधा कि कोई उठा ही नहीं।
भाव या स्वतंत्रता के लिएसपनों की गति बाँधना, कल्पना को बाँधनाकिसी की कल्पना बाँध देना उसकी सबसे बड़ी हानि करना है।
अंतर समझिए: रस्सी से बाँधना सुरक्षा देता है — गठरी बिखरती नहीं, घाव खुलता नहीं। पर विचार को बाँधना हानि करता है, क्योंकि विचार का काम ही चलना है। कविता इसी दूसरी तरह के बाँधने के विरुद्ध है।
प्र2.
(ख) ‘स्वर्ग’ शब्द से आशय है ‘सुखद स्थान’। अर्थात वह स्थान जहाँ सुख, शांति, समृद्धि और आनंद की अनुभूति हो। अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए आप क्या-क्या प्रयास करेंगे? सूची बनाइए और घर के सदस्यों के साथ साझा कीजिए।
उत्तर

अच्छी सूची वह है जिसमें हर काम आपके अपने हाथ का हो — ‘सरकार को यह करना चाहिए’ जैसी बातें इसमें नहीं आतीं।

जगहमैं क्या करूँगा/करूँगीइससे क्या बदलेगा
घरअपना सामान अपनी जगह रखना; छोटे भाई-बहन को पढ़ाना; बड़ों से रोज़ बात करना; बिजली-पानी बचानाघर में झगड़े और खीझ कम होंगे; सबका समय बचेगा
आस-पड़ोसकूड़ा कूड़ेदान में डालना; गली में पौधे लगाना और सींचना; बुज़ुर्गों की छोटी-मोटी मदद; त्योहार पर सबको साथ बुलानागली साफ़ रहेगी, हरियाली बढ़ेगी, लोग एक-दूसरे को नाम से जानेंगे
विद्यालयकिसी को चिढ़ाना नहीं और चिढ़ाने पर बोलना; कक्षा और शौचालय साफ़ रखना; कमज़ोर साथी को पढ़ाई में साथ देना; पुस्तकालय की किताब समय पर लौटानाडर कम होगा, इसलिए सबका मन पढ़ाई में लगेगा
नमूना उत्तर (साझा करने के लिए): “मैंने तीन काम चुने हैं — रोज़ रात को अपनी किताबें जमाकर रखना, गली के पीपल के पौधे को हर दूसरे दिन पानी देना, और कक्षा में किसी को चिढ़ाते देखूँ तो चुप न रहना। ये तीनों काम मैं आज से शुरू कर सकता हूँ/सकती हूँ और इनके लिए किसी से पैसे या अनुमति की ज़रूरत नहीं है।”
कविता से जोड़ें: ‘स्वर्ग बनाने का शिल्प’ का अर्थ यही है — स्वर्ग कहीं से आता नहीं, बनाया जाता है, और वह भी छोटे-छोटे हाथ के कामों से।
प्र3.
(ग) कविता में सपनों की बात की गई है। आपका कौन-सा सपना ऐसा है जो यदि सच हो जाए तो वह दूसरों की सहायता कर सकता है? उसके विषय में बताइए।
उत्तर

अच्छे उत्तर में तीन बातें होनी चाहिए — सपना क्या है, किसकी और कैसे मदद होगी, और आज से पहला क़दम क्या है। तीसरी बात ही सपने को कल्पना से अलग करती है।

सपनाकिसकी मददआज का पहला क़दम
डॉक्टर बनकर अपने गाँव में काम करनाजिन्हें इलाज के लिए तीस किलोमीटर जाना पड़ता हैविज्ञान में नियमित मेहनत; प्राथमिक उपचार सीखना
मोहल्ले में एक निःशुल्क पुस्तकालयवे बच्चे जिनके घर में किताबें नहीं हैंअपनी पढ़ी हुई किताबें एक अलमारी में जमा करना और साथियों से भी माँगना
शिक्षक बनकर पहली पीढ़ी के बच्चों को पढ़ानावे बच्चे जिनके घर में कोई पढ़ा-लिखा नहींअभी अपने से छोटे दो बच्चों को रोज़ आधा घंटा पढ़ाना
वर्षा-जल संचयन हर छत परगर्मियों में पानी की कमी झेलने वाला पूरा मोहल्लाअपने घर की छत के पाइप को गड्ढे तक जोड़ना और उसका परिणाम दिखाना
नमूना उत्तर: “मेरा सपना है कि मैं अपने मोहल्ले में एक छोटा-सा पुस्तकालय बनाऊँ। यहाँ बहुत बच्चे हैं जिनके घर में कहानी की एक भी किताब नहीं है। यदि यह सपना सच हुआ तो शाम को खाली बैठे बच्चों को पढ़ने के लिए कुछ मिलेगा। इसके लिए मैंने अभी से अपनी पुरानी किताबें एक पेटी में जमा करनी शुरू कर दी हैं और चार साथियों ने भी अपनी किताबें देने का वादा किया है।”
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