मल्हार अध्याय 8 तार से संदेश

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाएँ कि यह एकांकी लगभग कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी?
उत्तर

अनुमान — यह एकांकी लगभग 80 से 90 वर्ष पहले लिखी गई होगी, यानी बीसवीं सदी के चौथे-पाँचवें दशक के आसपास।

अनुमान का आधार, एक-एक करके:

संकेतएकांकी मेंइससे क्या निकलता है
तार का प्रचलन“कल ही तो झाँसी से दिया था।”तार तब संदेश भेजने का सबसे तेज साधन था। न फोन का जिक्र है, न किसी और साधन का। भारत में तार-सेवा 15 जुलाई 2013 को पूरी तरह बंद हो गई — यानी यह उससे बहुत पहले का समय है।
लेखक का जीवनकालउदयशंकर भट्ट — 1898 से 1966एकांकी 1966 से पहले ही लिखी गई होगी। यानी आज से कम-से-कम साठ वर्ष पहले।
मुद्रा“साढ़े नौ आने गज”, “सवा रुपया गज”‘आना’ 1957 तक चलन में था। उसके बाद देश में दशमलव मुद्रा (नए पैसे) आ गई।
कीमतेंनौ रुपये में धोती, सवा रुपये गज मलमल, तीन-चार रुपये में दो लोगों का भोजनये कीमतें आजादी से पहले या उसके तुरंत बाद की हैं।
जीवन-शैलीघड़े का पानी, बरफ बाजार से मँगाना, मेज पर रखा एक पुराना पंखा, तीन मंजिल पानी चढ़ानाघर में न फ्रिज है, न नल का ऊपर तक पानी — यानी बहुत पुराना समय।
ध्यान दीजिए: एकांकी में कहीं भी लिखने का वर्ष नहीं दिया गया, इसलिए यह अनुमान है, तथ्य नहीं। पर अनुमान भी प्रमाणों पर टिका हो तो उसे तर्क कहते हैं। ऊपर के पाँचों संकेत एक ही दिशा में इशारा करते हैं, इसीलिए यह अनुमान भरोसे लायक है।
प्र2.
(ख) आजकल संदेश भेजने के कौन-कौन से साधन सुलभ हैं?
उत्तर
साधनकैसे काम करता हैविशेषता
मोबाइल फोन पर बातआवाज तुरंत दूसरे तकसबसे तेज और सबसे सरल; पढ़ना-लिखना न आता हो तब भी काम आता है।
एस.एम.एस. और इंटरनेट संदेश (मैसेजिंग ऐप)लिखा हुआ संदेश, चित्र, ध्वनि-संदेशसंदेश सुरक्षित रहता है, बाद में पढ़ा जा सकता है; बैंक और सरकारी सूचनाएँ इसी से आती हैं।
ई-मेलइंटरनेट के माध्यम से पत्र और फाइलेंलंबे और औपचारिक संदेशों तथा दस्तावेजों के लिए।
वीडियो कॉलआवाज के साथ चेहरा भीदूर बैठे परिवार से आमने-सामने जैसी बात।
सोशल मीडियाएक साथ बहुत लोगों तकसूचना बहुत तेजी से फैलती है — इसीलिए बिना जाँचे कुछ आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।
भारतीय डाक — पत्र, स्पीड पोस्ट, मनीऑर्डरडाकिये के माध्यम सेआज भी सबसे भरोसेमंद और कानूनी रूप से मान्य; देश के कोने-कोने तक पहुँचता है।
तार से आज तक: तार में शब्दों की गिनती के हिसाब से पैसे लगते थे, इसलिए संदेश बहुत छोटा और सूखा होता था। आज संदेश लंबा भी हो सकता है, चित्र और आवाज के साथ भी। पर एक बात नहीं बदली — संदेश तभी काम का है जब वह सही समय पर सही व्यक्ति तक पहुँचे। एकांकी में तार भेजा तो गया था, पर समय पर पहुँचा नहीं — और सारी परेशानी वहीं से शुरू हुई।
प्र3.
(ग) आप किसी को संदेश भेजने के लिए किस माध्यम का सर्वाधिक उपयोग करते हैं?
उत्तर

यह आपका अपना उत्तर होगा। इसे लिखते समय केवल माध्यम का नाम मत दीजिए — यह भी बताइए कि किस काम के लिए कौन-सा माध्यम चुनते हैं और क्यों।

नमूना उत्तर: “मैं सबसे अधिक मोबाइल फोन का उपयोग करता हूँ। घर पर देर होने की सूचना देनी हो तो सीधे फोन कर लेता हूँ, क्योंकि उसमें तुरंत उत्तर मिल जाता है। मित्रों से गृहकार्य पूछना हो या किसी पन्ने का चित्र भेजना हो तो संदेश-ऐप का प्रयोग करता हूँ, क्योंकि लिखी हुई बात बाद में भी दिख जाती है। नानी को जन्मदिन की बधाई देनी हो तो वीडियो कॉल करता हूँ, क्योंकि उन्हें चेहरा देखकर ज्यादा अच्छा लगता है। और विद्यालय में छुट्टी का प्रार्थना-पत्र भेजना हो तो ई-मेल करता हूँ, क्योंकि वह औपचारिक रिकॉर्ड बन जाता है।”

अच्छा उत्तर वह है जिसमें चुनाव का कारण हो: तीन-चार परिस्थितियाँ बनाइए — घर, मित्र, रिश्तेदार, विद्यालय — और हर एक के लिए अलग माध्यम बताइए। इससे पता चलता है कि आप सोच-समझकर माध्यम चुनते हैं।
प्र4.
(घ) अपने किसी प्रिय व्यक्ति को एक पत्र लिखकर भारतीय डाक द्वारा भेजिए।
उत्तर

यह करके देखने वाली गतिविधि है। पत्र लिखिए, लिफाफे पर पूरा पता और पिनकोड लिखिए, टिकट लगाइए और डाकपेटी में डालिए या डाकघर में जमा कीजिए।

अनौपचारिक पत्र का ढाँचा:

  • ऊपर दाईं ओर — अपना पता और दिनांक
  • संबोधन — पूज्य नानी जी / प्रिय मामा जी
  • अभिवादन — सादर प्रणाम / नमस्ते
  • पहला अनुच्छेद — कुशल-क्षेम
  • दूसरा अनुच्छेद — मुख्य बात
  • तीसरा अनुच्छेद — आगे की बात, निमंत्रण या शुभकामना
  • अंत — आपका प्रिय पौत्र / भांजा, नाम

नमूना पत्र:

14, गांधी नगर
जबलपुर — 482002
2 सितंबर 2026

पूज्य नानी जी,

सादर प्रणाम।

आशा है आप कुशल होंगी। हम सब यहाँ ठीक हैं। इस बार गरमी बहुत पड़ी। हमने कक्षा में ‘नए मेहमान’ नाम की एक एकांकी पढ़ी, जिसमें एक घर में बिना बताए दो मेहमान आ जाते हैं। उसे पढ़ते हुए मुझे बार-बार आपकी याद आई, क्योंकि आप जब भी आती हैं, हफ्ता भर पहले चिट्ठी भेज देती हैं।

उसी एकांकी में एक जगह ‘तार’ का जिक्र आया है। अध्यापिका जी ने बताया कि अब तार-सेवा बंद हो चुकी है। इसीलिए मैंने सोचा कि आपको फोन नहीं, चिट्ठी लिखूँ — जैसे पहले लिखी जाती थी। मुझे यह लिखने में बहुत अच्छा लगा।

दशहरे की छुट्टियों में हम आपके पास आएँगे। नाना जी को मेरा प्रणाम कहिएगा।

आपका प्रिय पौत्र
अनुराग

पत्र भेजते समय: लिफाफे के बीच में पाने वाले का पूरा नाम, पता और पिनकोड लिखिए, और पीछे या ऊपर बाईं ओर अपना पता। पिनकोड ही डाक को सही डाकघर तक पहुँचाता है — एकांकी की उलझन इसी बात से पैदा हुई थी कि पता अधूरा था।
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