अनुमान — यह एकांकी लगभग 80 से 90 वर्ष पहले लिखी गई होगी, यानी बीसवीं सदी के चौथे-पाँचवें दशक के आसपास।
अनुमान का आधार, एक-एक करके:
| संकेत | एकांकी में | इससे क्या निकलता है |
|---|---|---|
| तार का प्रचलन | “कल ही तो झाँसी से दिया था।” | तार तब संदेश भेजने का सबसे तेज साधन था। न फोन का जिक्र है, न किसी और साधन का। भारत में तार-सेवा 15 जुलाई 2013 को पूरी तरह बंद हो गई — यानी यह उससे बहुत पहले का समय है। |
| लेखक का जीवनकाल | उदयशंकर भट्ट — 1898 से 1966 | एकांकी 1966 से पहले ही लिखी गई होगी। यानी आज से कम-से-कम साठ वर्ष पहले। |
| मुद्रा | “साढ़े नौ आने गज”, “सवा रुपया गज” | ‘आना’ 1957 तक चलन में था। उसके बाद देश में दशमलव मुद्रा (नए पैसे) आ गई। |
| कीमतें | नौ रुपये में धोती, सवा रुपये गज मलमल, तीन-चार रुपये में दो लोगों का भोजन | ये कीमतें आजादी से पहले या उसके तुरंत बाद की हैं। |
| जीवन-शैली | घड़े का पानी, बरफ बाजार से मँगाना, मेज पर रखा एक पुराना पंखा, तीन मंजिल पानी चढ़ाना | घर में न फ्रिज है, न नल का ऊपर तक पानी — यानी बहुत पुराना समय। |