‘अनुपात बिगड़ना’ का अर्थ है — दो चीज़ों का आपसी संतुलन टूट जाना। पुस्तक ने एक उदाहरण दे दिया है; कुछ और —
- पढ़ाई और नींद: परीक्षा के दिनों में पढ़ने के घंटे बढ़ जाते हैं और सोने के घटते जाते हैं। नतीजा — पढ़ा हुआ याद ही नहीं रहता, क्योंकि याद रखने का काम नींद में होता है।
- खर्च और आमदनी: जब खर्च आमदनी से बड़ा हो जाए तो घर चलाना कठिन हो जाता है।
- वर्षा और नालियाँ: बारिश उतनी ही होती है, पर नालियाँ पट जाएँ तो नगर डूब जाता है। यहाँ पानी नहीं, अनुपात बिगड़ा है।
- पेड़ और मकान: मुहल्ले में मकान बढ़ते गए और पेड़ घटते गए — इसलिए गर्मी बढ़ गई।
- मोबाइल और खेल: पर्दे पर बीतने वाला समय बढ़ता जाए और मैदान का घटता जाए तो शरीर और मन दोनों थकने लगते हैं।