भावार्थ — असंख्य तारों-नक्षत्रों के बीच हमारी पृथ्वी एक छोटा-सा गोला भर है; करोड़ों पिंडों में से बस एक।
पर इन तीन पंक्तियों में दो अर्थ एक साथ चल रहे हैं, और यही इनका सौंदर्य है। ‘करोड़ों में एक ही’ का पहला अर्थ है — करोड़ों में से महज़ एक, यानी नगण्य। दूसरा अर्थ है — करोड़ों में केवल एक ऐसी, यानी अनोखी, अकेली, जिस पर जीवन है। कवि दोनों अर्थ जान-बूझकर एक साथ रखते हैं।
यह क्यों काम करता है: इससे पाठक को एक ही साँस में दो बातें मिलती हैं — विनम्रता (हम बहुत छोटे हैं) और ज़िम्मेदारी (जो चीज़ करोड़ों में एक ही है, उसे सँभालना ही होगा)। यदि कवि केवल ‘छोटी’ कहते तो निराशा आती; ‘एक ही’ जोड़कर वे उसी छोटेपन को मूल्यवान बना देते हैं।
शब्द पर ध्यान: ‘अनगिन’ = अनगिनत। यह अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण है — कवि गिनती नहीं देते, गिनती की असंभवता देते हैं। बड़ी संख्या बताने से अधिक असर संख्या के छूट जाने का पड़ता है।