मल्हार अध्याय 9 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) लगाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है? • पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण • ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म • सूर्य, चंद्र आदि सभी नक्षत्रों से बड़ा • समस्त प्रकृति पर शासन करने वाला
उत्तर

सही उत्तर — ★ ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म।

कविता आदमी को नापने के लिए एक सीढ़ी बनाती है — आदमी कमरे से छोटा, कमरा घर में, घर मुहल्ले में, मुहल्ला नगर में, नगर प्रदेश में, प्रदेश देश में, देश पृथ्वी पर, पृथ्वी अनगिन नक्षत्रों में ‘करोड़ों में एक ही’, और वह सब भी ‘लाखों ब्रह्मांडों’ में से एक ब्रह्मांड के भीतर। हर सीढ़ी पर आदमी का आकार घटता जाता है। इसी को कवि ‘यह है अनुपात / आदमी का विराट से’ कहकर सीधे बता देते हैं।

बाकी विकल्प क्यों नहीं: कविता में कहीं भी आदमी को बड़ा, महत्वपूर्ण या शासक नहीं कहा गया। उलटे, उसका बड़ा होने का दावा ही कविता का व्यंग्य-लक्ष्य है — ‘अपने को दूजे का स्वामी बताता है’ कवि की सहमति नहीं, आदमी का भ्रम है।
प्र2.
(2) कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है? • पृथ्वी और सूर्य • देश और नगर • घर और कमरा • मानव और ब्रह्मांड
उत्तर

सही उत्तर — ★ मानव और ब्रह्मांड।

घर-कमरा, नगर-देश, पृथ्वी-नक्षत्र — ये जोड़ियाँ कविता में आती तो हैं, पर वे मंज़िल नहीं, सीढ़ियाँ हैं। कवि इन्हें एक के बाद एक इसीलिए रखते हैं ताकि दो सिरे साफ़ दिखें — एक सिरे पर कमरे से भी छोटा आदमी, दूसरे सिरे पर विराट ब्रह्मांड। तुलना अंत में इन्हीं दोनों के बीच होती है: ‘यह है अनुपात / आदमी का विराट से’।

प्र3.
(3) कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है? • त्याग, ज्ञान और प्रेम में • सेवा और परोपकार में • ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में • उदारता, धर्म और न्याय में
उत्तर

सही उत्तर — ★ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में।

कविता की पंक्ति है — ‘इस पर भी आदमी / ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास लीन’। ‘लीन’ शब्द ध्यान देने योग्य है: इसका अर्थ है डूबा हुआ, रमा हुआ। यानी ये भाव आदमी के साथ कभी-कभी घटने वाली दुर्घटना नहीं, उसकी रोज़ की हालत हैं।

ध्यान दें: ‘इस पर भी’ इस पंक्ति की धुरी है — इतना छोटा होने के बावजूद। यही ‘इस पर भी’ कविता के दोनों हिस्सों को जोड़ता है।
प्र4.
(4) कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है? • वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता। • वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है। • वह प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है। • वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।
उत्तर

इस प्रश्न के एक से अधिक उत्तर सही हैं। तारा लगाइए — पहले, दूसरे और चौथे विकल्प पर।

  • वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है। — यही कविता का मूल आरोप है। ‘अहं’ शब्द कविता में सीधे आया है, और पूरी पहली सीढ़ी बनाई ही इसलिए गई है कि यह भूल पकड़ी जा सके।
  • वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता। — ‘इस पर भी आदमी…’ का अर्थ ही यह है कि अपनी असलियत जान लेने के बाद भी उसका आचरण नहीं बदलता।
  • वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है। — ‘अपने को दूजे का स्वामी बताता है’ इसी का सीधा प्रमाण है।
तीसरा विकल्प क्यों नहीं: प्रकृति से तालमेल की बात कविता कहीं नहीं उठाती। कविता का विषय आदमी का आदमी के साथ व्यवहार है — दीवारें, स्वामित्व और बँटवारा — प्रकृति के साथ उसका बरताव नहीं।
प्र5.
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

इस काम में उत्तर से ज़्यादा महत्व कारण का है। चर्चा को इस क्रम में चलाइए —

  1. हर साथी अपना चुना हुआ विकल्प बताए और कविता की वह पंक्ति पढ़े जिसके आधार पर उसने चुना।
  2. जहाँ मतभेद हो, वहाँ यह देखिए कि दोनों पंक्तियाँ अलग-अलग हैं या एक ही पंक्ति के दो अर्थ निकाले गए हैं।
  3. अंत में तय कीजिए कि किस उत्तर के पीछे पंक्ति का सीधा प्रमाण है और कौन-सा उत्तर केवल हमारी अपनी राय है।
नमूना उत्तर: “चौथे प्रश्न में मैंने ‘वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है’ चुना, क्योंकि कविता की पूरी पहली सीढ़ी — कमरे से ब्रह्मांड तक — केवल यह दिखाने के लिए बनाई गई है कि आदमी कितना छोटा है। पर मेरी मित्र ने ‘वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है’ चुना और ‘अपने को दूजे का स्वामी बताता है’ पंक्ति पढ़कर सुनाई। हमने पाया कि दोनों उत्तर एक ही बात के दो हिस्से हैं — अहंकार भीतर का भाव है, स्वामी बनना उसका बाहरी रूप। इसलिए हमने दोनों पर तारा लगाया।”
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