प्र1.
नीचे दो स्तंभ दिए गए हैं। अपने समूह में चर्चा करके स्तंभ 1 की पंक्तियों का मिलान स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ से कीजिए। स्तंभ 1 — 1. संख्यातीत शंख सी दीवारें 2. पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक 3. ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा 4. दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे 5. परिधि नभ गंगा की 6. एक कमरे में दो दुनिया रचाता। स्तंभ 2 — 1. ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक 2. आदमी के संकुचित होने का प्रतीक 3. मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ 4. सीमित स्थान में भी और अलगाव की प्रवृत्ति 5. पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत 6. मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ
उत्तर
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | स्तंभ 2 (अर्थ) | आधार |
|---|---|---|
| 1. संख्यातीत शंख सी दीवारें | 3. मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ | ये दीवारें ईंट की नहीं, आदमी की बनाई हुई हैं — इसीलिए ‘कृत्रिम’। |
| 2. पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक | 5. पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत | ‘छोटी’ में अल्पता, ‘एक ही’ में अनोखापन — दोनों एक साथ। |
| 3. ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा | 6. मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ | कविता इन्हें एक साथ गिनाकर आदमी का भीतरी चित्र बनाती है। |
| 4. दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे | 2. आदमी के संकुचित होने का प्रतीक | कविता का पहला माप — आदमी कमरे से भी छोटा। |
| 5. परिधि नभ गंगा की | 1. ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक | आकाशगंगा की परिधि सबको समेटे हुए है। |
| 6. एक कमरे में दो दुनिया रचाता | 4. सीमित स्थान में भी और अलगाव की प्रवृत्ति | जगह घटती गई, बँटवारा फिर भी बना रहा। |
मिलान का सूत्र: स्तंभ 1 की छह पंक्तियाँ कविता के तीन काम बाँटती हैं — विशालता दिखाना (5), लघुता दिखाना (2 और 4) और आदमी का बरताव दिखाना (1, 3, 6)। पहले हर पंक्ति को इन तीन खानों में डालिए, फिर स्तंभ 2 अपने आप बैठ जाएगा।