मल्हार अध्याय 9 कविता की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) अपने समूह के साथ मिलकर कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

पुस्तक ने दो विशेषताएँ स्वयं बता दी हैं — अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’ है और पंक्तियाँ बहुत छोटी-छोटी हैं। सूची इनसे आगे बढ़ाइए —

  • एक ही साँचे की पुनरावृत्ति: ‘क है ख में’ — कमरा है घर में, घर है मुहल्ले में, मुहल्ला नगर में। साँचा वही रहता है, केवल नाम बदलते हैं।
  • क्रिया का लोप: ‘मुहल्ला नगर में’ में ‘है’ गायब है। इससे गति तेज़ होती है — जैसे सीढ़ियाँ तेज़ी से चढ़ी जा रही हों।
  • कोई तुक नहीं: यह मुक्त छंद (अतुकांत) कविता है। लय तुक से नहीं, दोहराव और छोटी पंक्तियों से बनती है।
  • संख्याओं की भरमार: दो, अनगिन, करोड़ों, लाखों, कितनी ही, संख्यातीत, शंख — कविता गिनती की भाषा में सोचती है, इसीलिए शीर्षक भी गणित का शब्द है — ‘अनुपात’।
  • क्रियाओं का बदल जाना: पहले भाग में केवल ‘है’ (स्थिति) है; दूसरे भाग में ‘उठाता है’, ‘बताता है’, ‘रचाता है’ (कर्म) आ जाते हैं। सृष्टि बस है, आदमी लगातार करता है।
  • वृत्ताकार बनावट: कविता कमरे से शुरू होकर कमरे पर ही खत्म होती है।
  • निदेशक चिह्न (—) का प्रयोग: ठहराव देने और आगे की बात की ओर संकेत करने के लिए।
  • तत्सम और आम बोलचाल का मेल: ‘संख्यातीत’, ‘परिधि’, ‘विराट’ जैसे तत्सम शब्दों के साथ ‘मुहल्ला’, ‘कमरा’, ‘दूजे’ जैसे रोज़ के शब्द।
प्र2.
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए— 1. सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गया है। 2. मुहावरे का प्रयोग किया गया है। 3. छोटे से बड़े की ओर विस्तार देने के लिए शब्दों को दोहराया गया है। 4. प्रश्न शैली में व्यंग्य किया गया है। 5. अतिशयोक्ति से भरा कथन है (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)। 6. मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य किया गया है। — पंक्तियाँ: 1. संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है 2. कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में… 3. देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है 4. कमरा है घर में 5. यह है अनुपात आदमी का विराट से 6. अपने को दूजे का स्वामी बताता है
उत्तर
विशेषतापंक्तिकैसे
1. सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में4. कमरा है घर मेंसीधा वाक्य होता ‘कमरा घर में है’। कवि ने ‘है’ को बीच में लाकर क्रम बदला, जिससे ‘में’ पंक्ति के अंत में आ जाए।
2. मुहावरे का प्रयोग1. संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है‘दीवारें उठाना’ मुहावरा है — भेद और सीमाएँ खड़ी करना।
3. विस्तार के लिए शब्दों का दोहराव2. कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में…हर पंक्ति का अंतिम शब्द अगली पंक्ति का पहला शब्द बनता है — इसी शृंखला से विस्तार बनता है।
4. प्रश्न शैली में व्यंग्य3. देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है‘कौन कहे’ प्रश्न की शक्ल में है, पर उत्तर नहीं माँगता — यह व्यंग्य है।
5. अतिशयोक्ति से भरा कथन5. यह है अनुपात आदमी का विराट सेआदमी की तुलना सीधे असीम विराट से — तुलना को अंतिम सीमा तक बढ़ा-चढ़ाकर कहा गया है।
6. मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य6. अपने को दूजे का स्वामी बताता है‘बताता है’ शब्द बता देता है कि यह स्वामित्व सच नहीं, दावा भर है।
ध्यान देने योग्य बात: दो पंक्तियों में एक से अधिक विशेषताएँ एक साथ मौजूद हैं। ‘संख्यातीत शंख सी दीवारें’ में मुहावरा भी है और अतिशयोक्ति भी (शंख = 1017); ‘देशों की कौन कहे’ में प्रश्न-शैली का व्यंग्य भी है और ‘कौन कहे’ मुहावरा भी। चूँकि मिलान में हर विशेषता एक ही पंक्ति से जुड़नी है, इसलिए ऊपर वाली जोड़ी ही पूरी तालिका को बैठाती है। कक्षा में यदि किसी साथी ने ‘मुहावरा → 3’ और ‘अतिशयोक्ति → 1’ जोड़ा हो, तो उसका तर्क भी सुनिए — यही देखना कि एक पंक्ति में कितनी युक्तियाँ एक साथ काम कर रही हैं, इस अभ्यास का असली लाभ है
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