प्र1.
(क) अपने समूह के साथ मिलकर कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर
पुस्तक ने दो विशेषताएँ स्वयं बता दी हैं — अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’ है और पंक्तियाँ बहुत छोटी-छोटी हैं। सूची इनसे आगे बढ़ाइए —
- एक ही साँचे की पुनरावृत्ति: ‘क है ख में’ — कमरा है घर में, घर है मुहल्ले में, मुहल्ला नगर में। साँचा वही रहता है, केवल नाम बदलते हैं।
- क्रिया का लोप: ‘मुहल्ला नगर में’ में ‘है’ गायब है। इससे गति तेज़ होती है — जैसे सीढ़ियाँ तेज़ी से चढ़ी जा रही हों।
- कोई तुक नहीं: यह मुक्त छंद (अतुकांत) कविता है। लय तुक से नहीं, दोहराव और छोटी पंक्तियों से बनती है।
- संख्याओं की भरमार: दो, अनगिन, करोड़ों, लाखों, कितनी ही, संख्यातीत, शंख — कविता गिनती की भाषा में सोचती है, इसीलिए शीर्षक भी गणित का शब्द है — ‘अनुपात’।
- क्रियाओं का बदल जाना: पहले भाग में केवल ‘है’ (स्थिति) है; दूसरे भाग में ‘उठाता है’, ‘बताता है’, ‘रचाता है’ (कर्म) आ जाते हैं। सृष्टि बस है, आदमी लगातार करता है।
- वृत्ताकार बनावट: कविता कमरे से शुरू होकर कमरे पर ही खत्म होती है।
- निदेशक चिह्न (—) का प्रयोग: ठहराव देने और आगे की बात की ओर संकेत करने के लिए।
- तत्सम और आम बोलचाल का मेल: ‘संख्यातीत’, ‘परिधि’, ‘विराट’ जैसे तत्सम शब्दों के साथ ‘मुहल्ला’, ‘कमरा’, ‘दूजे’ जैसे रोज़ के शब्द।