मल्हार अध्याय 9 सृजन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) कविता में कमरे से लेकर ब्रह्मांड तक का विस्तार दिखाया गया है। इस क्रम को अपनी तरह से एक रेखाचित्र, सीढ़ी या ‘मानसिक-चित्रण’ (माइंड-मैप) द्वारा प्रदर्शित कीजिए। प्रत्येक स्तर पर कुछ विशेषताएँ लिखिए, जैसे— पास-पड़ोस की एक विशेष बात, नगर का कोई स्थान, देश की विविधता आदि। उसके नीचे एक पंक्ति में इस प्रश्न का उत्तर लिखिए— “मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?”
उत्तर

सीढ़ी बनाइए और उसे नीचे से ऊपर चढ़ाइए। कविता का क्रम बिलकुल यही है —

स्तरकविता की पंक्तिआप क्या लिखेंगे (उदाहरण)
1. व्यक्तिदो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटेमेरा नाम, मेरी उम्र, मुझे क्या अच्छा लगता है
2. कमराकमरा है घर मेंपढ़ने की मेज़, खिड़की से दिखने वाला पेड़
3. घरघर है मुहल्ले मेंदादी की कहानियाँ, रसोई की गंध
4. मुहल्लामुहल्ला नगर मेंनुक्कड़ की दुकान, खेल का मैदान, त्योहार पर सजती गली
5. नगरनगर है प्रदेश मेंबस अड्डा, पुस्तकालय, नदी का घाट
6. प्रदेशप्रदेश कई देश मेंप्रदेश की बोली, लोकनृत्य, फ़सल
7. देशदेश कई पृथ्वी परअनेक भाषाएँ, अनेक ऋतुएँ, अनेक त्योहार — एक संविधान
8. पृथ्वीअनगिन नक्षत्रों में / पृथ्वी एक छोटीएकमात्र ग्रह जहाँ पानी, हवा और जीवन है
9. नक्षत्र / नभ गंगासबको समेटे है / परिधि नभ गंगा कीकरोड़ों तारे, सूर्य उनमें एक साधारण तारा
10. ब्रह्मांडलाखों ब्रह्मांडों में / अपना एक ब्रह्मांडजिसका छोर आज तक किसी ने नहीं देखा
नमूना अंतिम पंक्ति: “मैं इस चित्र में सबसे नीचे की सीढ़ी पर हूँ — क्योंकि आकार में मैं सबसे छोटा हूँ; पर यही एकमात्र सीढ़ी है जिस पर मैं कुछ बदल सकता हूँ, इसलिए चित्र यहीं से शुरू होता है।”
बनाते समय ध्यान रखिए: हर ऊपर वाला खाना नीचे वाले को अपने भीतर दिखाए (एक डिब्बे में डिब्बा), केवल बगल में नहीं। कविता की पूरी बनावट इसी ‘भीतर’ पर टिकी है — इसीलिए लगभग हर पंक्ति ‘में’ पर खत्म होती है।
प्र2.
(ख) अगर इसी कविता की तरह कोई कहानी लिखनी हो जिसका नाम हो ‘ब्रह्मांड में मानव’ तो उसको आरंभ कैसे करेंगे? कुछ वाक्य लिखिए।
उत्तर

आरंभ का सूत्र: कविता की तरह कहानी भी सबसे छोटी चीज़ से शुरू कीजिए, फिर धीरे-धीरे कैमरा पीछे खींचिए। इससे पाठक को शुरू में ही अनुपात का अंदाज़ा हो जाता है।

नमूना आरंभ:
“मेज़ पर रखी घड़ी ने ठीक नौ बजाए और छोटे-से कमरे में दो लोगों ने एक-दूसरे से मुँह फेर लिया।
कमरा उस घर का सबसे छोटा कमरा था। घर उस गली का सबसे पुराना घर था। गली उस नगर की हज़ार गलियों में से एक थी, और नगर उस देश के हज़ारों नगरों में से एक।
उसी समय, उस घर की छत से बहुत ऊपर, एक उपग्रह चुपचाप गुज़र रहा था। उसके कैमरे में न वह कमरा आया, न वह गली, न वह झगड़ा — सिर्फ़ एक नीला गोला आया, बादलों में लिपटा हुआ, अनगिन तारों के बीच अकेला।
कहानी यहीं से शुरू होती है — इस सवाल से कि उस नीले गोले पर वह दीवार आख़िर कितनी बड़ी थी।”
प्र3.
(ग) ‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। अगर आपसे कहा जाए कि आप एक ऐसी दुनिया बनाइए जिसमें कोई दीवार न हो तो वह कैसी होगी? उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर

पहले तय कीजिए कि आप किस तरह की दीवार हटा रहे हैं — कविता की दीवार ईंट की नहीं, भेद की है। इसलिए बिना दीवार की दुनिया का अर्थ खुले मैदान नहीं, बिना भेद का समाज है।

नमूना उत्तर: “मेरी दुनिया में मकान होंगे, दरवाज़े भी होंगे — पर उन दरवाज़ों पर ताले नहीं, कुंडी होगी, जिसे कोई भी खटखटा सके।
वहाँ विद्यालय में बैठने का क्रम अंकों से तय नहीं होगा। खेल के मैदान में टीम बनाते समय कोई आखिर में नहीं बचेगा।
वहाँ किसी से उसका उपनाम, धर्म या पिता का पेशा पूछकर उसकी जगह तय नहीं की जाएगी — सिर्फ़ उसका नाम काफ़ी होगा।
वहाँ नक्शे तो होंगे, पर वे दिशा बताएँगे, बँटवारा नहीं।
और सबसे ज़रूरी बात — वहाँ नाराज़गी होगी, झगड़े भी होंगे, पर उनके बाद बोलना बंद नहीं होगा। क्योंकि कविता के अनुसार सबसे छोटी और सबसे पक्की दीवार यही है — एक ही कमरे में रहकर एक-दूसरे से बात न करना।”
ध्यान रखिए: बिना दीवार की दुनिया का अर्थ ‘सब एक जैसे’ नहीं है। कविता ‘कितनी ही सृष्टियाँ’ कहकर अनेकता को सराहती है। दीवार अलगपन से नहीं बनती, अलगपन को नीचा मानने से बनती है।
प्र4.
(घ) एक चित्र शृंखला बनाइए जिसमें ये क्रम दिखे— आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड। प्रत्येक चित्र में आकार का अनुपात दिखाया जाए जिससे यह स्पष्ट हो कि आदमी कितना छोटा है।
उत्तर

बनाने की विधि: आठ चौकोर खाने बनाइए। हर अगले खाने में पिछला चित्र उसी जगह, पर बहुत छोटा करके रखिए और उस पर एक तीर का निशान लगाइए — ‘आप यहाँ हैं’। इस तरह हर पन्ने पर आदमी की जगह वही रहेगी, बस आकार घटता जाएगा। यही तरकीब अनुपात को आँखों से दिखा देती है।

चित्रक्या दिखेआदमी कितना बड़ा दिखे
1. आदमीखड़ा हुआ एक व्यक्तिपूरे खाने जितना
2. कमराचारपाई, मेज़, खिड़की और कोने में वही व्यक्तिखाने का लगभग चौथाई
3. घरकई कमरे, आँगन, छतएक उँगली जितना
4. पड़ोसी क्षेत्रगली, दुकानें, पेड़, मैदानएक बिंदु
5. नगरऊपर से दिखती सड़कों का जालदिखाई ही न दे — तीर से बताइए
6. देशनदियाँ, पहाड़, समुद्र-तटकेवल तीर
7. पृथ्वीनीला गोला, बादलकेवल तीर
8. ब्रह्मांडअनगिन तारे, बीच में एक चमकीला बिंदुपृथ्वी स्वयं बिंदु भर
अंत में लिखिए: कविता की वही दो पंक्तियाँ जिनसे यह पूरी शृंखला निकली है — “यह है अनुपात / आदमी का विराट से।”
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