प्र1.
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘सृष्टि’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए — (शब्द-जाल में केंद्र में ‘सृष्टि’ तथा एक खाने में ‘पृथ्वी’ पहले से दिया गया है; शेष छह खाने रिक्त हैं।)
उत्तर
पुस्तक के जाल में केंद्र में ‘सृष्टि’ है और ऊपर की पंक्ति के बीच वाले खाने में ‘पृथ्वी’ दिया गया है। शेष छह खानों में ये शब्द भरे जा सकते हैं —
| शब्द | अर्थ / जुड़ाव |
|---|---|
| पृथ्वी (दिया हुआ) | वह ग्रह जिस पर जीवन है |
| ब्रह्मांड | सृष्टि का सबसे बड़ा फैलाव — कविता का अंतिम पड़ाव |
| प्रकृति | सृष्टि का दिखाई देने वाला रूप — पेड़, नदी, पर्वत |
| नक्षत्र | तारे, जिनकी गिनती ‘अनगिन’ है |
| आकाशगंगा (नभ गंगा) | तारों का समूह, जिसकी परिधि सबको समेटे है |
| जीव | सृष्टि में साँस लेने वाला हर प्राणी |
| रचना / निर्माण | ‘सृष्टि’ का शाब्दिक अर्थ ही है — रचना |
और भी शब्द: जगत, संसार, विश्व, भूमि, ग्रह, अंतरिक्ष, चराचर, विराट। इनमें से कोई भी छह चुनकर जाल भरा जा सकता है।
चुनने का तरीका: ‘सृष्टि’ के साथ वही शब्द जोड़िए जो या तो उसका हिस्सा हों (पृथ्वी, नक्षत्र, जीव), या उसका पर्याय हों (जगत, संसार), या उसका अर्थ खोलते हों (रचना, निर्माण)। बेतरतीब शब्द जोड़ने से जाल कमज़ोर हो जाता है।