प्र1.
“हर ब्रह्मांड में / कितनी ही पृथ्वियाँ / कितनी ही भूमियाँ / कितनी ही सृष्टियाँ” — क्या आपके मस्तिष्क में कभी इस प्रकार के प्रश्न आते हैं? अवश्य आते होंगे। अपने समूह के साथ मिलकर अपने मन में आने वाले प्रश्नों की सूची बनाइए। अपने शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता से इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़ने का प्रयास कीजिए।
उत्तर
सूची बनाते समय प्रश्नों को दो खानों में रखिए — जिनका उत्तर आज उपलब्ध है, और जिनका उत्तर अभी किसी के पास नहीं। दोनों तरह के प्रश्न ज़रूरी हैं।
| प्रश्न | आज हम क्या जानते हैं |
|---|---|
| हमारी आकाशगंगा में कितने तारे हैं? | लगभग 10,000 करोड़ से भी अधिक — गिनती अनुमान से ही होती है। |
| क्या पृथ्वी जैसे और ग्रह हैं? | वैज्ञानिकों ने अब तक हज़ारों ‘बाह्यग्रह’ (एक्सोप्लैनेट) खोजे हैं; कुछ पर पानी की संभावना मानी जाती है। |
| सूरज की रोशनी पृथ्वी तक कितनी देर में आती है? | लगभग 8 मिनट 20 सेकंड। |
| ब्रह्मांड का छोर कहाँ है? | अभी अज्ञात। हम केवल उतना ही देख पाते हैं जहाँ तक प्रकाश हम तक पहुँच सका है। |
| क्या हमारे अलावा भी कहीं जीवन है? | अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिला — खोज जारी है। |
| क्या सचमुच कई ब्रह्मांड हैं? | यह अभी एक वैज्ञानिक कल्पना है, सिद्ध नहीं। कविता की पंक्ति ‘लाखों ब्रह्मांडों में’ इसी कल्पना को छूती है। |
खोजने के स्रोत: विद्यालय का पुस्तकालय, विज्ञान की पत्रिकाएँ, इसरो (ISRO) और नासा (NASA) की वेबसाइट, तथा अपने विज्ञान-शिक्षक। हर उत्तर के साथ यह भी लिखिए कि वह कहाँ से मिला — स्रोत लिखना अच्छी खोज की पहली शर्त है।