मल्हार अध्याय 9 आपके शब्द

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“सबको समेटे है / परिधि नभ गंगा की” — आपने ‘आकाशगंगा’ शब्द सुना और पढ़ा होगा। लेकिन कविता में ‘नभ गंगा’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। आप भी अपने समूह में मिलकर इसी प्रकार दो शब्दों को मिलाकर नए शब्द बनाइए।
उत्तर

नभ + गंगा = नभगंगा — आकाश में बहती हुई गंगा, अर्थात आकाशगंगा। कवि ने ‘आकाश’ की जगह उसका छोटा और अधिक काव्यात्मक पर्याय ‘नभ’ रखा, जिससे शब्द हल्का और लयदार हो गया।

पहला शब्ददूसरा शब्दनया शब्दअर्थ
नभचरनभचरआकाश में विचरने वाला — पक्षी
जलधाराजलधारापानी की बहती धार
गिरिराजगिरिराजपर्वतों का राजा
पवनपुत्रपवनपुत्रपवन का पुत्र — हनुमान
चंद्रमुखचंद्रमुखचंद्रमा-सा मुख
रातरानीरातरानीरात में महकने वाला फूल
दिनकरदिनकरदिन करने वाला — सूर्य
मेघदूतमेघदूतबादल जो संदेश ले जाए
ऐसे शब्द क्यों बनाए जाते हैं: दो शब्द जुड़कर एक चित्र बना देते हैं। ‘आकाशगंगा’ कहने पर हम एक जानकारी देते हैं; ‘नभ गंगा’ कहने पर आँखों के सामने आकाश में बहती नदी आ जाती है। कविता जानकारी नहीं, चित्र देती है — इसीलिए वह ऐसे शब्द गढ़ती है।
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