प्र1.
आइए, अब पढ़ते हैं प्रसिद्ध गीत ‘होंगे कामयाब’। (भावांतर — गिरिजा कुमार माथुर)
उत्तर
यह वही गीत है जिसका उल्लेख ‘कवि से परिचय’ में है — गिरिजा कुमार माथुर ने इसे अंग्रेज़ी गीत We Shall Overcome के भावांतर के रूप में लिखा। भावांतर का अर्थ शब्द-दर-शब्द अनुवाद नहीं, बल्कि भाव को दूसरी भाषा में फिर से रचना है।
गीत कहता क्या है — ‘होंगे कामयाब… एक दिन’। पूरा गीत एक ही वाक्य को दोहराता है और हर बार उसमें एक नई बात जोड़ता है — मन में विश्वास, चारों ओर शांति, किसी का डर न होना, और हाथों में हाथ डालकर साथ चलना।
इसे इसी पाठ में क्यों रखा गया: ‘आदमी का अनुपात’ बीमारी बताती है, यह गीत दवा। कविता जिन ईर्ष्या, अहं और अविश्वास की दीवारों की बात करती है, गीत उन्हीं के उलटे भाव गाता है — विश्वास, शांति, निर्भयता और साथ चलना। कविता की अंतिम पंक्ति है ‘एक कमरे में / दो दुनिया रचाता है’; गीत की धुरी है ‘हम चलेंगे साथ-साथ / डाल हाथों में हाथ’। दो दुनियाएँ फिर से एक होती हैं।
ध्यान देने योग्य शिल्प: दोनों रचनाओं में दोहराव ही मुख्य युक्ति है। कविता में दोहराव से विस्तार बनता है (कमरा → घर → मुहल्ला…), गीत में दोहराव से विश्वास बनता है (‘एक दिन’ बार-बार)। एक ही औज़ार, दो अलग काम।