प्र1.
(क) सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधिकार की बात की है। अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?
उत्तर
संविधान राज्य को यह छूट देता है कि वह स्त्रियों और बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था कर सके। इसी आधार पर अनेक विशेषाधिकार दिए गए हैं। जो आपने अपने आसपास देखे होंगे —
- पंचायत और नगर निकायों में आरक्षण — स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित हैं, इसीलिए गाँव-गाँव में महिला सरपंच और पार्षद दिखती हैं।
- मातृत्व अवकाश और सुविधाएँ — नौकरी करने वाली स्त्री को संतान के जन्म पर वेतन सहित अवकाश।
- शिक्षा में सहायता — बालिकाओं के लिए निःशुल्क शिक्षा, छात्रवृत्ति, साइकिल तथा छात्रावास जैसी योजनाएँ।
- सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएँ — कार्यस्थल पर उत्पीड़न के विरुद्ध क़ानून, महिला थाना और हेल्पलाइन, तथा रात में महिला कर्मचारी के लिए वाहन की व्यवस्था।
- समान वेतन और संपत्ति में समान अधिकार — समान कार्य के लिए समान वेतन; पैतृक संपत्ति में बेटी को बेटे के बराबर हिस्सा।
- रोज़ की छोटी सुविधाएँ — बसों तथा रेलगाड़ियों में आरक्षित सीटें, अलग डिब्बा, और सरकारी कार्यालयों में अलग पंक्ति।
ये ‘विशेष’ क्यों हैं: समान अधिकार क़ानून में लिख देने भर से जीवन में नहीं आ जाते। जिस समूह को सदियों तक अवसर नहीं मिला, उसे बराबरी तक लाने के लिए कुछ समय अतिरिक्त सहारा देना पड़ता है। नेताजी की भाषा में कहें तो ये व्यवस्थाएँ इसीलिए हैं ताकि स्त्री भी ‘समाज तथा राष्ट्र की सेवा में समान रूप से हिस्सा ले’ सके।