मल्हार अध्याय 3 सृजन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
इस कविता के आरंभ में एक ही संज्ञा शब्द है ‘स्वप्न’। इस शब्द को केंद्र में रखते हुए अनेक क्रिया शब्दों का ताना-बाना बुना गया है, जैसे— चलना, रूठना, मचलना, सीखना, हँसना, मुस्कुराना, गाना, ललचाना और इस प्रकार कविता पूरी हो जाती है। आप भी किसी एक संज्ञा शब्द के साथ विभिन्न क्रिया शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी कविता बनाकर कक्षा में सुनाइए। उदाहरण के लिए— बादल को / घिरते देखा है, / गरजते देखा है, / बरसते देखा है, ____________ ।
उत्तर

कैसे बनाएँ — तीन क़दम:

  1. एक संज्ञा चुनिए जिसे आपने सचमुच देखा हो — नदी, चिड़िया, बीज, हवा, दीया, रेल, बस्ता।
  2. उसकी 4–6 क्रियाएँ लिखिए, और उन्हें उसी क्रम में रखिए जिस क्रम में वे होती हैं (जैसे बादल — घिरना, गरजना, बरसना, छँटना)। यही क्रम कविता को गति देता है।
  3. अंतिम पंक्ति में मोड़ लाइए — कोई ऐसी क्रिया जो पाठक को सोचने पर मजबूर कर दे। कविता वहीं याद रह जाती है।

पुस्तक का उदाहरण पूरा कीजिए:

बादल को
घिरते देखा है,
गरजते देखा है,
बरसते देखा है,
और बरसकर खाली हो जाने पर भी मुसकराते देखा है।

नमूना कविता 1 — संज्ञा: बीज

बीज को
मिट्टी में दबते देखा है,
अँधेरे में फूलते देखा है,
चुपचाप जड़ें भेजते देखा है,
पत्थर हटाकर उगते देखा है,
और पेड़ बनकर उसी मिट्टी को थामते देखा है।

नमूना कविता 2 — संज्ञा: नदी

नदी को
पहाड़ से फिसलते देखा है,
पत्थरों से लड़ते देखा है,
खेतों में फैलते देखा है,
गाँव को पालते देखा है,
और अपना नाम छोड़कर समुद्र में मिलते देखा है।
ध्यान रखिए: तुक मिलाना ज़रूरी नहीं है — यह कविता भी मुक्त छंद में है। ज़रूरी यह है कि हर पंक्ति एक क्रिया पर टिके और सब क्रियाएँ मिलकर एक ही चित्र पूरा करें।
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