कक्षा ८ हिंदी अध्याय 3 एक आशीर्वाद के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

एक आशीर्वाद दुष्यंत कुमार की एक छोटी कविता है। पूरी कविता एक ही वाक्य की तरह बहती है और उसी पंक्ति पर लौटकर समाप्त होती है जिससे शुरू हुई थी — “जा, / तेरे स्वप्न बड़े हों।” यही आवृत्ति कविता को आशीर्वाद का रूप देती है। कवि का परिचय पुस्तक में इस प्रकार है — दुष्यंत कुमार (1933–1975) हिंदी के लोकप्रिय रचनाकारों में से एक हैं। इनका जन्म बिजनौर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। साये में धूप इनका सर्वाधिक चर्चित ग़ज़ल संग्रह है और संपूर्ण रचना-संसार दुष्यंत कुमार रचनावली चार खंडों में प्रकाशित है। कविता का केंद्रीय विचार यह है कि सपना केवल देखने की चीज़ नहीं, करने की चीज़ है । इसीलिए कवि कहता है कि सपने “भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें” — यानी भावुकता से उतरकर वास्तविकता में काम करना सीखें। कवि साधारण सपनों का नहीं, असंभव-से दिखने वाले लक्ष्यों का आशीर्वाद देता है — “चाँद-तारों-सी अप्

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्द / प्रयोगअर्थकविता या पाठ की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
स्वप्नसपना; यहाँ — मन में ठाना गया बड़ा लक्ष्य“तेरे स्वप्न बड़े हों”हर विद्यार्थी को अपना स्वप्न स्वयं चुनना चाहिए।
भावना की गोदभावुकता का सहारा, जहाँ सपना केवल महसूस किया जाता है, किया नहीं जाता“भावना की गोद से उतरकर”भावना की गोद में बैठे-बैठे कोई काम पूरा नहीं होता।
अप्राप्यजो आसानी से प्राप्त न हो सके, दुर्लभ“चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए”परिश्रम किसी भी अप्राप्य लक्ष्य को पास ले आता है।
रूठना-मचलनाबच्चे की तरह ज़िद करना और अड़ जाना; यहाँ — लक्ष्य के लिए हठ करना“रूठना-मचलना सीखें”छोटा भाई खिलौने के लिए रूठ-मचल रहा था।
ललचानापाने की तीव्र इच्छा होना, मन खिंच जाना“हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ”पुस्तकालय की नई किताबें देखकर मन ललचा गया।
उँगली जलानाजोखिम उठाना, चोट सहकर भी आगे बढ़ना (लाक्षणिक प्रयोग)“उँगली जलाएँ”नई चीज़ सीखने में उँगली जलाने से डरना नहीं चाहिए।
अपने पाँवों पर खड़ा होनाआत्मनिर्भर होना, किसी के सहारे न रहना (मुहावरा)“अपने पाँवों पर खड़े हों।”पढ़ाई पूरी करके वह अपने पाँवों पर खड़ी हो गई।
आशीर्वादबड़ों की शुभकामना, मंगलकामनाकविता का शीर्षक — ‘एक आशीर्वाद’दादी का आशीर्वाद लेकर वह परीक्षा देने गया।
मुक्त छंदबिना निश्चित मात्रा-गणना और तुक-बंधन वाली कवितापूरी कविता की रचना-शैली‘एक आशीर्वाद’ मुक्त छंद में लिखी गई कविता है।
मानवीकरणनिर्जीव या भाववाचक वस्तु को मनुष्य की तरह दिखाना“…हँसें / मुसकराएँ / गाएँ”बादल का गरजना कविता में मानवीकरण है।
उपमादो वस्तुओं की समानता दिखाना, जिसमें ‘सा/सी/जैसा’ आता है“चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयाँ”‘चाँद-सा मुखड़ा’ में उपमा है।
उद्‌बोधनसंबोधन करते हुए दिया गया प्रेरक भाषण‘झरोखे से’ में डॉ. कलाम का उद्‌बोधनप्राचार्य के उद्‌बोधन से पूरी कक्षा उत्साहित हो गई।
  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. अनुमान और कल्पना से
  5. कविता की रचना
  6. सृजन
  7. कविता का शीर्षक
  8. भाषा की बात
  9. आना-जाना
  10. डायरी (हँसें-मुसकराएँ-गाएँ)
  11. आपकी बात
  12. सपनों की बातें
  13. हमारे सपने
  14. सबके सपने
  15. झरोखे से
  16. साझी समझ
  17. खोजबीन के लिए
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