मल्हार अध्याय 3 एक आशीर्वाद के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

एक आशीर्वाद दुष्यंत कुमार की एक छोटी कविता है। पूरी कविता एक ही वाक्य की तरह बहती है और उसी पंक्ति पर लौटकर समाप्त होती है जिससे शुरू हुई थी — “जा, / तेरे स्वप्न बड़े हों।” यही आवृत्ति कविता को आशीर्वाद का रूप देती है। कवि का परिचय पुस्तक में इस प्रकार है — दुष्यंत कुमार (1933–1975) हिंदी के लोकप्रिय रचनाकारों में से एक हैं। इनका जन्म बिजनौर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। साये में धूप इनका सर्वाधिक चर्चित ग़ज़ल संग्रह है और संपूर्ण रचना-संसार दुष्यंत कुमार रचनावली चार खंडों में प्रकाशित है। कविता का केंद्रीय विचार यह है कि सपना केवल देखने की चीज़ नहीं, करने की चीज़ है । इसीलिए कवि कहता है कि सपने “भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें” — यानी भावुकता से उतरकर वास्तविकता में काम करना सीखें। कवि साधारण सपनों का नहीं, असंभव-से दिखने वाले लक्ष्यों का आशीर्वाद देता है — “चाँद-तारों-सी अप्

  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. अनुमान और कल्पना से
  5. कविता की रचना
  6. सृजन
  7. कविता का शीर्षक
  8. भाषा की बात
  9. आना-जाना
  10. डायरी (हँसें-मुसकराएँ-गाएँ)
  11. आपकी बात
  12. सपनों की बातें
  13. हमारे सपने
  14. सबके सपने
  15. झरोखे से
  16. साझी समझ
  17. खोजबीन के लिए
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