प्र1.
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भों से मिलाइए। स्तंभ 1 — 1. भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें 2. हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ 3. चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें 4. …हँसें/मुसकराएँ/गाएँ | स्तंभ 2 — 1. विविध ज्ञान के प्रति आकृष्ट होना और उसे पाने की ललक होना 2. सपनों को आनंद और मुस्कुराहटों में बदलें। कठिन परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखें। 3. भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना 4. असंभव से लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना
उत्तर
सही मिलान इस प्रकार है — 1 → 3, 2 → 1, 3 → 4, 4 → 2.
| क्रम | स्तंभ 1 (कविता की पंक्ति) | स्तंभ 2 (भाव) | मिलान का आधार |
|---|---|---|---|
| 1. | भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें | 3. भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना | ‘गोद’ भावना है और ‘पृथ्वी’ वास्तविकता। गोद से उतरना ही भावुकता से निकलकर ज़मीन पर आना है। |
| 2. | हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ | 1. विविध ज्ञान के प्रति आकृष्ट होना और उसे पाने की ललक होना | ‘हर दीया’ का अर्थ है — हर स्रोत, हर विषय। दीया यहाँ ज्ञान का प्रतीक है और ‘ललचाना’ उसे पाने की ललक। |
| 3. | चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें | 4. असंभव से लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना | ‘अप्राप्य’ का सीधा अर्थ है — जो मिल न सके। ‘रूठना-मचलना’ बच्चे की ज़िद है, अर्थात् हठपूर्वक लगे रहना। |
| 4. | …हँसें / मुसकराएँ / गाएँ | 2. सपनों को आनंद और मुस्कुराहटों में बदलें। कठिन परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखें। | हँसना, मुसकराना और गाना — तीनों आनंद की क्रियाएँ हैं। कवि चाहता है कि सपने का पीछा बोझ न बने, उत्सव बने। |
ध्यान देने की बात: चारों भाव मिलकर एक क्रम बनाते हैं — पहले ज़मीन पर आना (यथार्थ), फिर ऊँचा लक्ष्य चुनना (हठ), फिर हर ओर से सीखने की ललक, और यह सब करते हुए मन का प्रसन्न रहना। कविता का आशीर्वाद इन्हीं चार बातों का है।