मल्हार अध्याय 3 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। 1. कविता में किसे संबोधित किया गया है? • युवा वर्ग को • नागरिकों को • बच्चों को • श्रमिकों को
उत्तर

उपयुक्त उत्तर हैं — युवा वर्ग को और बच्चों को। इन दोनों के सामने तारा (★) बनाइए।

विकल्पसही / ग़लतकारण
युवा वर्ग कोसही ★कविता का पहला शब्द ही “जा” है — यह किसी बड़े का उस व्यक्ति से कहा गया वाक्य है जो अभी घर से निकल रहा है, जिसके सामने पूरा जीवन पड़ा है। “अपने पाँवों पर खड़े हों” का आशीर्वाद उसी को दिया जाता है जो अभी आत्मनिर्भर होने की दहलीज़ पर है।
नागरिकों कोग़लतकविता में देश, समाज, कर्तव्य या अधिकार की कोई बात नहीं है। ‘नागरिक’ एक सामाजिक-राजनीतिक भूमिका है; कविता व्यक्ति के सपनों की बात करती है।
बच्चों कोसही ★कविता की सारी क्रियाएँ बचपन की हैं — गोद से उतरना, चलना सीखना, रूठना-मचलना। इसीलिए यह आशीर्वाद बच्चों पर भी उतना ही लागू होता है।
श्रमिकों कोग़लतकविता में श्रम, मज़दूरी या किसी विशेष व्यवसाय का उल्लेख नहीं है। यह किसी एक वर्ग की नहीं, हर उस व्यक्ति की कविता है जो अभी बढ़ रहा है।
क्यों दो उत्तर सही हैं: प्रश्न स्वयं कहता है कि “कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।” कविता का ‘तू’ किसी नाम वाले व्यक्ति का नहीं है — वह हर उस उम्र का है जिसके सपने अभी बन रहे हैं। इसलिए बच्चा और युवा, दोनों इस संबोधन में आते हैं।
प्र2.
2. “तेरे स्वप्न बड़े हों” पंक्ति में ‘स्वप्न’ से क्या आशय है? • कल्पना की उड़ान भरना • आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना • बहुत-सी उपलब्धियाँ पाना • बड़े लक्ष्य निर्धारित करना
उत्तर

उपयुक्त उत्तर हैं — बड़े लक्ष्य निर्धारित करना और आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखना। इनके सामने तारा (★) बनाइए।

विकल्पसही / ग़लतकारण
कल्पना की उड़ान भरनाग़लतकविता इसी से मना करती है। अगली ही पंक्ति है — “भावना की गोद से उतरकर / जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें।” केवल उड़ती हुई कल्पना कवि को स्वीकार नहीं; वह चाहता है कि सपना ज़मीन पर उतरे।
आकांक्षाएँ और रुचियाँ रखनासही ★“हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ” — यानी हर नई चीज़ की ओर मन खिंचे। यह रुचि और आकांक्षा का ही वर्णन है।
बहुत-सी उपलब्धियाँ पानाग़लतकविता उपलब्धियों की गिनती की नहीं, सपने के आकार की बात करती है — “बड़े हों”, न कि “बहुत हों”। कवि माँग रहा है कि सपना ऊँचा हो, चाहे एक ही हो।
बड़े लक्ष्य निर्धारित करनासही ★यही पंक्ति का सीधा अर्थ है — “चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों” के लिए ज़िद करना, अर्थात् वह लक्ष्य चुनना जो पहली नज़र में असंभव लगे।
ध्यान दीजिए: ‘सपना’ शब्द के दो अर्थ हैं — (1) नींद में दिखने वाला दृश्य, (2) जागते हुए मन में ठाना गया लक्ष्य। कविता में दूसरा अर्थ है। यही बात पुस्तक के अंत में डॉ. कलाम भी कहते हैं — “सपने वह होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।”
प्र3.
3. “उँगली जलाएँ” पंक्ति में उँगली जलाने का भाव है— • चुनौतियों को स्वीकार करना • प्रकाश का प्रसार करना • अग्नि के ताप का अनुभव करना • कष्टों से नहीं घबराना
उत्तर

उपयुक्त उत्तर हैं — चुनौतियों को स्वीकार करना और कष्टों से नहीं घबराना। इनके सामने तारा (★) बनाइए।

विकल्पसही / ग़लतकारण
चुनौतियों को स्वीकार करनासही ★दीये तक हाथ बढ़ाना ही जोखिम उठाना है। जो केवल दूर से रोशनी देखकर खुश रहता है, वह कुछ पाता नहीं; कवि चाहता है कि हाथ बढ़े, भले उँगली जले।
प्रकाश का प्रसार करनाग़लतपंक्ति में उजाला फैलाने की नहीं, उजाले तक पहुँचने की बात है। ‘ललचाएँ’ पाने की इच्छा दिखाता है, देने की नहीं।
अग्नि के ताप का अनुभव करनाग़लतयह पंक्ति का शब्दशः अर्थ है, भाव नहीं। कविता में दीया ज्ञान और लक्ष्य का प्रतीक है — असली आग का नहीं।
कष्टों से नहीं घबरानासही ★उँगली जलने पर भी हाथ पीछे न खींचना ही यह भाव है — कि सीखने और पाने में जो चोट लगे, उसे सह लिया जाए।
बात की जड़: कवि ‘ललचाएँ’ और ‘जलाएँ’ को जान-बूझकर साथ रखता है। पहली क्रिया इच्छा है, दूसरी उसकी क़ीमत। कविता कहती है कि इच्छा और क़ीमत — दोनों एक साथ आती हैं, और दोनों को स्वीकार करना ही बड़े सपने की शर्त है।
प्र4.
4. “अपने पाँवों पर खड़े हों” पंक्ति से क्या आशय है? • अपने पैरों पर खड़े होना • सफलता प्राप्त करना • कठिनाइयों का सामना करना • आत्मनिर्भर होना
उत्तर

सबसे उपयुक्त उत्तर है — आत्मनिर्भर होना। इसके सामने तारा (★) बनाइए। ‘कठिनाइयों का सामना करना’ को भी दूसरे उत्तर के रूप में लिया जा सकता है, क्योंकि आत्मनिर्भरता कठिनाइयों को अकेले झेले बिना नहीं आती।

विकल्पसही / ग़लतकारण
अपने पैरों पर खड़े होनाग़लतयह उत्तर नहीं, वही पंक्ति दूसरे शब्दों में है। प्रश्न ‘आशय’ पूछता है, अर्थात् मुहावरे के पीछे का भाव।
सफलता प्राप्त करनाग़लतसफलता परिणाम है, आत्मनिर्भरता स्थिति। कोई व्यक्ति दूसरों के सहारे भी सफल दिख सकता है — पर कविता उससे संतुष्ट नहीं।
कठिनाइयों का सामना करनास्वीकार्य ★अपने पाँवों पर खड़ा व्यक्ति ही अपनी कठिनाइयाँ स्वयं झेलता है। इसलिए यह भाव इस पंक्ति से जुड़ा हुआ है, यद्यपि मुख्य भाव नहीं।
आत्मनिर्भर होनासही ★‘अपने पाँवों पर खड़ा होना’ हिंदी का प्रसिद्ध मुहावरा है जिसका अर्थ ही है — किसी के सहारे के बिना अपना जीवन चलाना।
कविता की बुनावट देखिए: कविता की शुरुआत ‘गोद’ से होती है और अंत ‘पाँवों’ पर। गोद से उतरकर, चलना सीखकर, गिरकर, जलकर — तब जाकर पाँवों पर खड़ा होना। यह क्रम अपने आप में एक पूरी विकास-यात्रा है।
प्र5.
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

यह चर्चा की गतिविधि है। इसका उद्देश्य यह है कि आप अपने उत्तर का कारण बता सकें — क्योंकि कविता में अनेक उत्तर सही हो सकते हैं, पर हर उत्तर के पीछे कविता की कोई पंक्ति होनी चाहिए।

चर्चा किस तरह कीजिए:

  1. हर साथी अपना चुना हुआ विकल्प पढ़े और साथ में वह पंक्ति बताए जिसके आधार पर उसने वह विकल्प चुना।
  2. फिर पूछिए — “क्या यह पंक्ति सचमुच यही कह रही है, या हम अपनी ओर से कुछ जोड़ रहे हैं?”
  3. जिन विकल्पों को सबने छोड़ा, उनके छोड़ने का कारण भी बताइए। ग़लत विकल्प क्यों ग़लत है — यह बताना भी उतना ही ज़रूरी है।
  4. अंत में समूह मिलकर तय करे कि किन प्रश्नों में एक से अधिक उत्तर वास्तव में बनते हैं।

नमूना उत्तर: “मैंने पहले प्रश्न में ‘युवा वर्ग को’ चुना, क्योंकि ‘जा’ कहकर किसी को घर से बाहर भेजा जा रहा है और ‘अपने पाँवों पर खड़े हों’ का आशीर्वाद युवा को ही दिया जाता है। मेरी साथी ने ‘बच्चों को’ चुना, क्योंकि ‘गोद’, ‘चलना सीखें’ और ‘रूठना-मचलना’ — ये सब बचपन के शब्द हैं। चर्चा के बाद हमें लगा कि दोनों उत्तर सही हैं, क्योंकि कवि ने किसी एक उम्र का नाम नहीं लिया।”

इससे क्या सीखते हैं: कविता का अर्थ पाठक के साथ मिलकर बनता है। पर हर अर्थ मान्य नहीं होता — मान्य वही है जिसे कविता के शब्द सँभाल सकें। चर्चा का असली काम यही जाँच करना है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ