मल्हार अध्याय 2 दो गौरैया के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
दो गौरैया भीष्म साहनी की एक कहानी है, जिसे घर का बेटा प्रथम पुरुष (‘मैं’) में सुनाता है। पुस्तक की अनुक्रमणिका में इसे ‘कहानी’ कहा गया है और लेखक का नाम पाठ के अंत में तथा ‘लेखक से परिचय’ में दिया गया है — भीष्म साहनी (1915–2003)। घर में तीन ही व्यक्ति हैं — माँ, पिताजी और ‘मैं’। पर पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है , क्योंकि आम के पेड़ के पक्षी, चूहे, बिल्ली, चमगादड़, कबूतर, छिपकलियाँ और चींटियाँ — सब उसी घर के ‘असली मालिक’ बने हुए हैं। एक दिन दो गौरैयाँ बिना पूछे अंदर आकर मकान का ‘निरीक्षण’ करती हैं और दो दिन बाद बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं। यहीं से पिताजी और गौरैयों की लंबी लड़ाई शुरू होती है। पिताजी ताली बजाते हैं, ‘श...शू’ करते हैं, कूदते हैं, लाठी घुमाते हैं, दरवाजों के नीचे कपड़े ठूँसते हैं, टूटे शीशे वाला रोशनदान बंद करते हैं — और गौरैयाँ हर बार ल
अभ्यास
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- संवाद और अभिनय
- बदली कहानी
- कहने के ढंग/क्रिया विशेषण
- घर के प्राणी
- हेर-फेर मात्रा का
- वाद-विवाद
- कहानी की रचना
- पाठ से आगे
- चिड़ियों का घोंसला
- मल्हार
- हास्य-व्यंग्य
- आज की पहेली
- झरोखे से
- साझी समझ
- पढ़ने के लिए