कक्षा ८ हिंदी अध्याय 2 दो गौरैया के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

दो गौरैया भीष्म साहनी की एक कहानी है, जिसे घर का बेटा प्रथम पुरुष (‘मैं’) में सुनाता है। पुस्तक की अनुक्रमणिका में इसे ‘कहानी’ कहा गया है और लेखक का नाम पाठ के अंत में तथा ‘लेखक से परिचय’ में दिया गया है — भीष्म साहनी (1915–2003)। घर में तीन ही व्यक्ति हैं — माँ, पिताजी और ‘मैं’। पर पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है , क्योंकि आम के पेड़ के पक्षी, चूहे, बिल्ली, चमगादड़, कबूतर, छिपकलियाँ और चींटियाँ — सब उसी घर के ‘असली मालिक’ बने हुए हैं। एक दिन दो गौरैयाँ बिना पूछे अंदर आकर मकान का ‘निरीक्षण’ करती हैं और दो दिन बाद बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में घोंसला बना लेती हैं। यहीं से पिताजी और गौरैयों की लंबी लड़ाई शुरू होती है। पिताजी ताली बजाते हैं, ‘श...शू’ करते हैं, कूदते हैं, लाठी घुमाते हैं, दरवाजों के नीचे कपड़े ठूँसते हैं, टूटे शीशे वाला रोशनदान बंद करते हैं — और गौरैयाँ हर बार ल

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शब्दअर्थपाठ की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
सराययात्रियों के ठहरने की जगह, जहाँ लोग आते-जाते रहते हैं“पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।”रेल छूटने तक हम सराय में ठहरे रहे।
डेरा डालनाकिसी जगह जमकर बैठ जाना, अस्थायी ठिकाना बनाना“तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं।”बारात तीन दिन धर्मशाला में डेरा डाले रही।
धमा-चौकड़ीउछल-कूद और शोर-शराबा“वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते।”छुट्टी के दिन बच्चों की धमा-चौकड़ी सुबह से शुरू हो जाती है।
अँगीठीकोयला जलाकर सेंकने-पकाने का छोटा चूल्हा“एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है।”सर्दियों में दादी अँगीठी के पास बैठकर कहानी सुनाती थीं।
रोशनदानदीवार में ऊपर की ओर बना हवा-रोशनी का छोटा झरोखा“अबकी बार वे रोशनदान में से आ गई थीं जिसका एक शीशा टूटा हुआ था।”रोशनदान से आती धूप कमरे में एक चौकोर बना रही थी।
निरीक्षणध्यान से देख-परखकर जाँच करना“मकान का निरीक्षण कर रही हैं कि उनके रहने योग्य है या नहीं।”अधिकारी ने विद्यालय के भवन का निरीक्षण किया।
व्यंग्यहँसी-मज़ाक या उपहास के माध्यम से किसी कमी या विडंबना को उजागर करना“छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!” माँ ने व्यंग्य से कहा।उसकी बात सीधी लगती है, पर उसमें गहरा व्यंग्य छिपा रहता है।
थिगलीकपड़े का छोटा टुकड़ा, पैबंद“सूखी घास और रुई के फाहे और धागे और थिगलियाँ लाठी के सिरे पर लिपटने लगीं।”पुरानी रजाई पर जगह-जगह थिगलियाँ लगी थीं।
चुगापक्षियों का दाना-भोजन“उनकी नन्हीं-नन्हीं चोंचों में चुगा डालने लगे।”गौरैया दिन-भर बच्चों के लिए चुगा जुटाती रही।
अवाक्चकित होकर बोलती बंद हो जाना“मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा।”परिणाम सुनकर वह कुछ देर अवाक् खड़ा रह गया।
सहनशीलतासहने की शक्ति, धैर्य“जब उनकी सहनशीलता चुक गई तो वह कहने लगे…”शिक्षक की सहनशीलता ही कक्षा को सँभाले रखती है।
गुमसुमचुपचाप, बिना बोले, उदास“दोनों गौरैयाँ बाहर दीवार पर गुमसुम बैठी थीं।”हार के बाद पूरी टीम गुमसुम बैठी थी।
  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. अनुमान और कल्पना से
  6. संवाद और अभिनय
  7. बदली कहानी
  8. कहने के ढंग/क्रिया विशेषण
  9. घर के प्राणी
  10. हेर-फेर मात्रा का
  11. वाद-विवाद
  12. कहानी की रचना
  13. पाठ से आगे
  14. चिड़ियों का घोंसला
  15. मल्हार
  16. हास्य-व्यंग्य
  17. आज की पहेली
  18. झरोखे से
  19. साझी समझ
  20. पढ़ने के लिए
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