मल्हार अध्याय 2 कहानी की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।” इस पंक्ति में बताया गया है कि पिताजी का दृष्टिकोण कैसे बदल गया। इस प्रकार यह विशेष वाक्य है। इस तरह के वाक्यों से कहानी और अधिक प्रभावशाली बन जाती है। (क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूँढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
उत्तर

पहले उस नमूने वाले वाक्य को समझिए। कहानी की शुरुआत में यही शोर पिताजी को असह्य था — “वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ”। अंत में शोर वही है, पर प्रतिक्रिया उलट गई है। लेखक ने कहीं नहीं लिखा कि “पिताजी को गौरैयों से प्रेम हो गया” — उसने केवल एक मुसकान दिखाई, और पूरा परिवर्तन पाठक तक पहुँच गया।

कहानी की विशेषताओं की सूची:

  1. प्रथम पुरुष कथन — घर का बेटा ‘मैं’ बनकर सुनाता है, इसलिए घटनाएँ पास से देखी हुई लगती हैं।
  2. अतिशयोक्ति से हास्य — “बीसियों तो चूहे बसते हैं”, “चींटियों की तो जैसे फौज ही छावनी डाले हुए है”।
  3. छोटे-छोटे संवाद — पूरी कहानी बातचीत से आगे बढ़ती है, वर्णन से नहीं।
  4. व्यंग्य — माँ का हर वाक्य सीधा नहीं, तिरछा है।
  5. पशु-पक्षियों का मानवीकरण — बिल्ली ‘फिर आऊँगी’ कहती है, चमगादड़ ‘कसरत’ करते हैं, गौरैयाँ ‘निरीक्षण’ करती हैं।
  6. दोहराव से गति — निकालना–लौटना, निकालना–लौटना; हर बार एक नया रास्ता। इसी से कहानी में लय बनती है।
  7. बिना उपदेश का अंत — कोई सीख नहीं लिखी गई, केवल एक दृश्य छोड़ दिया गया।
  8. छोटे ब्योरों से बड़ी बात — “कुछ-कुछ दुबला गई थीं, कुछ-कुछ काली पड़ गई थीं” — इससे गौरैयों का दुख बिना कहे कह दिया गया।
  9. सामान्य घर का सामान्य दृश्य — पंखा, रोशनदान, अँगीठी, लाठी, स्टूल; कोई असाधारण घटना नहीं, फिर भी कहानी बँधी रहती है।
समूह-कार्य कैसे कीजिए: कहानी को चार हिस्सों में बाँट लीजिए और हर समूह अपने हिस्से से ऐसे ‘विशेष वाक्य’ छाँटे जो कुछ बदलते हुए दिखाते हों। फिर सब मिलाकर एक सूची बनाइए।
प्र2.
(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी में से चुनकर लिखिए। [तालिका — कहानी की विशेषताएँ / कहानी में से उदाहरण : 1. किसी बात को कल्पना से बढ़ा-चढ़ाकर कहना 2. हास्य यानी हँसी-मज़ाक का उपयोग किया जाना 3. सोचा कुछ और, हुआ कुछ और 4. दूसरों के मन के भावों का अनुमान लगाना 5. किसी की कही बात को उसी के शब्दों में लिखना 6. किसी प्राणी या उसके कार्य को कोई अन्य नाम देना 7. किसने किससे कोई बात कही, यह सीधे-सीधे बताए बिना उस संवाद को लिखना]
उत्तर
कहानी की विशेषताएँकहानी में से उदाहरण
1. किसी बात को कल्पना से बढ़ा-चढ़ाकर कहना(पुस्तक में दिया गया) “जो भी पक्षी पहाड़ियों-घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है, पिताजी कहते हैं वही सीधा हमारे घर पहुँच जाता है, जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो।”
और भी: “वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ।” · “चींटियों की तो जैसे फौज ही छावनी डाले हुए है।” · “चलो, दो तिनके तो निकल गए, अब बाकी दो हजार भी निकल जाएँगे!”
2. हास्य यानी हँसी-मज़ाक का उपयोग किया जाना“वह फौरन उठ खड़े हुए और पंखे के नीचे जाकर जोर से ताली बजाई और मुँह से ‘श...शू’ कहा, बाँहें झुलाईं, फिर खड़े-खड़े कूदने लगे।”
और: “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” · “एक बार तो झूलती लाठी माँ के सिर पर लगते-लगते बची।”
3. सोचा कुछ और, हुआ कुछ और“एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।” — पर वे दरवाजे के नीचे से लौट आईं।
और: “मैंने समझ लिया कि उन्हें अक्ल आ गई होगी… किसी दूसरी जगह चली गई होंगी।” — पर सुबह वे मल्हार गा रही थीं। · घोंसला तोड़ने चढ़े पिताजी अंत में मुसकराते रह गए।
4. दूसरों के मन के भावों का अनुमान लगाना“एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है उसे सर्दी बहुत लगती है।”
और: “मकान का निरीक्षण कर रही हैं कि उनके रहने योग्य है या नहीं।” · “उन्हें पिताजी का नाचना जैसे बहुत पसंद आ रहा था।” · “वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं।”
5. किसी की कही बात को उसी के शब्दों में लिखना“अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।”
और: “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!” · “आज दरवाजे बंद रखो।” · “तू खड़ा क्या देख रहा है? जा, दोनों दरवाजे बंद कर दे।”
6. किसी प्राणी या उसके कार्य को कोई अन्य नाम देना“वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।” (चहचहाहट = राग)
और: चमगादड़ “कसरत करने लगते हैं” · कबूतरों का “गुटर-गूँ का संगीत” · पक्षी पेड़ पर “डेरा डाले रहते हैं” · चूहों की “धमा-चौकड़ी” · चींटियों की “फौजछावनी” · बिल्ली का “फिर आऊँगी” कहकर जाना।
7. किसने किससे कोई बात कही, यह सीधे-सीधे बताए बिना उस संवाद को लिखना“वे अभी भी झाँके जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं?” — यहाँ न उद्धरण-चिह्न हैं, न ‘उन्होंने कहा’, फिर भी बच्चों की बात सुनाई दे जाती है।
और: पृष्ठ 15 पर पिताजी के वाक्य के तुरंत बाद बिना किसी सूचना के अगला संवाद शुरू हो जाता है — “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए…”, और बोलने वाले का नाम वाक्य के अंत में आता है।
इन सात विशेषताओं का जोड़ ही ‘शैली’ है। ध्यान दीजिए कि इनमें से पाँच का काम एक ही है — लेखक बताता नहीं, दिखाता है। वह न कहता है कि घर में बहुत जीव हैं (‘फौज’ कह देता है), न कहता है कि पिताजी हास्यास्पद लग रहे थे (उन्हें कूदते हुए दिखा देता है), न कहता है कि पिताजी बदल गए (उन्हें मुसकराते हुए छोड़ देता है)। इसी कारण यह छोटी-सी घरेलू घटना एक यादगार कहानी बन जाती है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ