प्र1.
(क) “गौरैयों ने घोंसले में से सिर निकालकर नीचे की ओर झाँककर देखा और दोनों एक साथ ‘चीं-चीं’ करने लगीं।” आपने अपने घर के आस-पास पक्षियों को क्या-क्या करते देखा है? उनके व्यवहार में आपको कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं?
उत्तर
इस प्रश्न में अपना निरीक्षण लिखना है। अच्छा उत्तर वह है जिसमें पहले पक्षी का काम लिखा हो, फिर उससे झलकने वाला भाव।
| पक्षी का व्यवहार | दिखाई देने वाला भाव |
|---|---|
| गौरैया का आँगन में फुदकना, नल के नीचे पानी में नहाना और पंख फड़फड़ाना | निश्चिंतता और उल्लास |
| कौए का किसी बिल्ली या चील को देखकर लगातार काँव-काँव करना और सब कौओं का इकट्ठा हो जाना | चेतावनी और मिल-जुलकर बचाव |
| कबूतर का दूसरे कबूतर के आगे-पीछे गरदन फुलाकर घूमना | प्रेम-निवेदन और अधिकार-भाव |
| चिड़िया का चोंच में तिनका दबाए बार-बार एक ही जगह आना | तैयारी और घर बनाने की लगन |
| घोंसले के पास कोई आ जाए तो चिड़िया का तेज-तेज चीखना और सिर पर मँडराना | डर और संतान की रक्षा का आवेग |
| बच्चों का मुँह खोलकर लगातार चीं-चीं करना | भूख और भरोसा — कि माँ-बाप जरूर आएँगे |
| शाम को तोतों और मैनाओं का झुंड बनाकर एक ही पेड़ पर लौटना और खूब शोर करना | दिन भर की थकान के बाद घर लौटने की खुशी |
नमूना उत्तर: हमारे आँगन में तुलसी के गमले के पास रोज सुबह दो गौरैयाँ आती हैं। पहले वे इधर-उधर देखती हैं, फिर पानी के कटोरे में उतरकर खूब नहाती हैं और पंख झाड़ती हैं — उस समय उनमें बिल्कुल बच्चों जैसी मस्ती दिखती है। पर जिस दिन छत पर बिल्ली दिख जाती है, उनकी आवाज ही बदल जाती है — तेज, रुक-रुककर, और वे नीचे उतरती ही नहीं। इससे मुझे लगता है कि उनकी अलग-अलग आवाजों के अलग-अलग अर्थ हैं, ठीक जैसे कहानी में बच्चों की ‘चीं-चीं’ का अर्थ था — हम आ गई हैं, हमारे माँ-बाप कहाँ हैं?