मल्हार अध्याय 2 चिड़ियों का घोंसला

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
घोंसला बनाना चिड़ियों के जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। विभिन्न पक्षी अलग-अलग तरह के घोंसले बनाते हैं। इन घोंसलों में वे अपने अंडे देते हैं और अपने चूजों को पालते हैं। (क) अपने आस-पास विभिन्न प्रकार के घोंसले ढूँढ़िए और उन्हें ध्यान से देखिए और नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए। (सावधानी— उन्हें हाथ न लगाएँ अन्यथा पक्षियों, उनके अंडों और आपको भी खतरा हो सकता है) [तालिका के स्तंभ— क्रम संख्या | घोंसले को कहाँ देखा | घोंसला किन चीजों से बनाया गया था | घोंसला खाली था या नहीं | घोंसला किस पक्षी का था]
उत्तर

यह तालिका आपके अपने निरीक्षण से भरी जानी है — इसलिए नीचे जो दिया गया है, वह भरने का नमूना है, नकल करने के लिए उत्तर नहीं। घोंसले को छूना नहीं है; दूर से, चुपचाप देखिए, और हो सके तो दोपहर में देखिए जब पक्षी अकसर बाहर रहते हैं।

क्रम संख्याघोंसले को कहाँ देखाघोंसला किन चीजों से बनाया गया थाघोंसला खाली था या नहींघोंसला किस पक्षी का था
1.घर के रोशनदान के कोने मेंसूखी घास, तिनके, रुई के फाहे, धागेनहीं — दो बच्चे थेगौरैया
2.नीम के पेड़ की ऊँची शाखा परटहनियाँ, तार का टुकड़ा, कपड़े की कतरनखाली थाकौआ
3.बरामदे के पंखे और बल्ब के बीचतिनके और सूखी पत्तियाँनहीं — कबूतरी बैठी थीकबूतर
4.बड़े पत्तों वाले पौधे पर, दो पत्ते सिले हुएमकड़ी के जाले के धागे से सिले पत्ते, भीतर रुईखाली थादर्जी चिड़िया (टेलर बर्ड)
5.पुरानी दीवार की दरार मेंमिट्टी और तिनकेपता नहीं चला — बहुत भीतर थामैना
देखते समय क्या-क्या नोट कीजिए: घोंसला किस ऊँचाई पर है, वह खुला है या ढका, वह किसी चीज़ से टिका है या लटका है। बया का घोंसला लटकता है, दर्जी चिड़िया पत्ते सी देती है, गौरैया छेद और कोने चुनती है, अबाबील मिट्टी से बनाती है। जगह और सामग्री देखकर ही अकसर पक्षी पहचाना जा सकता है।
सावधानी दोहराइए: घोंसले को छूने से मनुष्य की गंध लग सकती है, अंडे टूट सकते हैं और कई बार पक्षी घोंसला ही छोड़ देते हैं। कहानी में भी घोंसले को छेड़ने का परिणाम हमने देखा — गौरैयाँ दुबली और चुप पड़ गईं।
प्र2.
(ख) विभिन्न पक्षियों के घोंसलों के संबंध में एक प्रस्तुति तैयार कीजिए। उसमें आप चाहें तो उनके चित्र और थोड़ी रोचक जानकारी सम्मिलित कर सकते हैं।
उत्तर

प्रस्तुति की रूपरेखा (6 स्लाइड या 6 चार्ट-पन्ने):

  1. शीर्षक: “घोंसले — पक्षियों के घर”। साथ में एक वाक्य: घोंसला रहने की जगह नहीं, बच्चे पालने की जगह होता है।
  2. घोंसला किस काम आता है: अंडों को गिरने और ठंड से बचाना, बच्चों को बिल्ली-साँप-कौए से बचाना, बारिश और धूप से आड़।
  3. घोंसलों के प्रकार: कटोरानुमा (गौरैया, बुलबुल), लटकता हुआ (बया), सिला हुआ (दर्जी चिड़िया), मिट्टी का (अबाबील), छेद वाला (कठफोड़वा, तोता), केवल कंकड़ों का घेरा (टिटहरी)।
  4. सामग्री: तिनके, सूखी घास, पत्ते, रुई, धागे, बाल, पंख — और आजकल प्लास्टिक व तार भी, जो पक्षियों के लिए खतरनाक है।
  5. रोचक जानकारी: बया का घोंसला नर बनाता है और मादा उसे परखकर ही स्वीकार करती है। दर्जी चिड़िया चोंच से पत्तों में छेद कर धागे से सिलाई करती है। कोयल स्वयं घोंसला नहीं बनाती — वह कौए के घोंसले में अंडा दे देती है।
  6. हम क्या कर सकते हैं: बालकनी में पानी का कटोरा रखें, घोंसला न छेड़ें, लकड़ी का घोंसला-बक्सा टाँगें, और 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाएँ।
प्रस्तुति सुधारने के दो सुझाव: (1) हर स्लाइड पर शब्द कम और चित्र बड़ा रखें — घोंसलों की प्रस्तुति में चित्र ही मुख्य बात है। (2) अपने आस-पास खींची गई एक तस्वीर जरूर लगाएँ; इंटरनेट से ली गई दस तस्वीरों से एक अपनी तस्वीर भारी पड़ती है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ