मल्हार अध्याय 2 मल्हार

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।” ‘मल्हार’ भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक प्रसिद्ध राग का नाम है। यह राग वर्षा ऋतु से जुड़ा है। आप जानते ही हैं कि आपकी हिंदी पाठ्यपुस्तक का नाम मल्हार भी इसी राग के नाम पर है। नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों के माध्यम से राग मल्हार को सुनिए और इसका आनंद लीजिए—
उत्तर

यह सुनने की गतिविधि है। पुस्तक में दी गई कड़ी (या QR कोड) से राग मल्हार सुनिए और सुनते समय इन बातों पर ध्यान दीजिए —

  • गायन की गति कैसी है — धीमी, गंभीर, या तेज?
  • क्या सुनते हुए मन में बादल, बूँदें, ठंडी हवा जैसा कोई चित्र बनता है?
  • तबले की थाप और स्वरों के उतार-चढ़ाव में क्या आपको वर्षा की लय सुनाई देती है?
यहाँ ‘मल्हार’ शब्द क्यों आया: लेखक चाहता तो लिख सकता था — “वे प्रसन्न होकर चहचहा रही थीं।” पर उसने चहचहाहट को एक राग का नाम दे दिया। इससे तीन बातें एक साथ हो गईं — (1) गौरैयों की खुशी एक कला जैसी ऊँचाई पा गई; (2) पिताजी की झुँझलाहट और उनके गाने का विरोध और तीखा हो गया, क्योंकि जिसे वे शोर मानते हैं वह लेखक के लिए संगीत है; और (3) कहानी में वर्षा और नएपन का भाव बिना कहे आ गया।
Did you know? मल्हार वर्षा ऋतु का राग है और यही नाम आपकी पाठ्यपुस्तक का भी है, क्योंकि वर्षा में प्रकृति नया रूप लेती है — यह पुस्तक भी सृजन, सौंदर्य और नएपन पर बल देती है। मियाँ मल्हार, मेघ मल्हार, गौड़ मल्हार — मल्हार के कई रूप गाए जाते हैं।
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