तारा (★) दो विकल्पों पर बनेगा — ‘घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं’ और ‘घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं’।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है | ग़लत | कहानी में घर के आकार की कोई बात ही नहीं है। पिताजी घर की बनावट पर नहीं, उसमें आने-जाने वालों की भीड़ पर टिप्पणी कर रहे हैं। |
| घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं | सही ★ | घर में चूहे बसते हैं, कबूतर हैं, छिपकलियाँ हैं, चींटियों की “फौज” है — ये सब वहाँ रहते हैं, मेहमान नहीं हैं। |
| पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं | ग़लत | मकान उन्हीं का है। “घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं” पिताजी का व्यंग्य है, कानूनी तथ्य नहीं। |
| घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं | सही ★ | सराय की पहचान ही यही है — आना-जाना लगा रहे। बिल्ली “कभी-कभी झाँक जाती है”, तोते-गौरैयाँ आ पहुँचते हैं, चमगादड़ शाम को आते हैं। |