मल्हार अध्याय 2 कहने के ढंग/क्रिया विशेषण

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अब नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए। (क) पिताजी ने झिड़ककर कहा, “तू खड़ा क्या देख रहा है?”
उत्तर

‘झिड़ककर’ का अर्थ है — डाँटकर, तेज और रूखे स्वर में कुछ कहना। यह बताता है कि पिताजी ने कहा कैसे, इसलिए यह क्रिया विशेषण है।

अपने वाक्य:

  • दुकानदार ने बच्चे को झिड़ककर कहा, “सामान मत छुओ!”
  • भीड़ में धक्का लगने पर उसने झिड़ककर पीछे देखा।
  • माँ ने झिड़ककर कहा कि खाना छोड़कर खेलने मत जाओ।
कहानी में यह शब्द क्यों: पिताजी उस समय दो बार हार चुके हैं और माँ हँस रही हैं। उनका गुस्सा गौरैयों पर नहीं निकल पा रहा, इसलिए वह बेटे पर निकलता है। यदि लेखक केवल “पिताजी ने कहा” लिखता, तो यह भीतरी झुँझलाहट पाठक तक न पहुँचती। एक क्रिया विशेषण पूरे दृश्य का तापमान बता देता है।
प्र2.
(ख) “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो”, माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा।
उत्तर

‘गंभीरता से’ का अर्थ है — बिना हँसी-मज़ाक के, सोच-समझकर और महत्व देते हुए।

अपने वाक्य:

  • प्रधानाचार्य ने गंभीरता से कहा कि परीक्षा में नकल किसी हाल में नहीं चलेगी।
  • डॉक्टर ने गंभीरता से समझाया कि दवा बीच में छोड़ना ख़तरनाक है।
  • वह हमेशा मज़ाक करता है, पर उस दिन गंभीरता से बोला — “मुझे सचमुच मदद चाहिए।”
‘अबकी बार’ शब्द सबसे महत्वपूर्ण है। पूरी कहानी में माँ हँसती रही हैं — खिलखिलाकर, व्यंग्य से, तालियाँ बजाकर। ठीक इस जगह लेखक लिखता है “अबकी बार गंभीरता से”। इस एक बदलाव से पाठक समझ जाता है कि अब बात मज़ाक की नहीं रही — अंडे आ चुके हैं। कहानी में यही वह मोड़ है जहाँ हास्य पीछे हटता है और करुणा सामने आती है।
प्र3.
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए”, उन्होंने गुस्से में कहा।
उत्तर

‘गुस्से में’ — क्रोध के साथ, तमतमाकर। यह भी बताता है कि बात कही कैसे गई।

अपने वाक्य:

  • बार-बार टोके जाने पर उसने गुस्से में किताब मेज पर पटक दी।
  • कप्तान ने गुस्से में कहा कि इतनी लापरवाही से मैच नहीं जीते जाते।
  • गुस्से में कही गई बात अक्सर बाद में पछतावा देती है।
यहाँ यह शब्द क्यों जरूरी था: यह वाक्य कहानी का सबसे कठोर वाक्य है। ‘गुस्से में’ जोड़कर लेखक हमें बता देता है कि यह पिताजी का स्वभाव नहीं, उस क्षण की झुंझलाहट है। इसी से आगे उनका बदल जाना विश्वसनीय लगता है — जो बात ठंडे दिमाग से कही जाती, उससे लौटना कठिन होता।
प्र4.
अब आप इनसे मिलते-जुलते कुछ और क्रिया विशेषण शब्द सोचिए और उनका प्रयोग करते हुए कुछ वाक्य बनाइए। (संकेत— धीरे से, जोर से, अटकते हुए, चिल्लाकर, शरमाकर, सहमकर, फुसफुसाते हुए आदि।)
उत्तर
क्रिया विशेषणअर्थवाक्य
धीरे सेबहुत कम आवाज या गति सेदादी सो रही थीं, इसलिए मैंने धीरे से दरवाजा बंद किया।
जोर सेतेज आवाज या शक्ति सेपीछे बैठे बच्चों ने जोर से कहा कि उन्हें कुछ सुनाई नहीं दे रहा।
अटकते हुएरुक-रुककर, अटक-अटककरपहली बार मंच पर खड़े होकर वह अटकते हुए अपनी कविता सुना पाया।
चिल्लाकरबहुत ऊँचे स्वर मेंबच्चे ने चिल्लाकर बताया कि गेंद नाली में गिर गई है।
शरमाकरलजाते हुएपुरस्कार का नाम सुनकर वह शरमाकर पीछे छिप गई।
सहमकरडरकर, सिकुड़करबिल्ली को देखकर चूहा सहमकर बिल में घुस गया।
फुसफुसाते हुएबहुत धीमी, कानाफूसी जैसी आवाज मेंकक्षा में उसने फुसफुसाते हुए मुझसे उत्तर पूछा।
खिलखिलाकरखुलकर, ठहाके के साथचुटकुला सुनकर पूरी कक्षा खिलखिलाकर हँस पड़ी।
चुपचापबिना कुछ कहेपिताजी लाठी रखकर चुपचाप कुर्सी पर बैठ गए।
हाँफते हुएतेज साँस लेते हुएवह हाँफते हुए दौड़कर आया और बोला — “बस निकल गई!”
पहचानने का सरल तरीका: क्रिया से पूछिए — “कैसे?” जो उत्तर मिले, वही क्रिया विशेषण है। ‘माँ हँसीं’ — कैसे? ‘खिलखिलाकर’। ‘पिताजी ने कहा’ — कैसे? ‘झिड़ककर’। ध्यान रखिए कि ‘कब’ (कल, अभी) और ‘कहाँ’ (यहाँ, बाहर) बताने वाले शब्द भी क्रिया विशेषण होते हैं, पर इस गतिविधि में केवल रीति यानी ‘कैसे’ वाले शब्द लिए गए हैं।
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