प्र1.
कहानी में आपने पढ़ा कि लेखक के घर में अनेक प्राणी रहते थे। लेखक ने उनका वर्णन ऐसे किया है जैसे वे भी मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हैं। कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे मनुष्यों जैसे कौन-कौन से काम करते थे? (क) बिल्ली— ‘फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है।
उत्तर
| क्रम | प्राणी | मनुष्यों जैसा व्यवहार (पाठ के अनुसार) |
|---|---|---|
| (क) | बिल्ली | ‘फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है — जैसे कोई मेहमान विदा लेता हो; मन हुआ तो अंदर आकर दूध पी गई, न हुआ तो बाहर से ही लौट गई। |
| (ख) | चूहे | रात-भर एक कमरे से दूसरे कमरे में भागते हैं और धमा-चौकड़ी मचाते हैं; बर्तन गिराते हैं, डिब्बे खोलते हैं, प्याले तोड़ते हैं। एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठता है जैसे उसे सर्दी लगती हो, दूसरा टंकी पर चढ़ जाता है जैसे उसे गरमी लगती हो — दोनों की अपनी-अपनी पसंद है। |
| (ग) | चमगादड़ | शाम पड़ते ही कमरों के आर-पार पर फैलाए कसरत करने लगते हैं — जैसे रोज शाम को व्यायाम करने वाले लोग। |
| (घ) | कबूतर | दिन-भर “गुटर-गूँ गुटर-गूँ” का संगीत सुनाते रहते हैं — जैसे घर में कोई रियाज़ कर रहा हो। |
| (ङ) | गौरैयाँ | बिना पूछे अंदर आकर मकान का निरीक्षण करती हैं; बिछावन बिछाती हैं और सामान ले आती हैं; मजे से बैठकर मल्हार गाती हैं; बच्चों को चुगा खिलाती हैं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय देती हैं। |
| (च) | चींटियाँ | जैसे फौज छावनी डाले हुए हो — यानी सेना की तरह घर में पड़ाव डाले बैठी हैं। |
| (छ) | पक्षी (तोते आदि) | आम के पेड़ पर डेरा डाले रहते हैं और सीधे इसी घर पहुँचते हैं, “जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो”। |
लेखक ऐसा क्यों करता है: जब पशु-पक्षियों के काम मनुष्यों के शब्दों में कहे जाते हैं — कसरत, संगीत, निरीक्षण, फौज, सामान, बिछावन — तो पाठक उन्हें ‘जीव-जंतु’ की तरह नहीं, घर के सदस्यों की तरह देखने लगता है। इसी से कहानी की सहानुभूति बनती है। यह वह गुण है जिसे ‘आपकी बात’ वाली तालिका में कहा गया है — किसी प्राणी या उसके कार्य को कोई अन्य नाम देना।
Tip: उत्तर लिखते समय हर प्राणी के आगे कहानी का असली शब्द जरूर लिखिए (डेरा, धमा-चौकड़ी, कसरत, संगीत, निरीक्षण, छावनी)। यही शब्द दिखाते हैं कि आपने पाठ ध्यान से पढ़ा है।