यह गतिविधि दो हिस्सों की है — पढ़ना और सुनाना। नीचे पहले ‘मित्रलाभ’ का सार दिया गया है (ताकि आप उसे आदर्श मानकर अपनी कहानी तैयार कर सकें), फिर सुनाने की विधि।
‘मित्रलाभ’ का सार: महिलारोप्य नगर के एक विशाल वटवृक्ष पर लघुपतनक नाम का कौआ रहता था। एक दिन उसने एक व्याध (बहेलिये) को आते देखा और सब पक्षियों को चेता दिया कि उसके बिखेरे दाने कालकूट (विष) की तरह समझना। पक्षी मान गए, पर कबूतरों का राजा चित्रग्रीव अपने हजारों साथियों सहित लोभ में आकर जाल में फँस गया — “लोभ से विवेकशक्ति नष्ट हो जाती है।”
चित्रग्रीव ने घबराने के बजाय बुद्धि से काम लिया: सब कबूतर एकजुट होकर जाल समेत उड़ गए। फिर वे अपने मित्र हिरण्यक चूहे के पास पहुँचे। हिरण्यक पहले चित्रग्रीव के बंधन काटने लगा, पर चित्रग्रीव ने कहा — “पहले मेरे साथियों के बंधन काट दो… मेरा धर्म है कि पहले इनकी सुख-सुविधा को दृष्टि में रखूँ।” यह देखकर लघुपतनक हिरण्यक पर मुग्ध हो गया और उससे मित्रता माँगी। हिरण्यक ने पहले मना किया — “तुम भोक्ता हो, मैं तुम्हारा भोजन हूँ” — पर कौए के अनुरोध और शपथ के बाद मैत्री हो गई।
आगे अकाल पड़ने पर दोनों दक्षिण दिशा के तालाब पर मन्थरक कछुए के पास चले गए। वहाँ व्याध से भागकर आया चित्रांग हिरन भी उनका मित्र बन गया। एक दिन चित्रांग जाल में फँस गया; हिरण्यक ने जाल काट दिया, पर तभी मन्थरक को व्याध ने पकड़ लिया। तब कौए ने उपाय सोचा — चित्रांग मरा हुआ बनकर लेट गया, कौआ उसे चोंच मारने लगा, और जैसे ही व्याध कछुए को जमीन पर रखकर हिरन की ओर बढ़ा, हिरण्यक ने मन्थरक के बंधन काट दिए। चारों बच निकले।
सीख: “मित्रता में बड़ी शक्ति है। हमें अपने मित्रों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।”
| पात्र | कौन | किस गुण से मदद करता है |
|---|---|---|
| लघुपतनक | कौआ | दूर तक देखने की क्षमता, सूझ-बूझ, उपाय सोचना |
| चित्रग्रीव | कबूतरों का राजा | संकट में धैर्य और साथियों को पहले रखने का नेतृत्व |
| हिरण्यक | चूहा | तीखे दाँत — जाल काटना; और सतर्कता |
| मन्थरक | कछुआ | सलाह देना और मित्र के लिए स्वयं जोखिम उठाना |
| चित्रांग | हिरन | तेज दौड़ और अंत में मरा हुआ बनकर व्याध को भरमाना |
कक्षा में कहानी कैसे सुनाएँ:
- चुनाव: पुस्तकालय से पंचतंत्र लीजिए और ऐसी कहानी चुनिए जो 4–5 मिनट में पूरी हो सके — जैसे ‘शेर और खरगोश’, ‘बंदर और मगरमच्छ’, ‘एकता में बल’ (कबूतर और जाल), ‘नीले सियार की कथा’।
- ढाँचा याद कीजिए, शब्द नहीं: कहानी को चार टुकड़ों में बाँटिए — पात्र-परिचय, समस्या, उपाय, परिणाम और सीख। रट्टा मारने से कहानी सुनाना कठिन हो जाता है, ढाँचा याद रहने से आसान।
- संवाद बोलिए: पंचतंत्र की जान उसके संवाद हैं। हर पात्र के लिए स्वर थोड़ा बदलिए — कौए की आवाज तेज, कछुए की धीमी।
- सीख अंत में, एक वाक्य में: उपदेश लंबा न कीजिए। पंचतंत्र स्वयं यही करता है — “लोभ से विवेकशक्ति नष्ट हो जाती है।”