प्र1.
नीचे दी गई चित्र-पहेली में बिल्ली को चूहे तक पहुँचाइए।
उत्तर
यह उलझी रेखाओं वाली पहेली है — पुस्तक के बाएँ नीचे कोने में बिल्ली है और दाएँ ऊपर कोने में चूहा। इनके बीच बहुत-सी लकीरें आपस में उलझी हुई हैं, पर उनमें से केवल एक ही लकीर बिल्ली से चलकर चूहे तक पहुँचती है। इसे अपनी पुस्तक में पेंसिल से हल कीजिए — नीचे हल करने की सबसे भरोसेमंद विधि दी गई है।
हल करने की विधि:
- चूहे की ओर से शुरू कीजिए। चूहे से निकलने वाली लकीर एक ही है, जबकि बिल्ली की ओर से कई रास्ते खुलते दिखते हैं। कम विकल्प वाले सिरे से चलना हमेशा आसान होता है।
- पेंसिल की नोक लकीर पर रखिए और उसे बिना उठाए चलाइए। उँगली से नहीं — पेंसिल से, ताकि आप देख सकें कि कहाँ तक पहुँचे।
- हर चौराहे पर सीधे चलते रहिए। इस तरह की पहेली में लकीरें एक-दूसरे के ऊपर से गुजरती हैं, मुड़ती नहीं। जहाँ दो लकीरें कटती दिखें, वहाँ अपनी वाली लकीर की मोटाई और मोड़ को देखकर उसी को आगे बढ़ाइए।
- कोई रास्ता किनारे पर जाकर खत्म हो जाए, तो वहाँ हल्का-सा × बनाइए और चूहे पर लौटकर दूसरी लकीर लीजिए। एक बार जाँची हुई लकीर दुबारा मत जाँचिए।
- जब पेंसिल बिल्ली तक पहुँच जाए, तो पूरी लकीर को रंगीन पेंसिल से गाढ़ा कर दीजिए — यही आपका उत्तर है।
ध्यान दीजिए: पहेली का हल हर बच्चे को अपनी पुस्तक में स्वयं खींचना है, इसलिए यहाँ रेखा का चित्र नहीं दिया जा सकता। रास्ता एक ही है — यदि आपकी लकीर चूहे से चलकर बिल्ली तक पहुँच गई, तो वही सही रास्ता है।
यह पहेली यहीं क्यों दी गई है: पूरी कहानी में पिताजी भी यही करते रहे — एक रास्ता बंद, दूसरा खुल गया; दूसरा बंद, तीसरा खुल गया। और गौरैयाँ हर बार सही रास्ता खोज लेती थीं। बिल्ली और चूहे की यह पहेली उसी दौड़ का खेल-रूप है।