प्र1.
नीचे दी गई स्थितियों के लिए अपने समूह में मिलकर अपनी कल्पना से संवाद लिखिए और बातचीत को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए— (क) “वे अभी भी झाँके जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं?” नन्हीं-नन्हीं दो गौरैया क्या-क्या बोल रही होंगी?
उत्तर
संवाद लिखने के नियम: बच्चों की भाषा छोटी और सीधी रखिए; उन्हें दुनिया का कुछ पता नहीं है, इसलिए उनके वाक्य ज़्यादातर प्रश्न होंगे। एक बच्चा थोड़ा साहसी और दूसरा थोड़ा डरा हुआ दिखाइए — इससे संवाद में जान आ जाएगी।
नमूना संवाद:
पहली नन्हीं: चीं… चीं… यह क्या है? इतना बड़ा उजाला!
दूसरी नन्हीं: मुझे डर लग रहा है। नीचे कोई खड़ा है, बहुत बड़ा-सा।
पहली: उसके हाथ में जो लंबी चीज है, वह हमारे घर को हिला रही है।
दूसरी: हमारा बिछावन कहाँ गया? यहाँ तो घास ही नहीं बची!
पहली: चीं-चीं! सुनो, हम आ गई हैं! हम यहाँ हैं!
दूसरी: माँ… माँ! तुम कहाँ हो? भूख लगी है।
पहली: ज़ोर से बोलो, वे सुन लेंगी। वे जरूर आएँगी।
दूसरी: देखो, देखो! नीचे वाले ने अपनी लंबी चीज रख दी! वह चुपचाप बैठ गया।
पहली: और वह दूसरी… उसने तो सारे दरवाजे खोल दिए!
दोनों साथ: चीं-चीं-चीं! माँ आ गई! बाबा भी आ गए!
पहली नन्हीं: चीं… चीं… यह क्या है? इतना बड़ा उजाला!
दूसरी नन्हीं: मुझे डर लग रहा है। नीचे कोई खड़ा है, बहुत बड़ा-सा।
पहली: उसके हाथ में जो लंबी चीज है, वह हमारे घर को हिला रही है।
दूसरी: हमारा बिछावन कहाँ गया? यहाँ तो घास ही नहीं बची!
पहली: चीं-चीं! सुनो, हम आ गई हैं! हम यहाँ हैं!
दूसरी: माँ… माँ! तुम कहाँ हो? भूख लगी है।
पहली: ज़ोर से बोलो, वे सुन लेंगी। वे जरूर आएँगी।
दूसरी: देखो, देखो! नीचे वाले ने अपनी लंबी चीज रख दी! वह चुपचाप बैठ गया।
पहली: और वह दूसरी… उसने तो सारे दरवाजे खोल दिए!
दोनों साथ: चीं-चीं-चीं! माँ आ गई! बाबा भी आ गए!
अभिनय के लिए सुझाव: दोनों बच्चे कुर्सी के पीछे बैठकर केवल सिर निकालकर बोलें — क्योंकि कहानी में भी वे “सिर निकाले नीचे की ओर देख रही थीं”। स्वर पतला और तेज रखें, और वाक्यों के बीच में ‘चीं-चीं’ जोड़ते चलें। मंच पर पिताजी बिना बोले लाठी नीचे रख दें — यह चुप्पी ही सबसे बड़ा संवाद है।