मल्हार अध्याय 3 डायरी (हँसें-मुसकराएँ-गाएँ)

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
हँसें-मुसकराएँ-गाएँ — अपने किसी एक दिन की समस्त गतिविधियों पर ध्यान दीजिए और अपनी डायरी में लिखिए कि आप दिनभर में कब-कब हँसे, कब-कब मुसकराए, कब-कब गाए, कब-कब रूठे, कब-कब मचले?
उत्तर

यह डायरी लिखने की गतिविधि है। डायरी में तारीख़, समय और सच्ची घटना — तीनों होने चाहिए। सबसे अच्छी डायरी वह है जिसमें केवल यह न लिखा हो कि ‘क्या हुआ’, बल्कि यह भी हो कि ‘तब मुझे कैसा लगा’।

नमूना उत्तर (डायरी का एक पृष्ठ):

दिनांक: 12 जुलाई, मंगलवार

हँसा — दोपहर में, जब मेरे मित्र आमिर ने अपनी छतरी उलटी पकड़ ली और उसमें पानी भर गया। हम दोनों बहुत देर तक हँसते रहे।
मुसकराया — सुबह जब माँ ने बस्ते में मेरी पसंद का आम रख दिया था और कुछ कहा नहीं। मुझे बाद में मिला तो अपने आप मुसकराहट आ गई।
गाया — शाम को छत पर, बारिश रुकने के बाद। कोई सुन नहीं रहा था, इसलिए मैंने पूरी आवाज़ में गाया।
रूठा — जब बड़े भाई ने मेरी साइकिल बिना पूछे ले ली। मैंने आधे घंटे तक बात नहीं की।
मचला — रात के खाने पर, जब मैंने ज़िद की कि मुझे भी विज्ञान मेले के लिए दिल्ली जाना है। पिताजी ने कहा — पहले चयन तो हो जाए!

आज का विचार: गिनकर देखा तो मैं हँसा सिर्फ़ एक बार, पर मुसकराया चार बार। लगता है दिन बड़ी-बड़ी बातों से नहीं, छोटी-छोटी बातों से अच्छा बनता है।

अपनी डायरी लिखते समय ध्यान रखिए:

  • घटना का समय लिखिए (सुबह, मध्यावकाश, शाम) — इससे डायरी सच्ची लगती है।
  • ‘रूठना’ और ‘मचलना’ को छिपाइए मत। डायरी अपने लिए लिखी जाती है, इसलिए उसमें अपनी कमज़ोरी लिखने में संकोच नहीं होना चाहिए।
  • अंत में एक पंक्ति अपने बारे में लिखिए — यही डायरी को केवल सूची से अलग बनाती है।
कविता से संबंध: कविता कहती है — सपने “हँसें / मुसकराएँ / गाएँ”। यह गतिविधि उसी को जीवन में उतारती है। जब आप अपने दिन को गिनकर देखते हैं, तो पता चलता है कि आनंद कोई बड़ी घटना नहीं — रोज़ के छोटे-छोटे क्षणों में बिखरा रहता है।
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