मल्हार अध्याय 3 झरोखे से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपने पढ़ा कि ‘एक आशीर्वाद’ कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। अब आप पढ़िए सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का एक प्रेरक उद्‌बोधन जिसमें वे न केवल सपने देखने की बात करते हैं, बल्कि सपनों को पूरा करने की योजना और प्रक्रिया के विषय में भी बताते हैं— (‘सपनों की उड़ान’)
उत्तर

‘झरोखे से’ में दिया गया यह गद्यांश डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उद्‌बोधन है, जिसका शीर्षक है “सपनों की उड़ान”। इसे पढ़कर समझने योग्य बातें ये हैं —

उद्‌बोधन की बातउसका अर्थ
“सपने वह नहीं होते जो आप नींद में देखते हैं, सपने वह होते हैं जो आपको सोने नहीं देते।”सच्चा सपना बेचैन कर देता है। जो सपना आराम से सोने दे, वह सपना नहीं, केवल कल्पना है। यही बात कविता भी कहती है — सपना ‘भावना की गोद’ से उतरे।
“अपने सपने पूरे करने के लिए आपको जागते रहना होता है, पूरी तरह आँखें खोलकर जागते रहना होता है।”जागना यहाँ केवल न सोना नहीं — सचेत रहना है। अवसर, जानकारी और अपनी कमियों — तीनों पर नज़र रखनी पड़ती है।
“आज जितनी संभावनाएँ हैं, उतनी अब तक के समूचे इतिहास में पहले कभी नहीं थीं।”इक्कीसवीं सदी में प्रौद्योगिकी और नई खोजों ने वे अवसर खोल दिए हैं जो पिछली बीस शताब्दियों में असंभव माने जाते थे।
अवसर बढ़ रहे हैं, पर समय उतना ही है — यही आज के युवा की दुविधा है।अवसरों की संख्या बढ़ने से ही समस्या पैदा हुई है — दुनिया का दायरा बढ़ता जा रहा है, इसलिए व्यक्ति को अपने को कुछ खास विषयों के संकरे दायरे में सीमित करना पड़ रहा है। डॉ. कलाम को यह सही नहीं लगता।
इसे संभव बनाने के दो तरीक़े — (1) उपलब्ध समय को बढ़ाना, (2) उतने ही समय में जितना काम किया जा सकता है, उसकी मात्रा बढ़ा देना।यही उद्‌बोधन का सबसे व्यावहारिक हिस्सा है। दूसरा तरीक़ा हमारे हाथ में है — कुशलता, अभ्यास और अच्छी योजना से एक ही घंटे में अधिक काम हो सकता है।
“यही वह लंबी छलांग है जिसका मानवता को अब तक इंतज़ार था।”यदि मनुष्य समय का उपयोग करना सीख ले तो यह विकास-क्रम का अगला चरण होगा — बाक़ी हर चीज़ तक पहुँचने के दरवाज़े अपने आप खुल जाएँगे।
कविता और इस उद्‌बोधन का संबंध: दुष्यंत कुमार सपने का आशीर्वाद देते हैं; डॉ. कलाम उसी सपने की प्रक्रिया बताते हैं। कविता कहती है “ललचाएँ / उँगली जलाएँ”; कलाम बताते हैं कि ललक को समय-प्रबंधन और योजना में कैसे बदला जाए। दोनों मिलकर एक ही बात पूरी करते हैं — बड़ा सपना देखो, और उसे ज़मीन पर चलना सिखाओ।
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