प्र1.
आपने ‘एक आशीर्वाद’ कविता पढ़ी और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उपर्युक्त उद्बोधन भी पढ़ा। अब आप इन दोनों पर कक्षा में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर
चर्चा का आधार: दोनों रचनाएँ एक ही विषय — सपने — पर हैं, पर उनका रूप, स्वर और उद्देश्य अलग-अलग है। तुलना करके देखिए, तभी चर्चा में गहराई आएगी।
| आधार | एक आशीर्वाद (दुष्यंत कुमार) | सपनों की उड़ान (डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम) |
|---|---|---|
| विधा | कविता — मुक्त छंद, चित्रात्मक भाषा | गद्य — प्रेरक उद्बोधन, तर्कपूर्ण भाषा |
| स्वर | स्नेह भरा आशीर्वाद — “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों” | चुनौती भरा आह्वान — “सपने वह होते हैं जो आपको सोने नहीं देते” |
| सपने की परिभाषा | वह जो भावना की गोद से उतरकर पृथ्वी पर चलना सीखे | वह जो नींद उड़ा दे और जागते रहने को विवश कर दे |
| कठिनाई पर दृष्टि | “उँगली जलाएँ” — चोट सहकर भी हाथ बढ़ाओ | समय की कमी और विषयों का संकरा दायरा — इन्हें योजना से जीतो |
| समाधान | हठ, ललक, प्रसन्नता और आत्मनिर्भरता | दो ठोस तरीक़े — उपलब्ध समय बढ़ाना, या उसी समय में काम की मात्रा बढ़ाना |
| अंत | वहीं लौटता है जहाँ से चला — आशीर्वाद दोहराकर | आगे की ओर खुलता है — “लंबी छलांग” और “विकास क्रम का अगला चरण” |
चर्चा के लिए प्रश्न:
- दोनों में से कौन-सी बात आपको अधिक कठिन लगती है — बड़ा सपना देखना, या उसके लिए रोज़ काम करना? क्यों?
- कविता कहती है कि सपने “हँसें/मुसकराएँ/गाएँ”, जबकि कलाम कहते हैं कि सपना सोने नहीं देता। क्या ये दोनों बातें एक-दूसरे के विरुद्ध हैं, या एक-दूसरे को पूरा करती हैं?
- “समय उतना ही है” — इस समस्या का हल आप अपने दिन में कैसे निकालेंगे?
निष्कर्ष: दोनों रचनाएँ विरोधी नहीं, पूरक हैं। कविता प्रेरणा देती है और उद्बोधन विधि। केवल प्रेरणा हो तो सपना गोद में ही रह जाता है, और केवल विधि हो तो चलने की इच्छा ही नहीं जागती। बड़ा सपना + ठोस योजना — यही दोनों पाठों की साझी समझ है।