मल्हार अध्याय 3 सपनों की बातें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? उन्हें एक परची पर लिखें। परची पर अपना नाम लिखना आवश्यक नहीं है। अपने अध्यापक द्वारा लाए गए डिब्बे में अपनी-अपनी परची को डाल दें। अध्यापक एक-एक करके इन परचियों पर लिखे सपनों को पढ़कर सुनाएँ। सभी विद्यार्थी अपने-अपने सुझाव दें कि उन सपनों को पूरा करने के लिए— • किस तरह के प्रयत्न करने होंगे? • किस तरह से योजना बनानी होगी? • किससे और किस प्रकार का सहयोग लिया जा सकता है? • लक्ष्य-प्राप्ति में संभावित चुनौतियाँ कौन-कौन सी हो सकती हैं?
उत्तर

यह पूरी कक्षा की गतिविधि है। परची पर नाम न लिखने का कारण यह है कि तब हर विद्यार्थी बिना संकोच अपना सच्चा सपना लिख पाता है, और कक्षा सपने पर बात करती है — व्यक्ति पर नहीं।

नमूना — एक परची और उस पर कक्षा के सुझाव

परची पर लिखा सपना: “मैं पशु-चिकित्सक बनना चाहता/चाहती हूँ, क्योंकि हमारे गाँव में बीमार पशुओं को दिखाने 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।”

प्रश्नकक्षा के सुझाव
किस तरह के प्रयत्न करने होंगे?विज्ञान, विशेषकर जीव विज्ञान, में मज़बूत पकड़ बनानी होगी। कक्षा 10 के बाद विज्ञान वर्ग लेना होगा। गाँव के पशुओं का ध्यान से अवलोकन करना और पशुपालकों से बातचीत करना अभी से शुरू किया जा सकता है।
किस तरह से योजना बनानी होगी?लक्ष्य को चरणों में बाँटिए — (1) कक्षा 8–10: विज्ञान और गणित मज़बूत; (2) कक्षा 11–12: जीव विज्ञान; (3) प्रवेश परीक्षा की तैयारी; (4) पशु-चिकित्सा महाविद्यालय। हर चरण के लिए समय-सीमा और एक छोटा-सा साप्ताहिक लक्ष्य तय कीजिए।
किससे और किस प्रकार का सहयोग?विज्ञान के अध्यापक से मार्गदर्शन; निकटतम पशु-चिकित्सालय के डॉक्टर से मिलकर उनका काम देखना; पुस्तकालय और इंटरनेट से जानकारी; परिवार से समय और पढ़ाई का सहयोग; छात्रवृत्ति की जानकारी विद्यालय से।
संभावित चुनौतियाँगाँव में विज्ञान वर्ग वाले विद्यालय की दूरी; पढ़ाई का ख़र्च; प्रवेश परीक्षा की कड़ी प्रतिस्पर्धा; बीच में मन का डगमगाना। इनका उत्तर — छात्रवृत्ति की खोज, समय-सारणी का अनुशासन, और किसी ऐसे व्यक्ति से जुड़े रहना जो इसी रास्ते से गुज़र चुका हो।
यह गतिविधि क्यों: कविता कहती है कि सपने “भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें”। परची में लिखा सपना भावना है; प्रयत्न, योजना, सहयोग और चुनौती — ये चार प्रश्न ही उसे पृथ्वी पर चलाना सिखाते हैं। इसीलिए पुस्तक ने ठीक यही चार प्रश्न चुने हैं।
सुझाव देते समय: किसी के सपने को ‘बहुत बड़ा है’ या ‘नहीं हो पाएगा’ कहकर मत काटिए। कक्षा का काम रास्ता सुझाना है, सपना छोटा करना नहीं।
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