प्र1.
भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखे एक और पत्र का एक अंश नीचे दिया गया है। इसे पढ़िए और आपस में विचार कीजिए।
हरिद्वार के मार्ग में — “हरिद्वार के मार्ग में अनेक प्रकार के वृक्ष और पक्षी देखने में आए। एक पीले रंग का पक्षी छोटा बहुत मनोहर देखा गया। बया एक छोटी चिड़िया है उसके घोंसले बहुत मिले। ये घोंसले सूखे बबूल काँटे के वृक्ष में हैं और एक-एक डाल में लड़ी की भाँति बीस-बीस, तीस-तीस लटकते हैं। इन पक्षियों की शिल्पविद्या तो प्रसिद्ध ही है, लिखने का कुछ काम नहीं है। इसी से इनका सब चातुर्य प्रगट है कि सब वृक्ष छोड़ के काँटे के वृक्ष में घर बनाया है। इसके आगे ज्वालापुर और कनखल और हरिद्वार हैं, जिसका वृत्तांत अगले नंबरों में लिखूँगा।”
उत्तर
अंश का सार: हरिद्वार पहुँचने से पहले, रास्ते में लेखक ने अनेक वृक्ष और पक्षी देखे — एक छोटा पीला पक्षी और बया चिड़िया के बहुत-से घोंसले। ये घोंसले सूखे बबूल के काँटेदार पेड़ पर, एक ही डाल में लड़ी की तरह बीस-तीस की संख्या में लटके थे। लेखक कहते हैं कि बया की शिल्पविद्या तो प्रसिद्ध ही है, उसके बारे में लिखने की जरूरत नहीं; उसकी असली चतुराई इस बात से पता चलती है कि उसने सब पेड़ छोड़कर काँटे वाले पेड़ पर घर बनाया।
चर्चा के लिए बिंदु
- बया ने काँटेदार पेड़ ही क्यों चुना? क्योंकि काँटे उसके शत्रुओं — साँप, नेवला, बिल्ली, बंदर — को ऊपर चढ़ने नहीं देते। यानी बया ने अपनी रक्षा के लिए वह चीज चुनी जिससे सब बचते हैं। लेखक इसे उसका ‘चातुर्य’ कहते हैं। इसमें एक जीवन-सूत्र भी है — कठिनाई से बचकर नहीं, कठिनाई का उपयोग करके सुरक्षा मिलती है।
- यह अंश मुख्य पाठ से कैसे जुड़ता है? दोनों में लेखक वही करते हैं — छोटी-सी चीज देखकर बड़ी बात कहते हैं। मुख्य पाठ में घास से भूमि की पवित्रता सिद्ध होती है; यहाँ घोंसले से बया की बुद्धि। और दोनों में तुलना है — यहाँ घोंसले ‘लड़ी की भाँति’ लटकते हैं।
- ‘अगले नंबरों में लिखूँगा’ का अर्थ: ‘नंबर’ यानी पत्रिका का अंक। इससे पता चलता है कि भारतेंदु ये पत्र क्रमशः, धारावाहिक रूप से छपने के लिए लिखते थे — आज के ब्लॉग या यात्रा-श्रृंखला की तरह। यही कारण है कि मुख्य पाठ में भी वे संपादक से पत्र को ‘स्थानदान’ देने का निवेदन करते हैं।
- यह अंश यहाँ क्यों दिया गया है? क्योंकि मुख्य पाठ हरिद्वार पहुँचने के बाद से शुरू होता है। यह अंश हमें बताता है कि रास्ता कैसा था — यानी यात्रा-वृत्तांत का वह हिस्सा जो पाठ में छूट गया था।
Did you know? बया (Baya Weaver) का घोंसला घास की पत्तियों को बुनकर बनाया जाता है और उसका द्वार नीचे की ओर एक लंबी नली जैसा होता है, ताकि कोई भीतर आसानी से न घुस सके। नर बया कई घोंसले बनाता है और मादा उनमें से एक चुनती है — इसीलिए एक ही डाल पर कई घोंसले लटके दिखाई देते हैं, जैसा लेखक ने लिखा है।