प्र1.
भारतेंदु हरिश्चंद्र का एक प्रसिद्ध नाटक है— अंधेर नगरी। इसे पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर
यह पढ़ने और चर्चा करने की परियोजना है। नीचे उतनी जानकारी दी जा रही है जिससे आप पढ़ना शुरू कर सकें और चर्चा को दिशा मिल सके — पर नाटक स्वयं पढ़ना जरूरी है।
नाटक के बारे में
- अंधेर नगरी भारतेंदु हरिश्चंद्र का लिखा एक छोटा-सा प्रहसन (हास्य-व्यंग्य नाटक) है, जो सन् 1881 में लिखा गया। यह छह अंकों का है और एक ही बैठक में पढ़ा जा सकता है।
- कथा — महंत अपने दो चेलों, गोबरधनदास और नारायणदास के साथ एक नगर में पहुँचते हैं। वहाँ बाजार में हर चीज — साग, मिठाई, चूरन — सब “टके सेर” बिकती है। महंत समझ जाते हैं कि जिस राज्य में अच्छे-बुरे का, महँगे-सस्ते का कोई भेद ही नहीं, वहाँ रहना खतरनाक है, और वे चेले को वहाँ से चलने को कहते हैं।
- गोबरधनदास सस्ते माल के लोभ में रुक जाता है। आगे राजा के दरबार में एक दीवार गिरने का मामला आता है और दोष एक से दूसरे पर टलते-टलते अंत में गोबरधनदास ही फाँसी के लिए पकड़ लिया जाता है — केवल इसलिए कि फंदे में वही ठीक बैठता है। अंत में महंत आकर उसे बचाते हैं।
- नाटक की सबसे प्रसिद्ध पंक्ति — “अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा।”
चर्चा के लिए प्रश्न
- ‘अंधेर नगरी’ का शासन किस तरह चलता है? उसमें न्याय की क्या स्थिति है?
- महंत नगर छोड़ने को क्यों कहते हैं और गोबरधनदास क्यों रुक जाता है? इससे लालच के बारे में क्या पता चलता है?
- “टके सेर भाजी टके सेर खाजा” — जहाँ सब कुछ एक ही दाम पर बिके, वहाँ मेहनत और गुण का क्या मूल्य रह जाता है?
- यह नाटक 1881 में लिखा गया था। क्या इसका व्यंग्य आज भी लागू होता है? उदाहरण देकर बताइए।
- इसे हास्य के रूप में लिखने से बात अधिक असर करती है या गंभीर लेख के रूप में लिखने से? क्यों?
‘हरिद्वार’ से जोड़कर देखिए: दोनों रचनाएँ एक ही लेखक की हैं, पर स्वर बिल्कुल अलग हैं। ‘हरिद्वार’ में भारतेंदु प्रशंसा करते हैं और ‘अंधेर नगरी’ में व्यंग्य। इससे पता चलता है कि एक ही लेखक अपने उद्देश्य के अनुसार भाषा और स्वर बदलता है — पत्र में आत्मीय और चित्रात्मक, नाटक में तीखा और हास्यपूर्ण। यही ‘लेखन के अनोखे तरीके’ का असली अर्थ है।
कैसे खोजें: ‘अंधेर नगरी’ का पूरा पाठ अनेक पुस्तकालयों में और सार्वजनिक डोमेन के डिजिटल संग्रहों में उपलब्ध है, क्योंकि यह बहुत पुरानी रचना है। कक्षा में इसका एक अंक मंचित करके देखिए — यह नाटक अभिनय के लिए ही लिखा गया था।