मल्हार अध्याय 4 सज्जन वृक्ष

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।” (क) एक पौधा लगाइए और उसकी देखभाल कीजिए ताकि वह कुछ वर्षों में बड़ा पेड़ बन सके। उसे एक नाम दीजिए और उसका मित्र बनिए।
उत्तर

यह करने वाली गतिविधि है। इसे ठीक से करने के लिए यह क्रम अपनाइए —

  1. पौधा चुनिए — वही जो आपके क्षेत्र में आसानी से पनपे। नीम, पीपल, अमरूद, जामुन, अमलतास, गुड़हल, तुलसी — स्थानीय पौधे सबसे कम देखभाल माँगते हैं। नर्सरी या वन विभाग से पूछ लीजिए।
  2. जगह चुनिए — जहाँ बड़ा होने पर उसे जगह मिले, धूप आती हो और वह किसी दीवार या तार के नीचे न हो।
  3. लगाइए — गड्ढा पौधे की जड़ से थोड़ा बड़ा, नीचे थोड़ी खाद, फिर मिट्टी दबाकर तुरंत पानी। आसपास घेरा लगा दीजिए ताकि पशु न पहुँचें।
  4. देखभाल — शुरू के कुछ हफ्ते रोज पानी, फिर सप्ताह में दो-तीन बार। खरपतवार हटाते रहिए। महीने में एक बार जड़ के पास की मिट्टी हल्की खोद दीजिए ताकि हवा मिले।
  5. नाम दीजिए — जैसे ‘सज्जन’, ‘मीत’, ‘छाया’, ‘हरिया’। नाम देने से लगाव बनता है और लगाव से देखभाल छूटती नहीं।
मेरा पौधाविवरण
नामसज्जन
प्रकारनीम
लगाने का दिनांक5 जुलाई 20XX
स्थानविद्यालय के मैदान का उत्तरी कोना
देखभाल का दिनप्रत्येक मंगलवार और शनिवार
नाम ‘सज्जन’ ही क्यों: पाठ की जिस पंक्ति से यह गतिविधि निकली है, उसी में वृक्षों को सज्जन कहा गया है। नाम में पाठ की याद जुड़ जाए तो गतिविधि केवल काम नहीं, पढ़ाई का हिस्सा बन जाती है।
प्र2.
(ख) उसके बारे में अपनी दैनंदिनी में नियमित रूप से लिखिए।
उत्तर

दैनंदिनी (डायरी) लिखने का ढंग: ऊपर दिनांक और दिन, फिर उस दिन जो देखा वह — और अंत में अपनी एक पंक्ति का विचार। हर बार लंबा लिखने की जरूरत नहीं; नियमित होना लंबा होने से अधिक जरूरी है।

प्रत्येक प्रविष्टि में ये चीजें दर्ज कीजिए — पौधे की ऊँचाई, नई पत्तियाँ, पानी दिया या नहीं, मौसम, और कोई विशेष बात (कीड़ा लगा, कली आई, कोई पक्षी बैठा)।

नमूना उत्तर (तीन प्रविष्टियाँ)

5 जुलाई, शनिवार — आज ‘सज्जन’ को मैदान के उत्तरी कोने में लगाया। ऊँचाई लगभग एक बित्ता। मिट्टी दबाकर दो लोटा पानी दिया और चारों ओर बाँस का घेरा बना दिया। लगाते समय हाथ मिट्टी से भर गए, पर अच्छा लगा। सोचा — यह पेड़ मुझसे लंबा तब होगा जब मैं शायद इस विद्यालय में नहीं रहूँगा।

19 जुलाई, शनिवार — दो नई पत्तियाँ निकली हैं, बहुत हल्के हरे रंग की। इस सप्ताह अच्छी बारिश हुई इसलिए पानी नहीं देना पड़ा। नीचे उगी घास हटाई। पड़ोस की कक्षा के दो बच्चे भी देखने आए और उन्होंने भी एक पौधा लगाने का निश्चय किया।

16 अगस्त, शनिवार — ऊँचाई अब लगभग डेढ़ फुट। कुछ पत्तियों के किनारे कटे हुए मिले — शायद कोई कीड़ा है। माली काका ने नीम के ही पत्तों का पानी छिड़कने को कहा, दवा नहीं। आज पहली बार एक गौरैया घेरे पर आकर बैठी। पाठ की वह पंक्ति याद आई — “इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं।” मेरा पेड़ अभी छोटा है, पर काम शुरू हो चुका है।

Tip: हर महीने की एक तस्वीर या एक छोटा रेखाचित्र भी डायरी में चिपकाइए। साल के अंत में उन्हें साथ रखकर देखिए — पौधे का बढ़ना और अपना लिखना, दोनों साथ-साथ दिखाई देंगे।
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