मल्हार अध्याय 4 यात्रा के व्यय की गणना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
इस पत्र में आपने हरिद्वार की एक यात्रा का वर्णन पढ़ा है। मान लीजिए कि आपको अपने मित्रों या अभिभावकों के साथ अपनी रुचि के किसी स्थान की यात्रा करनी है। उस स्थान को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए— (क) मान लीजिए कि यात्रा के लिए आपको ₹1000 दिए गए हैं। यात्रा, खाना आदि सब मिलाकर एक व्यय विवरण बनाइए।
उत्तर

चुना गया स्थान: अपने शहर से लगभग 60 किलोमीटर दूर एक पुराना किला और उसके पास का तालाब — एक दिन की यात्रा, चार मित्रों के साथ।

क्रममदब्योराराशि (₹)
1.बस का किराया (आना-जाना)₹120 एक ओर × 2240
2.प्रवेश शुल्ककिला — विद्यार्थी टिकट40
3.सुबह का नाश्ताबस अड्डे पर80
4.दोपहर का भोजनस्थानीय भोजनालय में थाली150
5.पानी और पेयबोतल तथा नींबू-पानी60
6.स्थानीय ऑटो/रिक्शाबस अड्डे से किले तक और वापस120
7.स्मृति चिह्नछोटी वस्तु (प्रश्न ख देखिए)100
8.आपात के लिए बचतदेर हो जाने, दवा या बस छूटने की स्थिति के लिए210
कुल1000
जोड़ मिलाकर देखिए —
240 + 40 = 280
280 + 80 = 360
360 + 150 = 510
510 + 60 = 570
570 + 120 = 690
690 + 100 = 790
790 + 210 = 1000
बजट बनाने के तीन नियम: (1) पहले अनिवार्य खर्च लिखिए — आना-जाना, टिकट, भोजन, पानी। (2) फिर इच्छा वाले खर्च — स्मृति चिह्न, खेल, आइसक्रीम। (3) कम-से-कम पाँचवाँ हिस्सा आपात के लिए बचाकर रखिए। जो बजट पूरा-का-पूरा खर्च दिखाता है, वह असल में बजट नहीं होता।
Try This: यात्रा से लौटकर वास्तविक खर्च की एक दूसरी सूची बनाइए और दोनों को साथ रखिए। कहाँ अनुमान गलत निकला — यही सबसे उपयोगी सीख होती है।
प्र2.
(ख) मान लीजिए कि आप इस यात्रा में एक छोटी वस्तु (स्मृति चिह्न) खरीदना चाहते हैं। आप क्या खरीदेंगे और क्यों? (संकेत — सोचिए, क्या वह आवश्यक है? बजट कैसे संभालेंगे?)
उत्तर

मैं क्या खरीदूँगा: उस स्थान के कारीगरों की बनाई एक छोटी मिट्टी की कुल्हड़-जोड़ी या हाथ से बुना कपड़े का थैला — लगभग ₹100 में।

क्यों — तीन कारण

  1. यह उसी जगह की पहचान है। जो चीज हर शहर में मिलती है (कीचेन, प्लास्टिक का खिलौना), वह स्मृति चिह्न नहीं बनती। स्थानीय हाथ से बनी वस्तु उस जगह की कहानी साथ लाती है।
  2. पैसा वहीं के कारीगर तक पहुँचता है। इससे यात्रा से उस जगह को भी कुछ मिलता है, केवल हमें ही नहीं।
  3. यह काम भी आती है। कपड़े का थैला रोज उपयोग होगा और एक पॉलीथिन कम इस्तेमाल होगी — यानी वस्तु याद भी है और उपयोगी भी।

क्या यह आवश्यक है? सच कहें तो नहीं — स्मृति चिह्न कभी आवश्यक नहीं होता। इसीलिए इसे बजट में सबसे अंत में रखा गया है। यदि दिन में कोई अनपेक्षित खर्च आ जाए (बस छूट जाए, दवा लेनी पड़े), तो सबसे पहले यही खर्च छोड़ा जाएगा।

बजट कैसे संभालूँगा

  • सुबह ही तय कर लूँगा कि स्मृति चिह्न पर ₹100 से अधिक नहीं जाएगा — पहले सीमा, फिर खरीदारी
  • खरीदने से पहले दो-तीन दुकानों पर दाम देख लूँगा।
  • खरीदारी लौटते समय करूँगा, ताकि तब तक पता चल जाए कि कितना पैसा वास्तव में बचा है।
  • हर खर्च एक छोटी परची पर लिखता चलूँगा — बजट टूटता तभी है जब हिसाब मन में रखा जाता है, कागज पर नहीं।
पाठ से जोड़िए: भारतेंदु जी ने हरिद्वार से कोई वस्तु नहीं खरीदी — वे “चित्त से” वहीं रह गए और उन्होंने अनुभव को पत्र के रूप में सहेजा। कभी-कभी सबसे अच्छा स्मृति चिह्न वह होता है जो हम खरीदते नहीं, लिखते हैं।
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