पुस्तक में दिया गया चित्र ध्यान से देखिए — उसमें एक जैसे लोग नहीं हैं। उसमें छड़ी लिए एक दृष्टिबाधित व्यक्ति, कान की मशीन लगाए एक बुजुर्ग, पहियेदार कुर्सी पर बैठी एक लड़की, गोद में शिशु लिए एक महिला, छोटे बच्चे, चश्मा लगाए बुजुर्ग और अलग-अलग पहनावे के स्त्री-पुरुष — सब एक ही समूह में हैं। अच्छा गाइड वही है जिसकी योजना इन सबके लिए एक साथ काम करे।
| चरण | किन बातों का ध्यान रखूँगा |
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| यात्रा से पहले | सबसे पहले हर व्यक्ति से पूछूँगा कि उसे किस बात में सहायता चाहिए — अनुमान नहीं लगाऊँगा। दवाइयाँ, चश्मा, कान की मशीन, बैटरी, छाता, पानी — इनकी सूची पहले ही भेज दूँगा। पूरे मार्ग की जानकारी लिखकर भी दूँगा और बोलकर भी बताऊँगा, ताकि दृष्टिबाधित और श्रवणबाधित — दोनों तक बात पहुँचे। |
| वहाँ पहुँचने में | ऐसी बस/गाड़ी चुनूँगा जिसमें चढ़ने के लिए रैंप हो या नीची सीढ़ी। पहियेदार कुर्सी और शिशु वाली माता के लिए दरवाजे के पास की सीट पहले से रखूँगा। रास्ते में हर दो घंटे पर विश्राम, जहाँ शौचालय सुलभ हो। |
| घूमने में | पहले से पता कर लूँगा कि कहाँ सीढ़ियाँ हैं और कहाँ ढलान वाला रास्ता। समूह की चाल सबसे धीमे चलने वाले के हिसाब से रखूँगा, सबसे तेज के नहीं। जो दिखाई नहीं देता उसे शब्दों में बताऊँगा; जो सुनाई नहीं देता उसे लिखकर या संकेत से बताऊँगा। बीच-बीच में छाया में बैठने की जगह तय रखूँगा। |
| भोजन में | पहले पूछूँगा — किसी को कोई चीज से एलर्जी है? कोई शाकाहारी/निराहारी है? बच्चों और बुजुर्गों के लिए हल्का भोजन। भोजनालय ऐसा चुनूँगा जहाँ पहियेदार कुर्सी अंदर तक जा सके और शौचालय पास हो। पानी सबके पास हमेशा रहे। |
| सुरक्षा | सबके पास एक परची — जिस पर समूह का नाम, मेरा नंबर और लौटने का समय हो। भीड़ में बिछड़ जाने पर मिलने का एक स्थान पहले ही तय। प्राथमिक चिकित्सा पेटी साथ। और हर आधे घंटे में एक बार गिनती। |